रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण
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श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि॥🏵️
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेस विकार॥🏵️
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥🏵️
राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥🏵️
कंचन बरन बिराज सुवेसा।
कानन कुण्डल कुंचित केसा॥🏵️
हाथ वज्र औ ध्वजा विराजे।
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥🏵️
संकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग बंदन॥🏵️
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥🏵️
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥🏵️
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
विकट रूप धरि लंक जरावा॥🏵️
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचन्द्र के काज संवारे॥🏵️
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्री रघुबीर हरषि उर लाये॥🏵️
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥🏵️
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥🏵️
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥🏵️
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥🏵️
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥🏵️
तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना॥🏵️
युग सहस्र योजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥🏵️
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥🏵️
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥🏵️
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥🏵️
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डरना॥🏵️
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक ते काँपै॥🏵️
भूत पिशाच निकट नहि आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥🏵️
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥🏵️
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥🏵️
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा॥🏵️
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै॥🏵️
चारों युग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥🏵️
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥🏵️
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥🏵️
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥🏵️
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै॥🏵️
अंतकाल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥🏵️
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥🏵️
संकट कटै मिटे सब पीरा,जो सुमिरे हनुमत बलबीरा 🏵️
जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरु देव की नाईं॥🏵️
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥🏵️
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥🏵️
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥🏵️
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥🏵️
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