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रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण

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                                                                                                                                           श्री गणेशाय नमः                                                                 श्रीजानकीवल्लभो विजयते                                                                      ...

सप्त चिरंजीवी महापुरुष कौन है ? जो आज भी पृथ्वी पर घूमते है

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🌿 सप्त चिरंजीवी (अमर महापुरुष) 🪔 सप्त चिरंजीवी की कथा (हिन्दू धर्म में अमर पुरुष) हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार सप्त चिरंजीवी वे सात महान आत्माएं हैं जिन्हें ईश्वर की कृपा से अमरत्व का वरदान प्राप्त है। मान्यता है कि ये सभी महापुरुष कलियुग के अंत तक पृथ्वी पर विद्यमान रहेंगे और समय-समय पर धर्म की रक्षा करते रहेंगे। 🌿 सप्त चिरंजीवी कौन हैं? अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविनः॥ इस श्लोक के अनुसार अश्वत्थामा, राजा बलि, वेदव्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम — ये सातों चिरंजीवी हैं। 🔱 सप्त चिरंजीवी का वर्णन 1️⃣ अश्वत्थामा (द्रोणाचार्य के पुत्र) अश्वत्थामा महाभारत के एक प्रमुख योद्धा थे और द्रोणाचार्य के पुत्र थे। उन्होंने ब्रह्मास्त्र का दुरुपयोग किया, जिसके कारण भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें शाप दिया। उनका दिव्य मणि छीन लिया गया और उन्हें यह दंड मिला कि वे अमर रहकर भी असीम पीड़ा सहेंगे। मान्यता है कि वे आज भी पृथ्वी पर भटक रहे हैं। 2️⃣ राजा बलि (दानवीर असुरराज) राजा बलि अपनी दानशीलता के लिए प्रसिद्ध थे। वामन अवतार की कथा में उन्होंने तीनों लो...

माँ महागौरी कौन हैं ? सम्पूर्ण जानकारी और कथा

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🌼 महागौरी माता – नवदुर्गा का आठवाँ स्वरूप नवरात्रि के आठवें दिन माँ दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की जाती है। “महागौरी” नाम का अर्थ है अत्यंत उज्ज्वल और श्वेत वर्ण वाली देवी। उनका यह स्वरूप पवित्रता, शांति और तपस्या का प्रतीक माना जाता है। 🌸 पौराणिक कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। लंबे समय तक तप करने के कारण उनका शरीर काला हो गया था। बाद में भगवान शिव ने गंगा के पवित्र जल से उनका अभिषेक किया, जिससे उनका शरीर अत्यंत उज्ज्वल और गौर वर्ण का हो गया। तभी से उनका नाम महागौरी पड़ा। 🌸 माता का स्वरूप माँ महागौरी का स्वरूप अत्यंत शांत और दिव्य माना जाता है। उनका वर्ण अत्यंत गोरा और तेजस्वी बताया गया है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं और उनका वाहन वृषभ (बैल) माना जाता है। उनके चार हाथ होते हैं। एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे हाथ में डमरू होता है, जबकि अन्य दो हाथ अभय और वरद मुद्रा में होते हैं। 🌺 आध्यात्मिक महत्व माँ महागौरी की उपासना से भक्तों के पाप और कष्ट दूर होते हैं। उनकी कृपा से जीवन में शांति, पवित्रता और आध्यात्मिक उन्...

सप्त ऋषि तारा मंडल में सातों ऋषियों का महत्व और कथा

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सप्तऋषि का तारामंडल मे महत्व  🪔    Sapt Rishi Taara Mandal    🪔 सप्त ऋषि तारा मंडल मे ऋषियों का महत्व  आकाश में दिखाई देने वाला एक प्रमुख तारामंडल  Ursa Major (Great Bear)  ही भारतीय परंपरा में  सप्त ऋषि मंडल  कहलाता है। इसमें सात महान ऋषियों को आकाश में तारा रूप में स्थापित माना गया है। 🌿 1. ऋषि वशिष्ठ की कथा ऋषि वशिष्ठ ब्रह्मा के मानस पुत्र और महान ज्ञानी थे। वे भगवान राम के गुरु भी थे। उनकी पत्नी  अरुंधती  पतिव्रता नारी का आदर्श मानी जाती हैं। उनकी तपस्या, संयम और ज्ञान से प्रसन्न होकर देवताओं ने उन्हें आकाश में तारे का स्थान दिया, ताकि मानव सदैव धर्म और मर्यादा का मार्ग देख सके। 🌿 2. ऋषि विश्वामित्र की कथा विश्वामित्र पहले राजा कौशिक थे। वशिष्ठ की दिव्यता देखकर उन्होंने ब्राह्मण बनने का संकल्प लिया। वर्षों की कठोर तपस्या के बाद वे  ब्रह्मर्षि  बने। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवताओं ने उन्हें सप्त ऋषि मंडल में स्थान दिया, जो यह सिखाता है कि  संकल्प और तप से कोई भी उच्च बन सकता है। 🌿 3. ऋषि जमदग्नि की कथ...

सप्तऋषि तारामंडल की कथा

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🪔सप्तऋषि तारामण्डल का अर्थ         धार्मिक ओर खगोलीय दृष्टि मे      सप्तऋषि तारा मंडल आकाश में दिखने वाला सात प्रमुख तारों का समूह है।     इसे अंग्रेज़ी में ursa-major   कहा जाता है।      भारत में इसे धार्मिक दृष्टि से देखा जाता है       सप्तऋषि तारामंडल को  सात ऋषियों का समूह कहा जाता है  🪔 सप्तऋषि कौन हैं?         हिंदू शास्त्रों के अनुसार ये सात तारे सप्तऋषियों के प्रतीक है माने जाते है :- वशिष्ठ ऋषि 🍀 विश्वामित्र ऋषि ☘️ अत्रि ऋषि 🌹 भरद्वाज ऋषि 🪻 गौतम ऋषि 🌲 जमदग्नि ऋषि 🌷 कश्यप ऋषि 🌺 ये  सात ऋषि अपने ब्रह्मज्ञान, तपस्या , धर्म और सृष्टि-रक्षा के आधार माने जाते हैं। 🪔 खगोलीय (Astronomical) दृष्टि से         सप्तऋषि मंडल उत्तर दिशा में दिखाई देता है          यह साल भर (भारत में) देखे जा सकते  है         इसके तारे ध्रुव तारे (Pole Star) को पहचानने में मदद करते हैं      ...

हिन्दू शास्त्रों की महत्वपूर्ण स्मृतियाँ- भाग 2

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                                      18 स्मृतियाँ और उनके रचयिता = भाग 2 18 स्मृतियाँ ओर उनके रचयिता  पिछले भाग की 1 से 9 तक स्मृतियाँ पढ़े लिंक पे क्लिक करें  10   कात्यायन स्मृति  महा ऋषि कात्यायन बहुत पुराने शास्त्र कारों मे जाने जाते है ! स्त्री मीमांसा मे  ऋषि कात्यायन के वचन बड़े ही प्रमाणिक माने जाते है !  11   शांडिल्य स्मृति  शांडिल्य ऋषि भक्ति के आचार्य माने जाते है ! इन्होंने भगवान की भक्ति को सबसे बड़ा और कल्याण कारक माना है ! शांडिल्य  ऋषि ने भगवान का मुख्य गुण बताया है करुणा और दयालुता :-- शांडिल्य ऋषि का श्लोक : "मुख्यं तस्य हि कारुण्यम " 12   गौतम स्मृति  गौतम ऋषि सप्त ऋषियों मे से एक है ! गौतम ऋषि ब्रम्हा जी के मानस पुत्र है ! देवी अहिल्या इन्ही की पत्नी है ! गौतम स्मृति मे धर्म की महिमा ,पंच यज्ञ ,गौ महिमा ,भोजन विधि ,तीर्थों की महिमा ,भगवान की भक्ति की महिमा का वर्णन है ! 13   वसिष्ठ स्मृति  ...

राधा रानी का दिव्य सौन्दर्य – राधा कृष्ण के अनंत प्रेम की कविता

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🌺 कौन है राधा तत्व 🌺आखिर राधा है कौन 🌺इन पंक्ति से समझिए  🌺 श्रीमती राधा रानी 🌺1.   राधा रानी सौन्दर्य की सरिता  🌺     वृंदावन की कुंजों में, मंद-मंद बहे पवन, राधा के रूप की छाया से, महके हर एक वन जैसे चाँदनी उतरकर, धरती पर बिखरी हो,  राधा की मुस्कान में, कोमल सी चमकती रोशनी हो। उनकी आँखें यमुना-सी, गहरी, शांत, अनंत,लहर  जिनमें कृष्ण की छवि बसी, जैसे प्रेम का पावन व्रत। राधा की चाल में मृदुलता, जैसे कमल की पांखुरी, हर कदम से खिल उठता ब्रज, होती हवाओं में मधुरता पूरी। 🌺2.  * कृष्ण का प्रेम और राधा का रूप  *🌺 कहते है—कृष्ण बिन राधा अधूरी, राधा बिन कृष्ण न पूर्ण, दोनों के प्रेम की महिमा, शब्दों में कहलाना अपूर्ण कृष्ण की बांसुरी बोले जब, राधा का मन डौल जाए, जैसे कोई मधुर सरगम, स्वयं ब्रह्मांड को नचा जाए। कृष्ण का नाम अधरों से, जब राधा चुपके से लेती हैं, वृंदावन की हर गोपी कहती—प्रेम की मूर्ति यही तो हैं। उनके गालों की कोमल आभा, जैसे उषा की लाली, कृष्ण भी मोहित हो उठते, जब देखे राधा की रूप माधुरी  🌺3....