शास्त्रों की 18 स्मृतियाँ -ऋषियों की 18 स्मृतियाँ -हिन्दू धर्म की महत्वपूर्ण स्मृतियाँ
18 स्मृतियाँ और उनके रचयिता-भाग 1
| स्मृति रचयिता ऋषि |
1 मनु स्मृति
राजा मनु और उनके धर्म शास्त्र " मनुस्मृति " का " सनातन धर्म " मे विशेष स्थान है ! सभी स्मृतियों मे " मनु स्मृति " का प्रधान स्थान है ! " प्राधान्यं हि मनो: स्मृतम " ! मनु महाराज द्वारा लिखी स्मृति को ही मनु स्मृति कहते है !
2 अत्रि स्मृति
महर्षि अत्रि वैदिक मंत्र द्रष्टा ऋषि है ! ये ब्रम्हा जी के मानस पुत्र है ! इनकी गणना सप्त ऋषियों मे होती है ! कर्दम ऋषि की पुत्री इनकी देवी " अनुसूईया " इनकी पत्नी है ! जो पतिव्रताओं मे आदर्श है ! अत्रि ऋषि ने अत्रि स्मृति लिखी !
3 विष्णु स्मृति
" भगवान विष्णु " द्वारा पृथ्वी { धरा } देवी को दिया उपदेश वैष्णव धर्मशास्त्र कहलाता है !यह सूत्रों और श्लोकों मे है !" गीता " जी की तरह इसे भी " भगवदवाणी " कहा गया है ! इसमे 100 अध्याय है !
4 हारीत स्मृति
" महर्षि हारीत " परम वैष्णव भक्त है ! महाभारत मे हारीत जी के नाम से " हारीत गीता " भी प्राप्त होती है ! महर्षि हारीत भगवान विष्णु जी के अनन्य भक्त थे ! हारीत स्मृति हारीत ऋषि ने लिखी !
5 यम स्मृति
धर्म राज " यम " देवी संज्ञा और सूर्य के पुत्र है ! ये जीवों के कर्मों के साक्षी , यम तथा धर्म रूप होने के कारण धर्म राज कहलाते है ! जीवों को उनके अच्छे बुरे कर्मों का फल प्रदान करते है ! उन्हे शुद्ध और पवित्र बनाते है ! भगवान के मार्ग मे लाना और भगवन्नाम महिमा को कल्याण कारक बताना ही इनका कार्य है ! इन्ही के द्वारा लिखी गई स्मृति को यम स्मृति कहा जाता है !
6 याज्ञवल्क्य स्मृति
रामकथा के प्रवक्ता याज्ञवल्क्य जी महान योगी ,अध्यात्म वेत्ता , धर्मात्मा आचार्य है स्मृति कारों मे इनका स्थान बहुत महत्वपूर्ण है ! याज्ञवल्क्य स्मृति मे आचार ,व्यवहार ,प्रायश्चित करने का मार्ग बताया गया है इसी नाम के तीन अध्याय है ! याज्ञ वल्क्य स्मृति इन्ही के द्वारा लिखी गई है !
7 अंगिरा स्मृति
महर्षि अंगिरा ब्रम्हा जी के पुत्र है ! कर्दम ऋषि की पुत्री " श्रद्धा " इनकी धर्म पत्नी है ! ब्रहस्पति , उतथ्य ,संवर्त इनके पुत्र है ! सिनीवाली , कुहू ,राका ,अनुमति इनकी चार कन्या है ! महर्षि अंगिरा ने ही " अथर्ववेद " लिखा है ! इसलिये इन्हे " अथरवा " भी कहते है ! इनकी गिनती सप्त ऋषियों मे होती है ! अंगिरा स्मृति इन्ही के द्वारा लिखी गई है !
8 शनैश्चर स्मृति
शनि { शनैश्चर } देवता भगवान सूर्य के पुत्र है ! श्री नाभा दास जी ने इनकी गड़ना धर्म शास्त्र कारों मे की है ! इन्होंने ही शनैश्चर स्मृति लिखने का कार्य किया !
9 संवर्त स्मृति
संवर्त ऋषि महाऋषि अंगिरा के पुत्र और देवगुरु ब्रहस्पति के छोटे भाई है ! ये बड़े शिव भक्त ,गायत्री के महान उपासक ,मंत्रद्रष्टा ,ऋषि वामदेव , ऋषि मार्कन्डेय आदि ऋषियों के परमगुरु है ! संवर्त स्मृति मे इनके उपदेश बड़े कल्याण कारक है ! इस स्मृति मे वर्णाश्रम धर्म ,प्रायश्चित , गायत्री जप तथा दान की महिमा बताई गई है ! संवर्त स्मृति के रचयिता है !
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