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                                                                                                                                           श्री गणेशाय नमः                                                                 श्रीजानकीवल्लभो विजयते                                                                      ...

राजा बलि और वामन अवतार की सम्पूर्ण कथा

भगवान वामन के चरणों में शीश झुकाते दानवीर :राजा बलि
                                                           

राजा बलि सप्त चिरंजीवी {अमर } मे आते है :🙏🏿

राजा बलि का वैभव और दानशीलता 

🪔 प्राचीन काल में "राजा बलि" असुरों के महान सम्राट थे। वे "प्रह्लाद के पुत्र विरोचन के भी पुत्र थे {पोते }" थे

 असुर कुल मे जन्म लेने पर भी वे  सत्य, दानवीर,धर्मात्मा,दयालु और भक्ति के प्रतीक माने जाते थे। उनके शासन

 काल मे कोई गरीब नहीं था, प्रजा को कोई भी दुख नहीं था इसीलिए प्रजा उन्हे "पिता समान" मानती थी !

 🪔 प्रजा उनसे बहुत प्रसन्न रहती थी अपने तप, पराक्रम और पुण्य से उन्होंने "तीनों लोकों ,पृथ्वी, स्वर्ग और

      पाताल "पर अपना अधिकार कर लिया था।

देवताओ का चिंतित होना : 🏵️

🪔 राजा बलि अत्यंत दानवीर थे। कोई भी याचक उनके दरबार से खाली हाथ नहीं लौटता था। उनकी दानशीलता 

       से देवता भी चिंतित हो गए, क्योंकि इंद्र सहित सभी देवता स्वर्ग से वंचित हो गए थे।

🪔 तब देवताओं ने "भगवान विष्णु ''से प्रार्थना की—

🪔“हे प्रभु! राजा बलि धर्मात्मा हैं, परंतु तीनों लोकों का संतुलन बिगड़ गया है।कृपा कर हमारा समाधान

      कीजिए।”

🪔भगवान विष्णु ने वचन दिया कि वे धर्म की रक्षा करेंगे," बल प्रयोग से नहीं, बल्कि बुद्धि और लीला से।"

  वामन अवतार और तीन पग भूमि का दान :🌺

🪔भगवान विष्णु ने "वामन अवतार'' लिया—एक छोटे से ''तेजस्वी ब्राह्मण बालक" के रूप में। उसी समय राजा

     बलि ''यज्ञ ''कर रहे थे। वामन भगवान यज्ञ स्थल पर पहुँचे और मधुर वाणी में बोले—

🪔“राजन! मुझे दान में ''तीन पग भूमि "दीजिए।”

🪔गुरु शुक्राचार्य ने विष्णु भगवान को पहचान लिया कि यह '' स्वयं भगवान विष्णु पधारे हैं ''और उन्होंने राजा

      बलि को सावधान किया। लेकिन बलि ने कहा—

🪔“दान से पीछे हटना राजा के लिए पाप है, चाहे सामने स्वयं भगवान विष्णु ही क्यों न हों।”

🪔राजा बलि ने जल लेकर'' तीन पग भूमि का दान की प्रतिज्ञा "कर ली । 

🪔राजा बलि ने बड़े प्रेम के साथ वामन भगवान {विष्णु रूप मे }को अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया ''उनका

     हृदय भक्ति भाव से भर आया और अपने पितामह ''{दादा प्रह्लाद }की याद या गई कि ''उन्होंने कितने

🪔 संकट सहे थे पर मुझ पर आज कोई भी संकट नहीं है !"गुरु शुक्राचार्य बार बार बहकाने लगे की ये विष्णु है

🪔 तुझे छलने आया है पर उन्हे गुरु की कोई भी बात समझ मे नहीं आई !  

  आकाश और पाताल को नाप लिया :💥

🪔 भगवान ने तभी वामन भगवान का रूप विशाल त्रिविक्रम मे बदल लिया  

🪔 ''पहले पग में " वामन भगवान ने'' पूरी पृथ्वी ''नाप ली।

🪔 "दूसरे पग में "उन्होंने "आकाश और स्वर्ग लोक ''को नाप लिया।

🪔अब तीसरे पग के लिए " कोई स्थान शेष नहीं बचा।"

   राजा बलि से भगवान ने पूछा :🪷

🪔“ राजन! तीसरा पग कहाँ रखूँ ? ”

🪔तुमने तीन पग भूमि देने की प्रतिज्ञा की थी वह पूरी नहीं हुई 

🪔असत्य बोलने की वजह से तुम्हें ''नरक मे दुख ''भोगने जाना पड़ेगा 

   राजा बलि का आत्म समर्पण :🌷

🪔भगवान की बात सुनकर राजा की बुद्धि बड़ी शांत हो गई 

🪔राजा बलि ने विनम्रता से अपना'' शीश झुका दिया ''और कहा

🪔" भगवन आप  तीसरा पग मेरे सिर पर रख लीजिए।

🪔राजा बलि की इस समर्पण भावना को देख कर भगवान बहुत प्रसन्न हो गए ,और प्रसन्नता के साथ राजा  बलि के

      द्वारपाल बन गए और भक्त के आगे भगवान ने अपनी हार स्वीकार कर ली ! इस प्रकार भगवान राजा बलि के

     अधीन हो गए !

 राजा बलि पर भगवान की कृपा और अमरता का वरदान :🪻

🪔भगवान विष्णु ने तीसरा पग राजा बलि के सिर पर रख लिया और उन्हें "पाताल लोक ''भेज दिया।

🪔लेकिन उनकी भक्ति और सत्य से प्रसन्न होकर भगवान ने'' वरदान ''दिया

🪔वर्ष मे एक बार पृथ्वी पर अपनी प्रजा से मिलने आ सकोगे अमर रहोगे 

🪔"राजा बलि ने कहा प्रभु अब ये पृथ्वी तो मेरी रही नहीं, आपकी हो गई है मै पाताल चला जाता हूँ और

      द्वारपाल आप बन जाइए तो भगवान ने स्वीकार कर लिया !'' 

🪔भगवान बोले “ बलि " तुम चिरकाल तक पाताल के राजा रहोगे और "मैं स्वयं तुम्हारे द्वारपाल "के रूप में

    रहूँगा इस प्रकार राजा बलि की निष्ठभक्ति का वर्णन"शुकदेव जी ने श्री मद्भागवात महापुराण मे किया है!'' 

    सारांश 🙏🏿

       🪔''दान और सत्य "सबसे बड़ा धर्म है !

        🪔''अहंकार नहीं, त्याग और समर्पण महान बनाता है''!

        🪔 भगवान भक्ति से प्रसन्न होते है चाहे वह सुर हो या असुर उससे प्रभु को कोई सरोकार नहीं !

केरल का ओणम पर्व और राजा बलि का संबंध :  🌹

आज भी केरल में ''ओणम पर्व ''राजा बलि की स्मृति में मनाया जाता है।

कहा जाता है भगवान ने प्रसन्न होकर राजा बलि से कहा की तुम साल मे एक बार अपनी प्रजा से मिलने या सकते हो

 इसी खुशी मे केरल मे लोग हर साल ओणम मनाते है लोग मानते है कि ओणम पे राजा बलि केरल आते है  इस दिन

 राजा बलि के लिए लोग घर सजाते है फूलों की रंगोली बनाते है और खुशियां मनाते है ! 


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