कृष्ण भक्त अर्जुन – महाभारत के सर्वोच्च धनुर्धर

महाभारत का अर्जुन और कृष्ण
                     
🌼 अर्जुन का परिचय 

🌹नाम:अर्जुन 

🌺अन्य नाम:पार्थ, धनंजय, गुडाकेश, किरीटी, सव्यसाची, कपिध्वज

🍀पिता: पाण्डु (धर्म पिता – इन्द्र देव)

🪻माता: कुंती

🌻भाई: युधिष्ठिर, भीम, नकुल, सहदेव

🥀पत्नी:द्रौपदी, सुभद्रा, चित्रांगदा, उलूपी

💥पुत्र: अभिमन्यु, इरावान, बभ्रुवाहन, श्रुतकीर्ति

🌷धनुष: गाण्डीव

🪷रथसारथी: भगवान श्रीकृष्ण

🌸 अर्जुन का जन्म

राजा पाण्डु को किन्दम ऋषि के श्राप के कारण संतान उत्पन्न करने का अधिकार नहीं था। तब माता कुंती को प्राप्त

 वरदान से उन्होंने देवताओं का आवाहन किया। कुंती ने इन्द्र देव का स्मरण किया, और उनके तेज से अर्जुन का

 जन्म हुआ।

इसी कारण अर्जुन को देवराज इन्द्र का पुत्र माना जाता है। जन्म से ही उसमें वीरता, तेज और धर्म का समन्वय था।

🌸 शिक्षा और गुरुकुल जीवन

अर्जुन ने आचार्य द्रोणाचार्य से अस्त्र-शस्त्र की विद्या सीखी।

वह गुरुकुल का सबसे प्रतिभाशाली शिष्य था। इसी कारण गुरु द्रोणाचार्य का सबसे प्रिय शिष्य था !

द्रौपदी स्वयंवर में मछली की आँख भेदने की कठिन परीक्षा अर्जुन ने ही जीती।

एकलव्य की कथा में गुरु दक्षिणा के कारण अर्जुन का श्रेष्ठ धनुर्धर होना सुरक्षित रखा गया।

🌸 अर्जुन के 20 नाम और उनका अर्थ  

🌸 अर्जुन – उज्ज्वल, शुद्ध, तेजस्वी

🌸 पार्थ – पृथ्वी (कुंती) का पुत्र

🌸 धनंजय – धन जीतने वाला

🌸 किरिटी – इंद्र द्वारा दिया गया मुकुट धारण करने वाला

🌸 श्वेतवाहन – श्वेत घोड़ों वाला रथी

🌸 गुडाकेश – नींद पर विजय पाने वाला

🌸 सव्यसाची – दोनों हाथों से समान रूप से धनुष चलाने वाला

🌸 विजय – सदैव विजयी

🌸 बीभत्सु – अधर्म से घृणा करने वाला

🌸 फाल्गुन – फाल्गुन मास में जन्म

🌸 कपिध्वज – जिनके ध्वज पर हनुमान विराजमान हों

🌸 जिष्णु – पराक्रमी, विजेता

🌸 नर – नर-नारायण में नर अवतार

🌸 कौन्तेय – कुंती का पुत्र

🌸 कौन्तेयपुत्र – कुंतीनंदन

🌸 इंद्रपुत्र – इंद्र का पुत्र

🌸 कुरुनंदन – कुरु वंश का आनंद

🌸 भारतश्रेष्ठ – भरतवंश में श्रेष्ठ

🌸 धनुर्धर – महान धनुर्धारी

🌸 महाबाहु – विशाल भुजाओं वाला


🌸 विवाह और पारिवारिक जीवन 🪻
  1. द्रौपदी – पांचों पांडवों की पत्नी

  2. सुभद्रा – श्रीकृष्ण की बहन का विवाह अर्जुन के साथ हुआ और इन दोनों से अभिमन्यु जन्मे

  3. उलूपी – नागराज कन्या 

  4. चित्रांगदा – मणिपुर की राजकुमारी

🌸 वनवास और तपस्या

वनवास काल में अर्जुन ने कठोर तप किया।

उन्होंने भगवान शिव से पाशुपतास्त्र प्राप्त किया।

इन्द्रलोक जाकर दिव्यास्त्र ग्रहण किए !

🌸 महाभारत युद्ध और गीता

कुरुक्षेत्र युद्ध में अर्जुन का मन अपने स्वजनों को देखकर विचलित हो गया।

तब श्रीकृष्ण ने उसे श्री भगवद्गीता का उपदेश दिया।

कर्मयोग: कर्म करो, फल की चिंता मत करो 

धर्म: अधर्म के विरुद्ध युद्ध करना ही धर्म है 

भक्ति: जो करो उसे ईश्वर को समर्पण करो 

गीता का उपदेश भगवान के श्रीमुख से सुनकर अर्जुन का सारा मोह दूर हो गया और उसमे युद्ध करने का साहस आया।

🌸 अर्जुन की प्रमुख विजय

🥀जयद्रथ वध

💥भीष्म पितामह पर विजय में प्रमुख भूमिका

🌷कर्ण के साथ महायुद्ध और अंत मे कर्ण वध

🌸 युद्ध के बाद का जीवन

युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में अर्जुन ने दिग्विजय की।

राज्य स्थापित होने के बाद उसने शांति और धर्म का प्रचार किया।

🌸 महाप्रस्थान ( स्वर्गारोहण )

जब पांडवों ने संसार त्यागने का निश्चय किया, अर्जुन भी उनके साथ हिमालय की ओर चले गए।

अहंकार के क्षीण अंश के कारण वह मार्ग में ही गिर पड़ा।

युधिष्ठिर ने बताया-

“अर्जुन को अपने पराक्रम का गर्व था, इसलिए वह आगे नहीं जा सका।”

🌺 अर्जुन की कथा का संदेश

 🌻कर्तव्य से भागना नहीं चाहिए

🌹मोह से ऊपर उठना ही धर्म है

🌷 गुरु और ईश्वर पर पूर्ण विश्वास आवश्यक है

🪷 कर्म करते हुए अहंकार त्यागना ही मुक्ति है








टिप्पणियाँ

Dharam Ki Bate

Complete Gajendra Moksha Prayer

हिन्दू नव वर्ष Hindu New Year And Spring Season Navratri

महान गो-भक्त संत श्री राजेन्द्रदासजी महाराज

समुद्र मंथन के 14 रत्न और उनकी अद्भुत कथा

भक्त ध्रुव की प्रेरणादायक कथा | अटूट भक्ति का दिव्य उदाहरण

गजेन्द्र मोक्ष का पाठ

हनुमान चालीसा-पूरा पाठ-40 चौपाइयाँ

Hanuman Chalisa – Full Text and Meaning

गायत्री मंत्र शक्ति Gayatri Mata Blessing

माह स्नान के मुख्य तीर्थ जहां जल मे देवता विराजते है