राधा रानी का परिचय :जीवन ,भक्ति और प्रेम की देवी
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राधा हिंदू परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण की परम प्रिये मानी जाती हैं।
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वे भक्ति, प्रेम और समर्पण की प्रतिमूर्ति मानी जाती हैं।
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उनका उल्लेख पुराणों, गोस्वामी साहित्य, सूरदास, मीराबाई आदि के भजनों में मिलता है !
रानी रानी का जन्म बरसाना में होने का उल्लेख मिलता है।
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इनके पिता का नाम श्रीमान वृषभानु और माता का नाम श्रीमती कीर्ति माना जाता है।
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राधा को ‘वृषभानु-नंदिनी’ और " व्रज की पटरानी " भी कहा जाता है।
| श्री राधा रानी |
राधा–कृष्ण का संबंध
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राधा और कृष्ण का प्रेम आध्यात्मिक और दिव्य माना जाता है।
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यह प्रेम आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक समझा जाता है।
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दोनों का संबंध त्याग, समर्पण और निष्काम-प्रेम का आदर्श माना जाता है।
भक्ति परंपरा में राधा
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राधा को भक्ति आंदोलन में विशेष महत्व दिया गया है
वैष्णव परंपरा में उन्हें स्वरूप-शक्ति, यानी कृष्ण की आंतरिक शक्ति कहा गया है।
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कई संतों ने उन्हें आदर्श भक्त तथा शुद्ध प्रेम का स्वरूप बताया है।
कला और साहित्य में राधा
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राधा भारतीय नृत्य, संगीत, चित्रकला, कविता में विशेष स्थान रखती हैं।
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रासलीला, ब्रज नृत्य और भक्ति संगीत मे राधा की प्रमुख भूमिका है।
श्री मदभागवत महापुराण मे रास पंचाध्याय स्पष्ट वर्णन मिलता है
रास मंडप मे शरद पूर्णिमा के दिन राधा कृष्ण और गोपियो के नृत्य का उल्लेख मिलता है !
रासमंडप की रात 6 महीने की मानी जाती है जिसमे भेष बदलकर भगवान शंकर भी गोपी रूप मे आए थे !
किशोरी "राधा " जी के कुछ प्रमुख 28 नाम :-
श्री राधा-कृष्ण के प्रमुख 7 मंदिर जो वृंदावन मे स्थित है :--
श्रीराधा वल्लभ मंदिर वृंदावन
श्री बाँकेबिहारीजी मंदिर वृंदावन
श्री राधा रमण मंदिर वृंदावन
श्री गोविंद देव जी मंदिर बृंदावन से प्रस्थान = अभी- सिटीपैलेस जयपुर मे
मदन मोहन मंदिर =अभी-करौली राजस्थान मे
युगल किशोरजी वृंदावन से प्रस्थान = अभी-पन्ना ,मध्य प्रदेश मे
श्री राधा गोपीनाथ मंदिर वृंदावन से प्रस्थान = अभी-जयपुर मे
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