शकुंतला और राजा दुष्यंत की कथा – Shakuntala and King Dushyanta Story from Mahabharata

                                
Shakuntala and King Dushyanta meeting in forest
महाभारत के आदि पर्व की कथा 


महाभारत {आदि पर्व } की राजा दुष्यंत की कथा राजा दुष्यन्त और शकुन्तला की की कथा  
कण्व ऋषि का आश्रम और शकुंतला 


The story of Shakuntala and King Dushyanta is one of the most beautiful love stories from Indian mythology.
It describes love, separation, destiny, and reunion as narrated in the Mahabharata and Kalidasa’s Abhijnanashakuntalam.


प्राचीन भारत में " हस्तिनापुर " के प्रतापी राजा " दुष्यन्त एक दिन शिकार के लिए वन में गए। उसी वन में " महर्षि कण्व " का आश्रम था। कण्व ऋषि की एक दत्तक पुत्री थीं जिसका नाम था " शकुन्तला " वह अत्यंत सुंदर, सौम्य और प्रकृति से प्रेम करने वाली थी !

    राजा दुष्यंत का मोहित होना 

   राजा दुष्यन्त कण्व ऋषि के आश्रम मे पहुँचे। वहाँ उन्होंने शकुन्तला को वन-पशुओं और पौधों की सेवा करते देखा। जब दोनों ने  एक-दूसरे को  देखा तो देखते ही मन से आकर्षित हो गए। दोनों की बातचीत हुई, और दोनों ने  विवाह कर लिया !

    दुष्यंत और शकुंतला का गंधर्व विवाह

   महर्षि कण्व उस समय आश्रम में नहीं थे। दोनों ने " गंधर्व विवाह " कर लिया। राजा दुष्यन्त ने शकुन्तला को अपनी  " राज मुद्रिका " ( अंगूठी )  उतार कर दे दी और वचन दिया कि वे उन्हें राजमहल मे ले जाने के लिए जल्दी ही वापिस आएँगे।

    दुर्वासा ऋषि का श्राप

    एक दिन शकुन्तला राजा दुष्यन्त के प्रेम में इतनी अधिक खोई हुई थीं की उन्हे पता ही नहीं चला की उन्हे कोई बार बार पुकार रहा है और आश्रम मे दुर्वासा ऋषि आए हुए है। स्वागत न करने पर दुर्वासा ऋषि ने क्रोध में शकुंतला को श्राप दे दिया !

“ जिसका ध्यान कर रही हो, वही तुम्हें भूल जाएगा ”

          " आश्रमवासियों के निवेदन करने पर ऋषि के श्राप का प्रभाव कम हो गया "

          " तब ऋषि दुर्वासा ने अपनी कठोरता कम करते हुए कहा "

“ यदि कोई पहचान की वस्तु राजा दुष्यंत को दिखाई जाएगी, तो उनकी स्मृति लौट आएगी ”

    अंगूठी का खो जाना

    समय बीतता गया। गर्भवती शकुन्तला और ऋषि कण्व राजा दुष्यन्त से मिलने राजमहल मे पहुँचे , पर मार्ग में शकुंतला की वह " राज मुद्रिका "अंगूठी " अनजाने मे नदी मे गिर गई !

    जब शकुंतला राजा दुष्यन्त के सामने पहुची तो दुर्वासा ऋषि के श्राप के प्रभाव मे राजा दुष्यंत ने उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया। दुखी शकुन्तला वन मे अपनी कुटिया मे लौट आईं।

     भरत का जन्म और भारत का नाम 

   कुछ समय बीतने पर शकुन्तला ने वन में एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम "भरत " रखा गया ! वह अपनी बाल्य अवस्था मे सिंह के बच्चों से खेलता था और बड़ा बहादुर था इसलिए उसका नाम भरत पड़ा।

    स्मृति की लौटना 

   एक दिन एक मछुआरे को मछली के पेट से वही राज मुद्रिका "अंगूठी " मिली। जब  वह मुद्रिका राजा दुष्यंत के       पास पहुँची तो " राज मुद्रिका "अंगूठी " को देखते ही राजा दुष्यन्त को सब याद आ गया और उन्हें अपने किए पर        गहरा दुख और पश्चाताप हुआ।

     राजा दुष्यंत और शकुंतला का दूसरी बार मिलना 

     देवों की कृपा से राजा दुष्यन्त को शकुन्तला और उनका पुत्र भरत वापिस मिल गए और इस तरह परिवार का         दूसरी बार मिलन हुआ।

     आगे चलकर " भरत " के नाम पर ही हमारे देश का नाम पड़ा " भारत " |

और जानने के लिए हमारे ब्लॉग पर आयें 

https://dharamkibate.blogspot.com

    कथा से प्रेरणा मिलती है  

  • सच्चा प्रेम समय और परीक्षा से और भी मजबूत होता है

  • क्रोध और अहंकार विनाश का कारण बनते हैं

  • धैर्य और सत्य की अंत में विजय होती हैं

Shakuntala and Dushyanta’s story reflects the power of true love and fate.
Despite separation and hardship, destiny reunites them and their son Bharata, who later becomes a great emperor.


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