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दिसंबर, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण

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                                                                                                                                           श्री गणेशाय नमः                                                                 श्रीजानकीवल्लभो विजयते                                                                      ...

भक्त प्रह्लाद, नृसिह अवतार

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    🌸भक्त प्रह्लाद की सम्पूर्ण कथा 💥    🌸 भक्त प्रह्लाद         भक्त प्रह्लाद के पिता का नाम हिरण्यकश्यप था वह एक {असुर}था          उसकी माता का नाम कयाधु था          उसे विष्णु भगवान का मंत्र देने वाले गुरु ऋषि नारद मुनि थे          भगवान विष्णु की द्रड़ भक्ति करने के कारण उन्हे प्रसिद्धि मिली          बालक भक्त का सर्वोच्च उदाहरण = ध्रुव  🌸 हिरण्यकश्यप का अहंकार           हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु से अत्यंत द्वेष करता था, क्योंकि भगवान विष्णु ने उसके भाई राक्षस हिरण्याक्ष           का वध किया था, बदला लेने के लिए उसने कठोर तप करके   ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके उनसे  वरदान          प्राप्त कर लिया कि वह :                      ⌚ न दिन में मरे न रात में          ...

माता अंजना – अप्सरा पुण्यस्थली से हनुमान जी की माता तक

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🌸 अप्सरा पुण्यस्थली बनी हनुमानजी की माता अंजना 🪔सम्पूर्ण कथा 🌸                        🌸   स्वर्गलोक की पुण्यस्थली अप्सरा🌸    🌸  प्राचीन काल में स्वर्गलोक में एक अत्यंत सुंदर, सुशील और पुण्यवती अप्सरा रहती थीं ! जिनका           नाम  पुण्यस्थली  ( पुन्यिका) था। वे सौंदर्य में देवी जैसी थी वह सेवा, विनम्रता और धर्म परायणता          में भी अन्य  अप्सराओं से श्रेष्ठ थीं। देवसभा में उनका सम्मान होता था और वे देवताओं की आज्ञा           से स्वर्ग के कार्यों में लगी  रहती थीं।                      🌸    महर्षि दुर्वासा की तपस्या मे विघ्न 🌸  🌸  एक समय की बात है, महातपस्वी दुर्वासा ऋषि बेलपत्र के वृक्ष के नीचे तपस्या कर रहे थे उसी वृक्ष         से  अप्सरा पुण्यस्थली  भगवान शिव की पूजा के लि...

राजा बलि और वामन अवतार की सम्पूर्ण कथा

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                                                            राजा बलि सप्त चिरंजीवी {अमर } मे आते है :🙏🏿 राजा बलि का वैभव और दानशीलता  🪔 प्राचीन काल में " राजा बलि" असुरों के महान सम्राट थे। वे " प्रह्लाद के पुत्र विरोचन के भी पुत्र थे {पोते }" थे  असुर कुल मे जन्म लेने पर भी वे  सत्य, दानवीर,धर्मात्मा,दयालु और भक्ति के प्रतीक माने जाते थे। उनके शासन  काल मे कोई गरीब नहीं था, प्रजा को कोई भी दुख नहीं था इसीलिए प्रजा उन्हे  "पिता समान" मानती थी !  🪔 प्रजा उनसे बहुत प्रसन्न रहती थी अपने तप, पराक्रम और पुण्य से उन्होंने " तीनों लोकों ,पृथ्वी, स्वर्ग और       पाताल  "पर अपना अधिकार कर लिया था। देवताओ का चिंतित होना : 🏵️ 🪔 राजा बलि अत्यंत दानवीर थे । कोई भी याचक उनके दरबार से खाली हाथ नहीं लौटता था। उनकी दानशीलता         से देवता भी चिंतित हो गए, क्योंकि इंद्र सहि...

महान ऋषि अगस्त्य की पौराणिक कथा

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अगस्त्य ऋषि  – संपूर्ण विवरण  This article tells the sacred story of Sage Agastya , one of the most respected sages in Hindu mythology . Agastya played a key role in many ancient legends, including bending the Vindhya mountains and aiding the gods. He was known for his great wisdom, devotion and supernatural powers. His life teaches us faith, courage, sacrifice, and service to dharma . The full story is written in Hindi with this English introduction for global readers. 🏵️  महर्षि अगस्त           महाऋषि अगस्त्य वैदिक परंपरा के महानतम ऋषियों में से एक है ।          वे सप्तर्षियों में गिने जाते हैं और उत्तर से दक्षिण तक भारत धर्म, वेद और संस्कृति के प्रचारक माने जाते हैं।    🏵️    जन्म कथा         अगस्त्य ऋषि का जन्म "  मित्र और वरुण  " के तेज से एक "  कुंभ " ( घड़े  ) में हुआ  !         इसलिए उन्हें "  कुंभसम्भव  " और "...

श्री बद्रीनाथ जी की दिव्य स्तुति 🙏🏿

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🏵️  श्री   बद्रीनाथ जी की स्तुति  🪔      पवन मंद सुगंध शीतल हेम मंदिर शोभितम                                        2        निकट गंगा बहत निर्मल श्री बद्रीनाथजी विश्वंभरम       3        शेष सुमिरन करत निशिदिन धरत ध्यान महेश्वरम       4        श्री वेद ब्रम्हा करत स्तुति श्री बद्रीनाथजी विश्वंभरम       5         शक्ति गौरी गणेश शारद नारद मुनि उच्चारणम       6         योग ध्यान अपार लीला श्री बद्रीनाथजी विश्वंभरम       7         इन्द्र चंद्र कुबेर दिनकर धूप दीप प्रकाशितम       8         सिद्ध मुनिजन करत जय जय श्री बद्रीनाथजी विश्वंभरम       9    ...

गीत गोविंद (श्रितकमला कुच मंडल ए) मंगलगीत

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भगवान जगन्नाथजी कलियुग के जाग्रत भगवान है  चमत्कार होते रहते है : 💥 एक दिन एक मालिन की 6 वर्ष की बिटिया गीत गोविंद गाते हुए अपने खेत  मे से बैंगन तोड़ रही थी ,तब भगवान जगन्नाथ जी उसके पीछे पीछे नाचने लगे,  और भगवान का पीताम्बर खेत के काँटों मे फसकर फट गया, भगवान मंदिर  मे फटी पोशाक मे चले गए जब पुजारियों ने देखा ,तो प्रभु से पूछा  "प्रभु ने स्वयं बताया की मुझे गीत गोविंद अत्यंत प्रिय है " तब से आज तक "श्री  जगन्नाथ धाम " मे प्रभु को "गीत गोविंद " प्रतिदिन सुनाया जाता है ! 💥         जय देव " जी ने इसे संगीतमय शब्दों मे लय बद्ध किया है          यह { पद } भजन मे भगवान " विष्णु " के अवतार श्री कृष्ण की महिमा और दिव्यता का वर्णन है !   🌿  गीत गोविंद का हिन्दी अनुवाद साथ मे दिया गया है      जिससे पाठकों को कोई परेशानी ना हो | संस्कृत और हिन्दी मे प्रस्तुत है :-----       🌿||1||   श्रित कमला कुच मण्डल धृत कुंडल ए               ...

दानवीर और पराक्रमी कर्ण – महाभारत का अद्भुत योद्धा

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                                                         🌺दानवीर कर्ण की संपूर्ण कथा   दानवीर और पराक्रमी कर्ण – महाभारत का अद्भुत योद्धा दानवीर कर्ण का जन्म कुंती को मिले दुर्वासा ऋषि के वरदान से हुआ था। कुंती को ऋषि दुर्वासा से वरदान मिला था कि वे किसी भी देवता को बुला सकती हैं। जिज्ञासावश उन्होंने सूर्यदेव का आह्वान किया और कर्ण का जन्म हुआ।लोकलाज के भय से कुंती ने नवजात कर्ण को टोकरी में रखकर नदी में प्रवाहित कर दिया। क्योंकि उस समय कुंती का विवाह नहीं हुआ था ! 🌺अधिरथ पुत्र कर्ण   वह बालक अधिरथ और राधा को मिला, जिन्होंने कर्ण को अपने पुत्र की तरह पाला। इसलिए कर्ण को राधेय भी कहा जाता है। 🌺पराक्रमी,अमित तेजस्वी कर्ण  कर्ण बचपन से ही अत्यंत पराक्रमी, तेजस्वी और दानी था। वह अर्जुन जैसा महान धनुर्धर बनना चाहता था, परंतु सूतपुत्र होने के कारण उसे तिरस्कार सहना पड़ा। 🌺गुरु परशुराम ने कर्ण को श्राप दिया    जब द्रो...

तुलसी पूजन दिवस 25 दिसंबर – महत्व, कथा और पूजा विधि

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                                                     🪔   तुलसी माता की संपूर्ण कथा 🪔       *  हिंदू धर्म में तुलसी माता को अत्यंत पवित्र माना गया है       * वे  भगवान विष्णु की परम भक्त और   लक्ष्मी का रूप  मानी जाती हैं।        *उनके बिना विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाती है।      🌺 " तुलसी माता " वृंदा देवी 🌺       *तुलसी माता का पूर्व जन्म "  वृंदा " नाम की एक पतिव्रता स्त्री के रूप में हुआ।       * तुलसी मैया के पट्टी का नाम असुर   जलंधर था        *वृंदा एक   सती स्त्री और विष्णु भगवान की भक्त  थीं।       *उनकी तपस्या और पतिव्रत के कारण जलंधर का कोई वध नहीं कर सकता था वह अजेय हो गया।       *देवता असुर जलंधर से पराजित होने लगे और भगवान विष्णु से...

भारत का नाम भारत कैसे पड़ा

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                                 🪔 महाभारत {आदि पर्व } की राजा दुष्यंत की कथा  राजा दुष्यन्त और शकुन्तला की की कथा         कण्व ऋषि का आश्रम   और शकुंतला  प्राचीन भारत में "  हस्तिनापुर  " के प्रतापी राजा "  दुष्यन्त  एक दिन शिकार के लिए वन में गए। उसी वन में "  महर्षि कण्व " का आश्रम था। कण्व ऋषि की एक दत्तक पुत्री थीं जिसका नाम था "  शकुन्तला  " वह अत्यंत सुंदर, सौम्य और प्रकृति से प्रेम करने वाली थी !   🙏🏿  राजा दुष्यंत का मोहित होना     राजा दुष्यन्त कण्व ऋषि के आश्रम मे पहुँचे। वहाँ उन्होंने शकुन्तला को वन-पशुओं और पौधों की सेवा करते देखा। जब दोनों ने  एक-दूसरे को  देखा तो देखते ही मन से आकर्षित हो गए। दोनों की बातचीत हुई, और दोनों ने  विवाह कर लिया !    🪔 दुष्यंत और शकुंतला का गंधर्व विवाह    महर्षि कण्व उस समय आश्रम में नहीं थे। दोनों ने "  गंधर्व विवाह ...

हिन्दू शास्त्रों की महत्वपूर्ण स्मृतियाँ- भाग 2

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                                      18 स्मृतियाँ और उनके रचयिता = भाग 2 18 स्मृतियाँ ओर उनके रचयिता  पिछले भाग की 1 से 9 तक स्मृतियाँ पढ़े लिंक पे क्लिक करें  10   कात्यायन स्मृति  महा ऋषि कात्यायन बहुत पुराने शास्त्र कारों मे जाने जाते है ! स्त्री मीमांसा मे  ऋषि कात्यायन के वचन बड़े ही प्रमाणिक माने जाते है !  11   शांडिल्य स्मृति  शांडिल्य ऋषि भक्ति के आचार्य माने जाते है ! इन्होंने भगवान की भक्ति को सबसे बड़ा और कल्याण कारक माना है ! शांडिल्य  ऋषि ने भगवान का मुख्य गुण बताया है करुणा और दयालुता :-- शांडिल्य ऋषि का श्लोक : "मुख्यं तस्य हि कारुण्यम " 12   गौतम स्मृति  गौतम ऋषि सप्त ऋषियों मे से एक है ! गौतम ऋषि ब्रम्हा जी के मानस पुत्र है ! देवी अहिल्या इन्ही की पत्नी है ! गौतम स्मृति मे धर्म की महिमा ,पंच यज्ञ ,गौ महिमा ,भोजन विधि ,तीर्थों की महिमा ,भगवान की भक्ति की महिमा का वर्णन है ! 13   वसिष्ठ स्मृति  ...

सम्पूर्ण शिव तांडव स्तोत्र-रावण द्वारा रचित

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                                                         🪷🪷 शिव तांडव स्तोत्र 🪷🪷  💥 शिव तांडव स्तोत्रम { संस्कृत में }💥            🪔  जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले                    गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम।              डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं               चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥              🪔जटाकटाह सम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी-              विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि।             धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके             किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ॥2॥         ...

राजा से महाऋषि: विश्वामित्र की असली कहानी

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                              विश्वामित्र जी की वंश परंपरा 🪔 वंशावली  प्रजापति के पुत्र राजा कुश  राजा कुश के पुत्र राजा गाधि  राजा गाधि के पुत्र राजा विश्वामित्र  राजा से ऋषि हुए विश्वामित्र जी   राजा विश्वामित्र 🌻 राजा विश्वामित्र एक बड़े धर्मात्मा और प्रजा का पालन करने वाले राजा थे ! राजा विश्वामित्र एक बार अपने सैनिकों के साथ जंगल मे शिकार खेलने गए !  वहाँ पर ये भगवान वसिष्ठ के आश्रम पर पहुचे ! तब ऋषि वसिष्ठ जी ने इन्हे फल ,फूल ,जल ,भोजन आदि की व्यवस्था कराई ! ऋषि को अपने योगबल से प्राप्त कामधेनु गौमाता के द्वारा सबको भोजन से संतुष्ट किया !    विश्वामित्र जी का कामधेनु से मोह होना 🌿  ये देखकर राजा विश्वामित्र चकित रह गए ,और वसिष्ठ जी से उनकी कामधेनु गौमाता मांगने लगे , पर वसिष्ठ जी ने मना कर दिया ! तो राजा जबरदस्ती बलपूर्वक उनकी गौमाता को ले जाने लगे ,तभी गौमाता के अंदर से लाखों सैनिक प्रकट हो गए ! और राजा विश्वामित्र ओर उनके सैनिक भाग गए ! विश्वामित्र जी क...

राधा रानी का परिचय :जीवन ,भक्ति और प्रेम की देवी

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“राधा: भगवान कृष्ण की परम प्रिया और व्रज की पटरानी” 🌿राधा हिंदू परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण की परम प्रिये मानी जाती हैं। 🌿वे भक्ति, प्रेम और समर्पण की प्रतिमूर्ति मानी जाती हैं। 🌿उनका उल्लेख पुराणों, गोस्वामी साहित्य, सूरदास, मीराबाई आदि के भजनों में मिलता है ! 🌿 रानी रानी का जन्म बरसाना में होने का उल्लेख मिलता है। 🌿इनके पिता का नाम श्रीमान  वृषभानु और माता का नाम श्रीमती  कीर्ति  माना जाता है। 🌿 राधा को ‘ वृषभानु-नंदिनी ’ और "  व्रज की पटरानी "  भी कहा जाता है। राधा–कृष्ण का संबंध 🌿राधा और कृष्ण का प्रेम आध्यात्मिक और दिव्य माना जाता है। 🌿यह प्रेम आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक समझा जाता है। 🌿दोनों का संबंध त्याग, समर्पण और निष्काम-प्रेम का आदर्श माना जाता है।  भक्ति परंपरा में राधा 🌿राधा को भक्ति आंदोलन में विशेष महत्व दिया गया है  🌿वैष्णव परंपरा में उन्हें स्वरूप-शक्ति, यानी कृष्ण की आंतरिक शक्ति कहा गया है। 🌿कई संतों ने उन्हें आदर्श भक्त तथा शुद्ध प्रेम का स्वरूप बताया है। कला और साहित्य में राधा 🌿राधा भारतीय नृत्य, संगीत,...

Kamdhenu Gomata: Divine Cow Emerged from Samudra Manthan

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                                                                        K amdhenu Goumata Emerged from Samudra Manthan 🪔 Samudra Manthan and Kamdhenu Gaumata 🪔 According to the Puranas, Kamdhenu Gaumata appeared during the Samudra Manthan. 🌊 The gods and demons were churning the Kshira Sagar to obtain Amrit (nectar). 🌸 During this churning, many divine treasures emerged, such as Goddess Lakshmi, Airavat the elephant, 🌳 the Kalpavriksha (wish-fulfilling tree), and Dhanvantari the divine physician. 🐄 Among these divine treasures was Kamdhenu Gaumata. ✨ She was called Sarvakampradāyini Gaumata, the cow who fulfills all desires. 🌼 She had the power to grant all wishes of her devotees. 🙏 Her form was extremely divine and sacred. 📜 Scriptures describe that 📖 the Vedas reside in her four legs, 🕉️ the...

कर्माबाई की खिचड़ी कथा

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  कर्माबाई की खिचड़ी  कर्माबाई नाम की एक बुढ़िया { निलांचल प्रदेश }जगन्नाथपुरी मे रहती थी ! वह प्रेम और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति थी! वह नित्य प्रति अपने ठाकुरजी को बड़े प्रेम से खिचड़ी प्रसाद का भोग लगाया करती थी ! और ठाकुर जी भी प्रतिदिन उनकी गोद मे बैठकर बड़े चाव से खिचड़ी खाया करते थे !  पर वह स्नान किए बिना ही खिचड़ी बनाया करती थी !  साधु के नियम बताना  एक दिन की बात है एक साधु उनके घर मे आए और बोले की तुम्हे ठाकुर को भोग लगाने के लिए पहले स्नान आदि से पवित्र हो जाना चाहिए फिर भोग लगाना चाहिए ! खिचड़ी के लिए देरी होना   अगले दिन से कर्माबाई ने ऐसा ही किया  पर उस दिन से उसे खिचड़ी बनाने मे देर होने लगी और उनका उनका दिल रोने लगा ! की मेरे ठाकुर को बहुत जोर से भूख लगी होगी , मेरा बाल गोपाल भूखा होगा ! कर्माबाई को धर्म कर्म के बारे मे कुछ पता नही था वह तो वात्सल्य की मूर्ति थी ! कर्माबाई का विलाप   श्री कर्मा बाई ने बड़े दुखी मन से श्याम प्यारे को खिचड़ी खिलाई उसी समय जगन्नाथजी मंदिर मे पुजारी ने छप्पन भोग निवेदन किए और भगवान जगन्नाथजी का आह्वान किया प...

18 पुराणों का सम्पूर्ण ज्ञान - वेदव्यासजी के दृष्टिकोण से

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                                          18 पुराणों की संक्षिप्त जानकारी  सनातन हिन्दू धर्म वेद पुराण  पुराणों का संक्षिप्त विवरण :🙏🏿 सनातन धर्म मे 18 महापुराण लिखे गए है जिनके आचार्य वेद व्यास जी है ! इन सभी मे से भागवत महापुराण को स्वयं भगवान के श्री मुख से परम धर्म कहा गया है ! इन्हे पढ़ने और सुनने से अन्तः करण पवित्र होता है ! इनमे कथाओ का वर्णन है इन्हे पढ़ने से भगवान मे रुचि उत्पन्न होती है ! ये सभी पुराणों के रचयिता वेदव्यास जी है !  🌹1 ब्रम्ह पुराण                  दस हजार श्लोक मिलते है                                                           ब्रम्हा और सृष्टि निर्माण  🌹2 विष्णु पुराण                 तेईस हजार श्ल...