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रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण

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                                                                                                                                           श्री गणेशाय नमः                                                                 श्रीजानकीवल्लभो विजयते                                                                      ...

कृष्ण ने कालिया नाग का घमंड क्यों तोड़ा?

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  भगवान कृष्ण ने कालिया नाग को क्यों मथा? पूरी कथा सरल भाषा ओर संक्षिप्त में  जानिए  🕰️ बहुत समय की बात है, द्वापर युग में… बहुत समय की बात है, द्वापर युग में, जब धरती पर धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष चल रहा था। उसी समय की यह पवित्र कथा है। 🐍 कालिया नाग कौन था? कालिया नाग एक बहुत ही विषैला और शक्तिशाली सर्प था, जो यमुना नदी में रहता था। उसके ज़हर की वजह से पूरा यमुना नदी का पानी जहरीला हो गया था। वहाँ कोई भी जीव-जंतु, पशु-पक्षी या इंसान नहीं जा सकता था क्युकी उसके जहरीले वातावरण मे सांस लेना मुश्किल हो गया था जीव मर रहे थे ! पूरा वातावरण अस्वस्थ और डरावना बन चुका था। गोकुल और वृंदावन के लोग बहुत परेशान थे, क्योंकि यमुना नदी उनके जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा थी। 🌊 यमुना नदी का संकट यमुना नदी का पानी धीरे-धीरे जहरीला होता जा रहा था। पेड़-पौधे मुरझा रहे थे, मछलियाँ मर रही थीं और आसपास का जीवन संकट में था। यह सब कालीय नाग के ज़हर और उसके अहंकार की वजह से हो रहा था। लोगों में डर था कि अगर कोई उसे नहीं रोकेगा तो पूरी प्रकृति नष्ट हो जाएगी। 🕉️ भगवान कृष्ण का आगमन  Source: dh...

गजेन्द्र मोक्ष का पाठ

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  🪔 गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र सम्पूर्ण पाठ 🪔  🪷 श्री शुक उवाच 🪷 एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो हृदि । जजाप परमं जाप्यं प्राग्जन्मन्यनुशिक्षितम ॥ 1॥  🌺 गजेन्द्र उवाच 🌺 💥 ॐ नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम ।       पुरुषायादिबीजाय परेशायाभिधीमहि ॥ 2॥  💥यस्मिन्निदं यतश्चेदं येनेदं य इदं स्वयं ।      योस्मात्परस्माच्च परस्तं प्रपद्ये स्वयम्भुवम॥ 3॥  💥यः स्वात्मनीदं निजमाययार्पितं      क्वचिद्विभातं क्व च तत्तिरोहितम ।      अविद्धदृक साक्ष्युभयं तदीक्षते      स आत्ममूलोवतु मां परात्परः ॥ 4॥  💥कालेन पञ्चत्वमितेषु कृत्स्नशो       लोकेषु पालेषु च सर्वहेतुषु ।      तमस्तदासीद गहनं गभीरं      यस्तस्य पारेभिविराजते विभुः ॥ 5॥  💥न यस्य देवा ऋषयः पदं विदु-      र्जन्तुः पुनः कोर्हति गन्तुमीरितुम ।      यथा नटस्याकृतिभिर्विचेष्टतो      दुरत्ययानुक्रमणः स मावतु ॥ 6॥ 💥दिदृक्षवो यस्य पदं सुमङ्गलं ...