रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण
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* हिंदू धर्म में तुलसी माता को अत्यंत पवित्र माना गया है
* वे भगवान विष्णु की परम भक्त और लक्ष्मी का रूप मानी जाती हैं।
*उनके बिना विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाती है।
*तुलसी माता का पूर्व जन्म " वृंदा " नाम की एक पतिव्रता स्त्री के रूप में हुआ।
* तुलसी मैया के पट्टी का नाम असुर जलंधर था
*वृंदा एक सती स्त्री और विष्णु भगवान की भक्त थीं।
*उनकी तपस्या और पतिव्रत के कारण जलंधर का कोई वध नहीं कर सकता था वह अजेय हो गया।
*देवता असुर जलंधर से पराजित होने लगे और भगवान विष्णु से सहायता माँगी।
* भगवान विष्णु ने लीला करने के लिए असुर " जलंधर का रूप " धारण कर लिया।
*इससे वृंदा का पतिव्रत भंग हुआ और उसी समय युद्ध में जलंधर का वध हो गया ।
*जब वृंदा को सत्य का ज्ञान हुआ तो वे अत्यंत दुखी हो गई ।
*दुख और क्रोध में वृंदा ने भगवान विष्णु को श्राप दे दिया
*श्राप - “ आप पत्थर बन जाएँ ”
*यह श्राप " शालिग्राम शिला " के रूप में पूर्ण हो गया ।
*भगवान विष्णु ने वृंदा से क्षमा माँगी और वरदान दिया
*तुम पृथ्वी लोक मे " तुलसी " के रूप में पूजी जाओगी।
*तुम्हारे बिना मेरी पूजा " अधूरी " ही रहेगी।
*कार्तिक मास में तुम्हारे साथ मेरा " विवाह शालिग्राम के रूप से होगा "
*वृंदा ही " तुलसी माता " बनकर धरती पर प्रकट हुईं।
तुलसी का पौधा के रूप मे
🏵️ तुलसी एक औषधी के रूप मे 🏵️
*रोगनाशक
*वातावरण शुद्ध करने वाला
*शुभ कार्य मे प्रयोग
*तुलसी को आध्यात्मिक रूप से अत्यंत पवित्र माना गया।
कार्तिक शुक्ल एकादशी और द्वादशी
*तुलसी माता का विवाह"
*शालिग्राम " ( भगवान विष्णु ) से किया जाता है।"
* देव उठनी एकादशी " को दोनों का विवाह कराया जाता है !
*यह विवाह " हर साल हर मंदिर " मे कराया जाता है
*यह विवाह " सौभाग्य, शांति और वैवाहिक सुख " का प्रतीक है।
*तुलसी के बिना " विष्णु भोग " स्वीकार नहीं होता
*" तुलसी पूजन " से पाप नाश होता है
*तुलसी घर में हो तो " नकारात्मकता " दूर रहती है
* तुलसी माता स्त्रियों को ' सौभाग्य " प्रदान करती हैं
जहाँ तुलसी है, वहाँ विष्णु भगवान की कृपा अवश्य होती है
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जय तुलसी माता
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