💥🦢 सिद्धार्थ और घायल हंस की कथा [बचपन प्रसंग ]🪔 एक दिन बालक सिद्धार्थ अपने महल के उपवन में टहल रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि आकाश से एक हंस घायल अवस्था में नीचे गिर पड़ा । उसके पंख में तीर लगा हुआ था और वह दर्द से छटपटा रहा था। सिद्धार्थ तुरंत उस हंस के पास पहुँचे। उन्होंने बहुत प्रेम और करुणा से उसके पंख से तीर निकाला , घाव को साफ किया और उसे सहलाने लगे। हंस को उनके पास सुरक्षित पाकर शांति मिली। कुछ देर बाद देवदत्त (सिद्धार्थ के चचेरे भाई) वहाँ आए और बोले, “यह हंस मेरा है, मैंने इसे शिकार में मारा है।” सिद्धार्थ ने शांत स्वर में कहा, “जिस प्राणी को जीवन दिया जाए, उस पर अधिकार उसी का होता है, जिसने उसकी रक्षा की हो ! न कि उसका, जिसने उसे मारना चाहा हो।” विवाद बढ़ने पर राजा के दरबार में निर्णय हुआ। ऋषियों और विद...