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श्री हनुमान का दिव्य जन्म और शक्तियाँ

श्री हनुमान का जन्म, माता अंजनी और वायु देव का आशीर्वाद, सूर्य और इंद्र के घटना के साथ

 🌺 हनुमान जी की जन्म कथा🌺

🪔हनुमान जी के जन्म की कथा 🪔


किसी भी देवता के जन्म की एक ही तिथि होती है पर हनुमान जी के संदर्भ मे दो मानते है !
*  पहली कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी 
*  दूसरी चैत्र शुक्ल पूर्णिमा

🪔 रुद्र के अवतार 
 
*  जबकि पहला " जन्मदिन " है ओर दूसरा " विजयाभिनंदन " का महोत्सव !
 "उत्सवसिंधु " मे लिखा है = कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी ,मंगलवार को स्वाती नक्षत्र और मेष लग्न मे माता 
अंजनी के गर्भ से हनुमानजी के रूप मे स्वयं शिवजी उत्पन्न हुए थे !

🌿हनुमान जी का जन्म 

* "हनुमदुपासनाकल्पद्रुम " ग्रंथ मे चैत्र शुक्ल पूर्णिमा ,मंगलवार के दिन ,मूँज की मेखला से युक्त ,कौपीन से संयुक्त ,और यज्ञोपवीत {जनेऊ }से भूषित हनुमानजी का उत्पन्न होना लिखा है !  
साथ मे ये भी लिखा है कि कैकेई के हाथ से चील के द्वारा आई हुई यज्ञ की खीर खाने से माता अंजना के  उदर से हनुमानजी उत्पन्न हुए !

🙏🏿सूर्य फल के रूप मे 

*  बाल्मीकि रामायण मे किष्किन्धाकांड के सर्ग 66 और उत्तरकाण्ड के सर्ग 35 से पता चलता है कि अंजनी के   उदर से हनुमानजी उत्पन्न हुए ! भूखे होने पर ये आकाश मे उछले और उदय होते हुए सूर्य को फल समझकर उसे खाने की इच्छा से उसके पास चले गए  ,उस दिन अमावस्या होने से सूर्य को ग्रसने के लिए राहू आया था परंतु वह हनुमानजी को दूसरा राहू मानकर भागने लगा ,तब इन्द्र ने हनुमानजी पर वज्र का प्रहार किया उसी से उनकी ठोडी टेड़ी हो गई इसी कारण इनका नाम हनुमान पड़ गया ! 

🪔 वायुदेव का आशीर्वाद 

*  सूर्य के वरदान से स्वर्ण के बने हुए सुमेरु पर्वत मे केसरी का राज्य था उसके अति सुंदरी अंजना नाम की स्त्री
 थी ,एक बार उसने शुचि स्नान करके सुंदर वस्त्र आभूषण धारण किए उस समय पवन देव ने उसके कर्ण {कान }     मे प्रवेश कर आशीर्वाद दिया कि तेरे सूर्य ,अग्नि एवं सुवर्ण के समान तेजस्वी ,वेदज्ञ ,मर्मज्ञ ,विश्ववंध, महाबली पुत्र होगा ,ऐसा ही हुआ !

🌿देवताओ द्वारा हनुमान जी को आशीर्वाद 

*  इन्द्र के वज्र प्रहार के कारण उसे दंड देने के लिए पवनदेव ने वायु संचार रोक दिया तब ब्रम्हादि  सभी देवताओ
 ने इन्हे अलग-अलग वरदान दिए , इसी कारण हनुमानजी पर किसी भी अस्त्र -शस्त्र का कोई प्रभाव नहीं पड़ता     चाहे वह स्वयं ब्रम्हास्त्र ही क्यों ना हो !

🙏🏿 हनुमान जी गुणों का भंडार 

*  हनुमानजी अजर है अमर है सतयुग , त्रेता , द्वापर  ,कलियुग = चारों युगों मे है ! रामजी के अत्यंत प्रिय है !
*  अष्ट सिद्धि = अड़िमा ,महिमा ,गरिमा ,लघिमा ,प्राप्ति ,प्राकाम्य ,ईशित्व ,वशित्व =अष्टसिद्धि पर इनका सम्पूर्ण           स्वामित्व है !
*  नव निधि = पद्म ,महापद्म ,नील ,मुकुंद ,नन्द ,मकर ,कच्छप ,शंख ,खर्व = हनुमानजी के पास नव निधि का भंडार      है !


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