Vishvamitra Rishi – महान ऋषि विश्वामित्र की कथा
**vishvamitra rishi ऋषि विश्वामित्र जी **
| ऋषि विश्वामित्र |
राजा कुश के पुत्र राजा गाधि
राजा गाधि के पुत्र राजा विश्वामित्र
राजा से ऋषि हुए विश्वामित्र जी
राजा विश्वामित्र
राजा विश्वामित्र एक बड़े धर्मात्मा और प्रजा का पालन करने वाले राजा थे ! राजा विश्वामित्र एक बार अपने सैनिकों के साथ जंगल मे शिकार खेलने गए !
वहाँ पर ये भगवान वसिष्ठ के आश्रम पर पहुचे ! तब ऋषि वसिष्ठ जी ने इन्हे फल ,फूल ,जल ,भोजन आदि की व्यवस्था कराई ! ऋषि को अपने योगबल से प्राप्त कामधेनु गौमाता के द्वारा सबको भोजन से संतुष्ट किया !
विश्वामित्र जी का कामधेनु से मोह होना
ये देखकर राजा विश्वामित्र चकित रह गए ,और वसिष्ठ जी से उनकी कामधेनु गौमाता मांगने लगे , पर वसिष्ठ जी ने मना कर दिया ! तो राजा जबरदस्ती बलपूर्वक उनकी गौमाता को ले जाने लगे ,तभी गौमाता के अंदर से लाखों सैनिक प्रकट हो गए ! और राजा विश्वामित्र ओर उनके सैनिक भाग गए !
विश्वामित्र जी का राजा से ऋषि होना
तब विश्वामित्र ने कहा की राजा होना बड़ी बात नहीं है ! ब्रम्ह बल ही सच्चा बल है , तब वे अपना राजपाट छोड़कर तपस्या करने चले गए !
विश्वामित्र जी की दो बार तपस्या भंग होना
पहली बार इन्द्र द्वारा भेजी गई स्वर्ग की अप्सरा मेनका ने विघ्न डाला तो " काम " जग गया ! जब होश आया , तो फिर " तपस्या " करने चले गए !
दूसरी बार " क्रोध " जग गया , वसिष्ठ जी के सौ पुत्रों को मार डाला , पर फिर भी वसिष्ठ ऋषि चुप रहे कुछ नहीं बोले ,जब होश आया तो सोचने लगे कि काम और क्रोध ने मेरी तपस्या को बिगाड़ दिया और अपनी भूल का पश्चाताप हुआ , की मैंने बहुत गलत किया है और वे बहुत पछताने लगे !
विश्वामित्र को ब्रम्हा जी का वरदान
तीसरी बाद फिर तपस्या मे तल्लीन हो गए ,बहोत दिन तक घोर तपस्या करने के बाद ब्रम्हा जी प्रसन्न हुए ,ओर वरदान मांगने को कहा ! तब राजा विश्वामित्र ने वरदान मांगा ,की मुझे ब्रम्ह ऋषि की उपाधि चाहिए , और स्वयं वसिष्ठ ऋषि ही मुझे ये उपाधि दें !
वशिष्ठ जी का तपोबल
यहाँ वसिष्ठ ऋषि पहले ही इनकी तपस्या से प्रसन्न थे , क्योंकि उन्हे अपने तप से पता चल गया था कि राजा विश्वामित्र ने अपने काम और क्रोध पर विजय प्राप्त कर ली है !
वसिष्ठ जी द्वारा विश्वामित्र जी को ब्रम्ह ऋषि की उपाधि प्रदान करना
तब ब्रम्हा जी कहने पर वसिष्ठ जी ने इन्हे ब्रम्ह ऋषि की उपाधि प्रदान की ओर इन्हे गले से लगाया ! इनके सच्चे तप और लगन की प्रशंसा भी की , और सप्त ऋषियों मे इन्हे स्थान दिया !
विश्वामित्र जी की महानता और परोपकार
इसी जप, तप,गायत्री मंत्र के प्रभाव से ये जगत मे पूजे जाते है , राजा दशरथ जी से श्री राम और लक्ष्मण को ले आए , उन्हे सब प्रकार की विद्याएँ दीं ! मिथिला ले जाकर सीताजी से रामजी का विवाह कराया , और रावण का वध करवाया !
महा ऋषि विश्वामित्र का समस्त जीवन परोपकार और तपस्या मे ही व्यतीत हुआ !
आज भगवान के सदा आसपास रहने वाले सप्त ऋषियों मे इनकी गढ़ना होती है !
और जानने के लिए हमारे ब्लॉग पर आयें
https://dharamkibate.blogspot.com
Vishvamitra, originally a Kshatriya king, undertook severe penance to become a Brahmarishi.
He is credited with creating the powerful Gayatri Mantra and guiding many other sages.
Vishvamitra faced numerous challenges and temptations but remained steadfast in his spiritual journey.
His story illustrates determination, self-discipline, and the power of tapasya.
He is remembered as a symbol of courage, knowledge, and spiritual excellence in Hindu mythology.
Rishi vishvamitr bhagwan shri ram ji ke guru ji 🙏
जवाब देंहटाएं