कर्माबाई की खिचड़ी कथा – Krmabai Ki Khichdi Story
| कृष्णभक्त कर्माबाई karmabai devotional story कर्माबाई की खिचड़ी |
खिचड़ी के लिए देरी होना
अगले दिन से कर्माबाई ने ऐसा ही किया पर उस दिन से उसे खिचड़ी बनाने मे देर होने लगी और उनका उनका दिल रोने लगा ! की मेरे ठाकुर को बहुत जोर से भूख लगी होगी , मेरा बाल गोपाल भूखा होगा ! कर्माबाई को धर्म कर्म के बारे मे कुछ पता नही था वह तो वात्सल्य की मूर्ति थी !
कर्माबाई का विलाप
श्री कर्मा बाई ने बड़े दुखी मन से श्याम प्यारे को खिचड़ी खिलाई उसी समय जगन्नाथजी मंदिर मे पुजारी ने छप्पन भोग निवेदन किए और भगवान जगन्नाथजी का आह्वान किया प्रभु झूठे मुह ही वहाँ चले गए !
ठाकुरजी के मुह पे खिचड़ी का लगना
पुजारियों ने देखा भगवान जगन्नाथजी के मुखारविंद पे खिचड़ी लगी हुई है पुजारी भी बड़ा भक्त था उसने प्रभु से ये बात जानने की विनती की !
भक्त के प्रति भगवान का प्रेम
भगवान बोले :-- मैं नित्य प्रति कर्माबाई के यहाँ खिचड़ी खाने जाता हूँ उनकी खिचड़ी मुझे बहुत प्रिय लगती है पर आज एक साधु ने उन्हे स्नान विधि बता दी तो खिचड़ी बनने मे देरी हो गई और मुझे भूख का कष्ट सहना पड़ा और तुम्हारे आह्वान पे मुझे शीघ्रता से आना पड़ा !
साधु की खोज करना
भगवान की बात सुनकर पुजारी ने साधु को खोजकर सारी बात बताई और साधु ने कर्मा बाई के घर जाकर कहा की तुम पहले की तरह ही भगवान को खिचड़ी का भोग लगाया करो तुम्हें स्नान नियम आदि की कोई आवश्यकता नहीं है !
भक्ति मे शक्ति
अगले दिन से श्री कर्माबाई पहले की तरह ही बिना स्नान के ही ठाकुर को अपनी गोद मे बिठाकर खिचड़ी खिलाने लगी ! श्री कर्माबाई ठाकुर के पवित्र धाम मे चली गई पर उनकी प्रेमऔर भक्ति की कथा आज भी प्रचलित है !
* भक्ति की ऐसी मिसाल जो आज भी श्रद्धा जगाती है !
* सच्ची भक्ति से भगवान बाल रूप मे प्रकट हुए !
* श्री जगन्नाथ धाम मे आज भी प्रभु की तृप्ति के लिए प्रतिदिन प्रात:काल खिचड़ी का भोग ही लगाया जाता है !
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Krmabai Ki Khichdi narrates how sincere devotion and righteous actions bring unexpected rewards.
The story emphasizes the importance of faith, kindness, and performing duties selflessly in daily life.
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