Story of Anjana Mata (अंजना माता और हनुमान जी की माता बनने की कथा)
| lord hanuman and anjana mata अंजना माता ओर हनुमानजी |
🌸 स्वर्गलोक की पुण्यस्थली अप्सरा🌸
🌸 प्राचीन काल में स्वर्गलोक में एक अत्यंत सुंदर, सुशील और पुण्यवती अप्सरा रहती थीं ! जिनका
नाम पुण्यस्थली ( पुन्यिका) था। वे सौंदर्य में देवी जैसी थी वह सेवा, विनम्रता और धर्म परायणता
में भी अन्य अप्सराओं से श्रेष्ठ थीं। देवसभा में उनका सम्मान होता था और वे देवताओं की आज्ञा
से स्वर्ग के कार्यों में लगी रहती थीं।
🌸 महर्षि दुर्वासा की तपस्या मे विघ्न 🌸
🌸 एक समय की बात है, महातपस्वी दुर्वासा ऋषि बेलपत्र के वृक्ष के नीचे तपस्या कर रहे थे उसी वृक्ष
से अप्सरा पुण्यस्थली भगवान शिव की पूजा के लिए बेलपत्र तोड़ने की कोशिश कर रही थी पर
उन्हे ये ज्ञात नहीं था की इसी वृक्ष के पीछे ऋषि दुर्वासा तप कर रहे है ,वो उछल उछल के बेलपत्र
तोड़ रही थी !
अनजाने मे हुआ अपमान
🌸 इसी दौरान ऋषि दुर्वासा के तप मे विघ्न पड़ गया और वे क्रोधित हो गए और गुस्से मे अप्सरा को
श्राप दे दिया कि "हे अप्सरे तुमने एक तपस्वी का अपमान किया है अपने सौन्दर्य के अभिमान मे
तुमने धर्म और मर्यादा को भूला दिया ! जिस तरह तुम उछल उछल कर मेरे तप मे बाधा डाल रही
हो ! तुम उछल कूद करने वाली वानर जाति मे जन्म लोगी अर्थात वानरी बनोगी ! "
🌸 पुण्य स्थली का पश्चाताप
श्राप सुनकर अप्सरा पुण्यस्थली भय और शोक से काँप उठीं।
वे तुरंत दुर्वासा ऋषि के चरणों में गिर पड़ीं और बोली
🌸 महाऋषि मुझसे अनजाने मे अपराध हुआ है, मै तो"भगवान शिवजी" की पूजा के लिए बेल पत्र तोड़
रही थी !आप मेरे अपराध को क्षमा करें, मुझ पर दया करें, मैं कभी किसी ऋषि का अपमान नहीं
कर सकती, आप मुझ दया कीजिए, क्षमा कीजिए, ऋषि वर और उनकी आँखों से अश्रुधारा बहने
लगी !
🌺 श्राप का वरदान में परिवर्तन
🌸 पुण्यस्थली की सच्ची विनम्रता और पश्चाताप देखकर दुर्वासा ऋषि का क्रोध शांत हुआ।
दुर्वासा ऋषि ने कहा
अप्सरे मेरा श्राप निष्फल नहीं होगा
मैं इसे वरदान मे बदल सकता हूँ !
🌸 दुर्वासा ऋषि ने वरदान दिया
🌸 तुम पृथ्वी पर वानरी रूप में जन्म अवश्य लोगी क्योंकि तुम भगवान शिव जी की पूजा के लिए
बेलपत्र तोड़ रही थी इसलिए तुम्हें वरदान देता हूँ तुम एक महान पुत्र की माता बनोगी। वह पुत्र
भगवान शिव के अंश और वायु देव के तेज से उत्पन्न होगा। वह तीनों लोकों में भक्ति, बल, बुद्धि
और सेवा का आदर्श बनेगा।
🌸 पृथ्वी पर जन्म – माता अंजना
🌸 अप्सरा पुण्यस्थली ने पृथ्वी पर वानर राज कुंजर के यहाँ जन्म लिया और वानर केसरी
के साथ उनका विवाह हुआ।
इस जन्म में उनका नाम पड़ा — माता अंजनी ।
अंजनी माता भगवान शिव की अनन्य भक्त थीं।
उन्होंने वर्षों तक कठोर तपस्या की और शिव-पूजा में लीन रहीं।
🌸 महावीर हनुमान का जन्म
अंजनी माता की तपस्या से प्रसन्न होकर
भगवान शिव ने अपना अंश प्रदान किया
वायु देव ने उस अंश में प्राण फूंके
इस प्रकार श्री हनुमान जी का जन्म हुआ उनके नाम है
रामभक्त
महावीर
संकटमोचन
अष्टसिद्धि और नव निधि के दाता बने।
🌸 कथा से मिलने वाली शिक्षाएँ
अनजाने में हुई भूल भी परिणाम ला सकती है
सच्चा पश्चाताप श्राप को भी वरदान बना देता है
माता अंजनी हनुमानजी की प्रथम गुरु भी हैं !
हनुमान जी का जन्म स्वयं" श्राप-मोचन का दिव्य उदाहरण "है !
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According to Hindu mythology, Anjana Mata was once a celestial apsara.
Due to a curse, she was born on Earth and lived a life of devotion and restraint.
She married Kesari and spent years performing intense penance to please Lord Shiva.
Moved by her devotion, Lord Shiva granted her a boon that he would be born as her son.
With the blessings of Vayu Dev, Anjana Mata gave birth to Lord Hanuman.
Hanuman was born with divine strength, wisdom, and devotion to Lord Rama.
This story teaches that sincere devotion can turn even a curse into a blessing.
Anjana Mata’s life shows patience, faith, and surrender to divine will.
She is remembered as one of the greatest mothers in Hindu tradition.
बहुत सुन्दर स्टोरी
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