🏵️ 🪓 परशुराम अवतार – अधर्म के विरुद्ध धर्म की कठोर प्रतिज्ञा 🏵️पृथ्वी पर त्रेता युग के प्रारंभ में क्षत्रिय राजाओं का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया था। अनेक राजा अपने बल और सत्ता के अभिमान में धर्म को भूल बैठे थे। प्रजा को प्रताड़ित किया जा रहा था 🏵️ ऋषि-मुनियों के आश्रम उजाड़े जा रहे थे और न्याय के स्थान पर भयानक तबाही हो रही थी। ऐसे समय में भगवान विष्णु ने भगवान परशुराम के रूप में छठा अवतार लिया था 🏵️वो भी एक ऐसे योद्धा और संत के रूप में, जिनके हाथ में अधर्म के विरुद्ध शस्त्र था और हृदय में तपस्या थी। जमदग्नि सप्त ऋषियों मे से एक है 🏵️भगवान परशुराम जी का जन्म ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के यहाँ हुआ था। बाल्यावस्था से ही वे परम तेजस्वी, अनुशासित और ब्रह्मचारी बालक थे। उन्होंने भगवान शिव की घोर तपस्या करके उनसे अप...