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रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण

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                                                                                                                                           श्री गणेशाय नमः                                                                 श्रीजानकीवल्लभो विजयते                                                                      ...

मेरी ब्लॉगिंग यात्रा के 100 दिन, लेखन का अनुभव

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मेरी ब्लॉगिंग यात्रा के 100 दिन🪔 “पीएचडी प्रवेशपरीक्षां दत्त्वा आरब्धायाः मम ब्लॉगलेखनयात्रायाः अद्य शतदिनपूर्तिः सम्पन्ना अभवत्।” अर्थात् आज मेरी ब्लॉगिंग यात्रा के 100 दिन पूरे हो गए हैं । पीएचडी प्रवेश परीक्षा देने के बाद मैंने ब्लॉग लेखन की शुरुआत की। धीरे-धीरे यह लेखन मेरे लिए एक विशेष अनुभव बनता गया और मुझे निरंतर सीखने का अवसर मिला। मम सनातनधर्मे गाढः प्रेम अस्ति, यः मम हृदये वसति।” मुझे अपने सनातन धर्म से गहरा प्रेम है , जो मेरे हृदय मे बसता है। पुराणग्रन्थानां अध्ययनं मम विशेषः अभिरुचिः अस्ति। मुझे पुराणों का अध्ययन करना अत्यन्त प्रिय है। मेरी यही इच्छा है कि सनातन धर्म से जुड़ी सच्ची और पवित्र जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे। “सत्यं शिवं सुन्दरम्।” इसी भावना के साथ मैं आगे भी धर्म और भक्ति से जुड़ी जानकारी साझा करती रहूँगी। 🙏🏿 “अपने वृंदावन गुरुजी की प्रेरणा से ही मुझे लिखने का यह अवसर मिला है और मैं इसे खोना नहीं चाहती, क्योंकि मानव जन्म बार-बार नहीं मिलता। इसी भावना से मैंने अपने गुरुजी के चरणों की कृपा से यह लेखन आरम्भ किया है।” 🙏🏿 “मैं अभी सीखने के मार्ग पर हू...

आदि गुरु शंकराचार्य: अद्वैत वेदांत के महान आचार्य

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                                                       🙏🏿 आदि गुरु शंकराचार्य का परिचय आदि गुरु शंकराचार्य सनातन धर्म के महान दार्शनिक, संत और अद्वैत वेदांत के प्रवर्तक थे। उन्होंने पूरे भारत में धर्म, वेद और उपनिषदों का प्रचार किया और सनातन संस्कृति को पुनः स्थापित किया। आदि शंकराचार्य भारत के महान संत, दार्शनिक और अद्वैत वेदांत के प्रणेता थे। उनका जन्म लगभग 8वीं शताब्दी में केरल के कालड़ी ग्राम में हुआ। उनके पिता शिवगुरु और माता आर्यांबा अत्यंत धार्मिक थे। बालक शंकर बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे—कहा जाता है कि उन्होंने आठ वर्ष की आयु में ही वेदों का गहन अध्ययन कर लिया था। 🙏🏿संन्यास और गुरु गोविंदपाद बाल्यावस्था में ही शंकर के मन में संन्यास की प्रबल इच्छा जागी। माता की अनुमति पाकर उन्होंने नर्मदा तट पर गुरु गोविंदपाद से दीक्षा ली। गुरु ने उन्हें अद्वैत वेदांत के प्रचार का महान दायित्व सौंपा। 🙏🏿अद्वैत वेदांत का संदेश शंकराचार्य ...

महाशिवरात्रि 2026 – भगवान शिव का पावन उत्सव और आध्यात्मिक महत्व

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🌺 महाशिवरात्रि – भगवान शिव का पावन उत्सव🪔 महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण त्योहार है, जो भगवान शिव को समर्पित है। यह त्योहार हर साल फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है, जो आमतौर पर फरवरी या मार्च में आता है।  महाशिवरात्रि का अर्थ है “भगवान शिव की महान रात्रि” — यह वह रात है जब भगवान शिव विशेष रूप से भक्ति, ध्यान और शांति का अनुभव देने के लिए पृथ्वी पर शक्ति स्वरूपा माता पार्वती के साथ प्रकट होते हैं ।  रोली मोली चावल पान सुपारी लौंग इलाईची चंदन धूप दीप जनेऊ दूध दही चीनी शहद फल फूल कमल गट्टा धतूरा बेलपत्र प्रसाद दक्षिणा    🌿 1. महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है? महाशिवरात्रि मनाने के पीछे कई प्रमुख मान्यताएँ और पौराणिक कथाएँ हैं:  🔱 शिव और पार्वती का विवाह सबसे प्रसिद्ध मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यह दिव्य मिलन भगवान  शिव-शक्ति के बीच की अनंत ऊर्जा और संतुलन का प्रतीक है।   🌎  दुनिया को बचाने वाले शिव कुछ मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब विष ...

कल्पवृक्ष - समुद्र मंथन से प्राप्त इच्छा-पूर्ति करने वाला दिव्य वृक्ष

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 🌳 कल्पवृक्ष – समुद्र मंथन से प्राप्त दिव्य रत्न स्वरूप वृक्ष  🪔 1. समुद्र मंथन और 14 रत्न देवताओं और असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन से कुल 14 अमूल्य रत्न प्राप्त हुए। इन रत्नों में अमृत, लक्ष्मी, ऐरावत, कौस्तुभ मणि, कामधेनु के साथ एक अत्यंत दिव्य वृक्ष भी प्रकट हुआ, जिसे   कल्पवृक्ष कहा गया। 🌿 2. कल्पवृक्ष क्या है कल्पवृक्ष को इच्छा-पूर्ति करने वाला दिव्य वृक्ष माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से इसके सामने इच्छा करता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। यह वृक्ष स्वर्ग लोक से संबंधित माना गया है। 🌼 3. कल्पवृक्ष का स्वर्ग में स्थान समुद्र मंथन के बाद कल्पवृक्ष को इंद्र लोक (स्वर्ग) में स्थापित किया गया। यह वृक्ष देवराज इंद्र के उपवन नंदन वन में स्थित है और देवताओं की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। 🌸 4. धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कल्पवृक्ष हमें यह शिक्षा देता है कि 💥सच्ची इच्छा वही है जो धर्म से जुड़ी हो 💥लोभ और अहंकार से की गई कामना कभी फलदायी नहीं होती 💥भारतीय संस्कृति में इसे संतोष, श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक माना गया है। 🌺 5....

देवर्षि नारद जी: भक्ति और ज्ञान के महान ऋषि

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  🪔 देवर्षि नारद जी – भक्ति, ज्ञान और लोकमंगल के महान ऋषि 🪔 देवर्षि नारद जी सनातन धर्म के अत्यंत पूजनीय, प्रसिद्ध और दिव्य ऋषि माने जाते हैं। वे त्रिकालदर्शी, ब्रह्मर्षि तथा  भगवान विष्णु के परम भक्त थे। उनके मुख से सदैव “नारायण–नारायण” का उच्चारण होता रहता था। नारद जी  देवताओं, मनुष्यों और असुरों—तीनों लोकों में स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाले ऋषि हैं। देवर्षि नारद जी की कथा – जन्म से देवर्षि बनने तक 🌼 जन्म और ब्रह्माजी का आदेश उत्संगान्नारदो जज्ञे  अर्थात प्रजापति ब्रह्माजी की गोद से नारद जी का जन्म हुआ। जब ब्रह्माजी ने उन्हें  सृष्टि के विस्तार  की आज्ञा दी !  नारद जी ने कहा :- “अमृत से भी अधिक प्रिय श्री विष्णु सेवा को छोड़कर कौन मूर्ख विषयों का विष पिएगा!”            इस पर ब्रह्माजी बहुत क्रोधित हो गए ! 🔱 ब्रह्माजी का श्राप ब्रह्माजी बोले :- मेरे श्राप से तुम्हारे ज्ञान का लोप होगा। तुम उपबर्हण नाम से प्रसिद्ध होकर पचास कन्याओं के पति बनोगे। फिर दासी के पुत्र के रूप में जन्म लोगे। अंततः संत-भगवंत की कृपा से पुन...

भगवान ब्रह्मा जी – सृष्टि के रचयिता

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  🕉️ ब्रह्मा जी – सृष्टि के रचयिता 🕉️ भगवान ब्रह्मा जी हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं और उन्हें सृष्टि के रचयिता के रूप में जाना जाता है। 🛕 🌹चार मुख और चार हाथ ☘️ वे चार मुख और चार हाथों वाले दिव्य स्वरूप में प्रतिष्ठित हैं, जो उनके सर्वज्ञ और सर्वव्यापी होने का प्रतीक है। 🙏 🪔ज्ञान के स्रोत 🙏🏿  उनके हाथों में  पुस्तक 📖  माला 📿  कमंडल 🫖  🏵️ और ध्यान मुद्रा दिखाई जाती है, जो उनके ज्ञान, तपस्या और सृष्टि रचना का प्रतीक हैं। ✨   🌍  सृष्टि की रचना 🪻 पुराणों के अनुसार, भगवान ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना अपने सृजन शक्ति से की। 🌱 उन्होंने ब्रह्मांड में पहली बार  मानव 🧞  जीव-जंतु 🐅  पेड़-पौधे 🌳   जल 🥛  अग्नि 🔥  वायु 🌬️  जैसी प्राकृतिक शक्तियों का निर्माण किया। वे सभी जीवों के पालन-पोषण और उनकी जिम्मेदारी को ध्यान में  रखते हुए सृष्टि का संचालन करते हैं। ⚖️सृष्टि के नियम बनाए ब्रह्मा जी की सृष्टि धर्म, न्याय और कर्म के अनुसार  संतुलित रहती है। 🌿 🪔 सरस्वती माता और ज्ञान ...

माह स्नान के मुख्य तीर्थ जहां जल मे देवता विराजते है

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  🎉माह स्नान के सबसे प्रमुख तीर्थ और उनका महत्व  🎉 🪷माह स्नान के मुख्य तीर्थ 🪷 बैसाख मे जल और अन्न का दान  कार्तिक मे तपस्या और दीपदान,पूजा  माह मे जप, होम ,दान ,स्नान का अद्भुत महत्व बताया गया है  माह स्नान अधर्म की जड़ काट देता है  सकाम भाव से स्नान से मन वांछित फल की प्राप्ति  निष्काम भाव से मोक्ष की प्राप्ति  निरंतर दान करने वाला ,तपस्या करने वाला,अतिथि सत्कार मे लगा रहने वाले को जो दिव्य लोक मिलते है  वही माह स्नान करने वालों को मिलते है ! जो ब्रम्ह बेला मे स्नान करता है वह अपने कुल की 7 पीढ़ियाँ तार देता है   🪔माह स्नान के प्रमुख तीर्थों की सूची 🪔 तीर्थराज प्रयाग-गंगा-यमुना-सरस्वती =त्रिवेणी संगम नैमीशरण्य-गोमती   कुरुक्षेत्र-पवित्र सरोवर   हरिद्वार- गंगा  उज्जैन-शिप्रा   अयोध्या-सरयू  उत्तराखंड =यमुना  द्वारका-गोमती+समुद्र=संगम   अमरावती =कृष्णा  हिमालय =सरस्वती  समुद्र का संगम = गंगा सागर संगम  कांची =वेगवती  त्र्यंबक तीर्थ-गोदावरी   सप्त गोदावरी ...

महान गो-भक्त संत श्री राजेन्द्रदासजी महाराज

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                     मलूक पीठाधीश्वर संत स्वामी श्री राजेंद्र दास जी महाराज संक्षिप्त जीवन-परिचय   🕉️ परिचय — मलूकपीठाधीश्वर संत श्री राजेन्द्रदासजी महाराज 💥स्वामी राजेन्द्र दास देवाचार्य जी महाराज  -- आप एक  प्रतिष्ठित हिन्दू ब्राम्हण वैष्णव संत , कथा वाचक और        धर्मगुरु हैं।  💥आप  मलूक पीठाधीश्वर  के रूप में प्रतिष्ठित हैं — 🪷आप एक परंपरागत वैष्णव पीठ जो राम-भक्ति और भगवत कथा परंपरा को आगे बढ़ाता है,के आचार्य है !                                                           🎉 आपका जन्म 💥जन्म स्थान:  ग्राम  ओरछा,  जिला  टीकमगढ़ ,  मध्य प्रदेश  में हुआ।  💥जन्म तिथि:  ऋषि पंचमी ( हिन्दू पंचांग के अनुसार, जिसको विशेष मान्यता प्राप्त है )।  💥आपकी आयु : वर्तमान लगभग 49 वर्ष है !  ...

माँ गायत्री – ज्ञान, प्रकाश और आध्यात्मिक जागृति की अधिष्ठात्री

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                                                                                                               🪔 Gayatri Mata                                                                    🪔 गायत्री मंत्र🪔                                                                ॐ भूर्भुवः स्वः                             ...

हिन्दू नव वर्ष और वसंत ऋतु का पावन पर्व – चैत्र नवरात्रि

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🌼 हिन्दू नववर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) 🌼 हिन्दू नववर्ष क्या है 🌴 हिन्दू नववर्ष को विक्रम संवत नववर्ष कहा जाता है। यह हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। यही दिन चैत्र नवरात्रि का पहला दिन भी होता है। उस समय प्रकृति में चारों ओर हरियाली फैली होती है, तब सनातन का नया वर्ष आरंभ होता है! ☘️ हिन्दू नववर्ष कब शुरू होता है ☘️ महीना: चैत्र 🍀 तिथि: शुक्ल प्रतिपदा 🌲 मौसम: वसंत ऋतु 🌿 इसी दिन से हिन्दू पंचांग का नया वर्ष प्रारंभ होता है। 🕉️ धार्मिक मान्यताएँ 🌻 हिन्दू शास्त्रों के अनुसार — ✨ इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी । ✨ भगवान श्रीराम का राज्य अभिषेक भी इसी दिन हुआ था। ✨ युधिष्ठिर का राज्य अभिषेक भी इसी तिथि को माना जाता है। ✨ यह दिन शक्ति (नवरात्रि) उपासना का आरंभ माना जाता है। 🌺 भारत में अलग-अलग नाम हिन्दू नववर्ष को भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है — 🌷 उत्तर भारत = नव संवत्सर (हिन्दू नववर्ष) 🌻 महाराष्ट्र = गुड़ी पड़वा 🏵️ आंध्र प्रदेश व तेलंगाना = उगादी 🪻 कर्नाटक = युगादी 🌹 राजस्थान = थापना, संवत्सरारंभ 🌺...

एकादशी पर राजा अम्बरीष की भक्ति और सुदर्शन चक्र की दिव्य कथा

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                                              🌻 ** राजा अंबरीष जी की एकादशी व्रत निष्ठा की कथा**🌻 राजा अंबरीषजी ने एक बार अपनी पत्नी के साथ श्री कृष्ण भगवान को प्रसन्न करने के लिए वर्ष की सभी एकादशी का व्रत का नियम किया ,वर्ष पूरा होने पर धूमधाम से पारण के दिन उन्होंने भगवान वासुदेव की पूजा की ,ब्राम्हणो  को गोदान किया ,जब वे पारण करने जा रहे थे तब ही अचानक "दुर्वासा ऋषि " पधारे !  🪔दुर्वासाजी का क्रोध   अंबरीषजी ने उन्हे भोजन का आग्रह किया तो उन्होंने स्वीकार कर लिया ओर यमुना तट पे स्नान को चले गए अब  द्वादशी केवल एक घड़ी शेष थी, द्वादशी मे पारण ना करने से व्रत भंग होता ,ब्राम्हणो से पूछकर अंबरीषजी ने  भगवान का चरणामृत लेकर पारण कर लिया उधर दुर्वासाजी को अपने तप से ये बात पता चल गई ,तभी उन्होंने  अपने मस्तक से एक जटा उखाड़ ली जिससे कृत्या नाम की राक्षसी निकली ओर उसे अंबरीषजी को समाप्त करने  के लिए भेज दिया ! 🌻राक्षसी कृत्या का भस्म हो...

सनातन धर्म में पंचदेवता पूजा – महत्व और सही विधि

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                             🪔 सनातन धर्म मे सर्व प्रथम पाँच देवी-देवताओ की विशेष पूजा का विधान हमारे शास्त्रों मे बताया गया है ~ 1  श्री गणेश  2  दुर्गा  3  शिवजी  4  विष्णु जी  5  सूर्य नारायण                                                🪔    विष्णुपंचायतनश्लोक 🪔                                              ॐ विष्णुशिवगणेशसूर्यदुर्गाभ्यों नम:                                                          ॐ विष्णुपंचायनदेवताभ्यों नमः             ...

श्री गणेश – सनातन धर्म में प्रथम पूज्य, 12 पवित्र नाम और परिवार

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🌸"स्वागत है धरम की बाते डॉट कॉम" मे-यहा बहती है धर्म,भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान की निरंतर धारा, आप यहा जानेंगे  सनातन धर्म के रहस्यों, व्रतों, वेदों के श्लोक, उपनिषदो की गहराई, जीवन के संदेश, पुराणों की रोचक  कथाएं और भी बहुत कुछ :-    🌺 श्री गणेश भगवान  🌺 🌸 " Welcome to DharamKiBate.com " 🌸   🪔गणेश जी की कृपा पाने के लिए प्रतिदिन गणेशजी के 12 नामों का उच्चारण अवश्य करना चाहिए , इन नामों  को याद करने से गणेश जी असीम अनुकंपा प्राप्त होती है गणेश जी के 12 नाम इस प्रकार है ! सनातन धर्म  मे गणेश जी को अग्रगण्य माना जाता है ! बुद्धि के देवता कहलाने वाले भगवान गणेश की दो पत्नियाँ है जो इस प्रकार है :-                                             नारद जी की दो बहनें ऋद्धि और सिद्धि  🌺 नारद जी की दो बहनें गणेशजी की पत्नियाँ है  🌸 गणेशजी की दो पत्नियाँ : ऋद्धि और सिद्धि  🌸  गणेश जी  के दो पुत्र है : शुभ और लाभ...