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                                                                                                                                           श्री गणेशाय नमः                                                                 श्रीजानकीवल्लभो विजयते                                                                      ...

श्री गणेश चतुर्थी व्रत: कथा, विधि और 21 नामों के साथ पूर्ण पूजन

गणेश चतुर्थी व्रत पूजा का दृश्य, मोदक और दीप के साथ भगवान गणेश की आरती
                                                      

🪔 श्री गणेश चतुर्थी व्रत 🪔

      पौष मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को " गणेश संकट चतुर्थी " व्रत के नाम से पुकारा जाता है :   

         🪔 श्लोक 

श्लोक = " ममसकलाभीष्टसिद्धये चतुर्थीव्रतंकरिष्ये "

यह गणेशजी का व्रत है प्रात: स्नान के बाद संकल्प करके दिन भर मौन रहकर सायकाल चंद्रमा को अर्घ्य देकर भोजन करे !

      🪔 व्रत कथा 

कथा = माता पार्वती जी ने अपने शरीर के मैल से गणेश को प्रकट किया और अपने द्वार पर पहरा देने के लिए बैठा दिया कुछ समय पश्चात भगवान शंकर जी जब अंदर जाने लगे तो गणेशजी ने उन्हे जाने नहीं दिया तब उन्होंने अनजाने मे अपने त्रिशूल से गणेशजी मस्तक काट डाला और वह चंद्र-लोक मे चल गया !

बाद मे माता पार्वती जी प्रसन्नता के लिए भगवान शंकर जी ने हाथी के नवजात बालक का सिर लाकर गणेशजी के मस्तक पर जोड़ दिया !

परंतु कुछ कथाओ मे कहा जाता है कि गणेशजी का असली मस्तक चंद्रलोक मे है और इसी बात को ध्यान मे रख कर गणेश चतुर्थी व्रत मे चंद्रमा का दर्शन करके व्रत पूरा किया जाता है ! 

    🪔  व्रत विधि 

प्रात : गणेशजी का स्मरण करके व्रत का संकल्प ले ,धूप,दीप,फल,भोग ,आरती करके सारा  दिन मौन रहें , इस व्रत मे भगवान गणेशजी को 21 लड्डुओ  { मोदकों } को अर्पण किया जाता है उनके साथ गणेशजी के इन 21 नामों का याद किया जाता है साथ मे घी ,तिल ,शक्कर भी अर्पण किए जाते है !कहीं कहीं तिलकुट बनाने का भी विधान है !

1  गणंजय , 2 गणपती , 3  हेरंब ,4 धरणीधर ,5 महागणाधिपती 

6  यज्ञेश्वर् ,7 शीघ्रप्रसाद ,8 अभंगसिद्धि ,9 अमृत ,10 मंत्रज्ञ 

11  किन्नम ,12 द्विपद ,13 सुमंगल ,14 बीज ,15 आशापूरक  

16 वरद ,17 शिव ,18 कश्यप ,19 नंदन ,20 सिद्धिनाथ 

 21  ढुँढिराज  !

प्रत्येक लड्डू गणेशजी का नाम ले लेकर अर्पण किया जाता है :

      🪔  चंद्रमा दर्शन 

चंद्रमा दर्शन करके उन्हे अर्ध्य देकर प्रसाद ग्रहण किया जाता है !

इस प्रकार 21 मोदकों से भोग लगाकर उनमे से एक लड्डू गणेशजी के लिए रख दिया जाता है , बाकी 10 लड्डू ब्राम्हण को दे दिए जाते है और बाकी 10 लड्डू स्वयं के लिये रख लिए जाते है !

      🪔   कथा का सार 

कथा का सार =  पुराने समय मे एक मयूरध्वज नाम का प्रतापी राजा था ,एक बार उसका पुत्र कहीं खो गया था  !और बहुत खोज करने पर भी नहीं मिला ! तब मंत्री की पत्नी के अनुरोध करने पर राजा ने पूरे परिवार के साथ भगवान गणेशजी का संकट चतुर्थी का व्रत बड़े विधि विधान से किया ! तब भगवान गणेशजी की कृपा से राजा का पुत्र वापिस मिल गया था ! और उसने आजीवन अपने पिता राजा मयूरध्वज की सेवा की थी !

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