गंगा मैया के पृथ्वी पर अवतरण की कथा
🎉 राजा सगर और 60,000 पुत्र 🧞
* अयोध्या के प्रतापी राजा सगर ने अश्व मेघ यज्ञ किया !
* इन्द्र देव ने यज्ञ का घोड़ा चुरा कर कपिल मुनि के आश्रम मे बांध दिया !
आरोप लगा दिया !
* क्रोधित होकर कपिल मुनि ने उन्हे भस्म कर दिया ! इससे उनकी आत्माएं मोक्ष से वंचित रह गई !
🪔राजा अंशुमान का प्रयास
* राजा सगर के पौत्र अंशुमान कपिल मुनि के आश्रम पहुचे और उनसे क्षमा मांगी !
* अपने पित्रों की मुक्ति की प्रार्थना की !
* तब कपिल मुनि ने कहा :-
* यदि इनके भस्म पर गंगाजल पड़ेगा तो इनको मोक्ष प्राप्त होगा !
* पहले राजा अंशुमान ने गंगा मैया को पृथ्वी पर लाने के लिए तपस्या की पर गंगा मैया पृथ्वी पर नहीं आईं !
🏵️राजा दिलीप का प्रयास
* राजा अंशुमान के पुत्र राजा दिलीप ने गंगा मैया को पृथ्वी पे लाने के लिए तपस्या की पर वे भी अपने
जीवनकाल मे गंगा मैया को पृथ्वी पर नहीं ला सके !
🌻राजा भगीरथ की कठोर तपस्या
* राजा दिलीप के पुत्र राजा भगीरथ ने हजारों वर्षों तक गंगा मैया को पृथ्वी पे लाने के लिए घोर तपस्या की !
* उसकी तपस्या से ब्रम्हाजी प्रसन्न हुए और गंगा मैया को पृथ्वी पे जाने की आज्ञा दी !
* पर गंगा मैया का प्रचंड वेग झेलने की शक्ति पृथ्वी मे नहीं थी इसके वेग से पृथ्वी पाताल मे चली जाती !
* तब राजा भगीरथ ने भगवान शिव की तपस्या की !
🌺शिवजी और गंगा मैया का अवतरण
* भगवान शिव प्रसन्न हुए और गंगा मैया को अपनी जटाओ मे धारण किया और धीरे धीरे पृथ्वी पर छोड़ा !
* गंगा मैया भगीरथ के पीछे पीछे चलीं इसीलिए गंगा को भगीरथी भी कहा जाता है !
🎉60,000 पुत्रों की मोक्ष की प्राप्ति
* गंगा जल जब 60,000 पुत्रों पर पड़ा तब सभी को मोक्ष प्राप्त हुआ !
* इसी कारण इस कार्य को भगीरथ प्रयास कहलाता है ! अर्थात असंभव को संभव करना !
🪻सारांश
* गंगा अवतरण = पूर्वजों को मोक्ष दिलाना
* सफलता = राजा भगीरथ
* गंगा का नाम = भगीरथी
* शिव का नाम = गंगाधर
🎉मकर सक्रांति
* राजा भगीरथ आगे आगे चलते रहे और गंगा मैया उनके पीछे पीछे चलती रही और उनकी धारा कपिल मुनि के
आश्रम मे पहुची थी और राजा सगर के 60,000 पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ था ! इस दिन मकर सक्रांति थी !
* इसलिए इस दिन को विशेष माना जाता है ! इसीलिए मकर सक्रांति को स्नान करने से स्वर्ग की प्राप्ति और
* पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है !
🪔गंगा मैया का मुख्य श्लोक
* नंदिनी नलिनी सीता मालती च महापगा
* विष्णुपादाब्जसंभूता गंगा त्रिपथगामिनी
* भागीरथी भोगवती जान्हवी त्रिदशेश्वरी
* द्वादशैतानी नामानि यत्र तत्र जलाशये
* स्नानोंधत: स्मरेन्नित्यं तत्र तत्र वसाम्यहम
🌹शास्त्रों मे उल्लेख
* कर्क सक्रांति को देवताओ की रात्री माना जाता है !
* मकर सक्रांति को देवताओ का दिन आरंभ होता है !
🌺 मकर संक्रांति की संपूर्ण जानकारी
* सूर्य जब एक राशि को छोड़कर दूसरी राशि मे जाता है तो उसे सक्रांति कहा जाता है !
वैसे तो यह हर महीने ही आती है !
* बारह राशियो की 12 सक्रांति होती है
* छः महीने उत्तरायण छः महीने दक्षिडायान
* भीष्म पितामह ने भी सूर्य उत्तरायण की प्रतीक्षा करके उसके उपरांत ही अपने प्राणों को त्यागा था !
🏵️वर्ष की 12 राशियो की सक्रांति
* मकर सक्रांति जनवरी
* कुम्भ सक्रांति फरवरी
* मीन सक्रांति मार्च
* मेष सक्रांति अप्रैल
* वृष सक्रांति मई
* मिथुन सक्रांति जून
* कर्क सक्रांति जुलाई
* सिंह सक्रांति अगस्त
* कन्या सक्रांति सितंबर
* तुला सक्रांति अक्टूबर
* वृश्चिक सक्रांति नवंबर
* धनु सक्रांति दिसंबर
🌞 मकर संक्रांति की कथा
* मकर संक्रांति भारत का एक अत्यंत पावन और प्राचीन पर्व है। यह पर्व सूर्य देव के मकर राशि में
प्रवेश करने के कारण मनाया जाता है।
* इस दिन से उत्तरायण काल आरंभ होता है, जिसे देवताओं का दिन
माना गया है।
🔱 सूर्य देव और शनिदेव की कथा
* पौराणिक कथाओं के अनुसार सूर्य देव और उनके पुत्र शनिदेव के संबंध अच्छे नहीं थे।
* शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं।
* जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो वे अपने पुत्र शनिदेव के घर जाते हैं।
* यह दर्शाता है कि अहंकार त्याग कर संबंधों को निभाना चाहिए।
☘️ इसलिए मकर संक्रांति मेल-मिलाप, क्षमा और समरसता का पर्व माना जाता है।
🏹 भीष्म पितामह और उत्तरायण
* महाभारत की कथा के अनुसार, भीष्म पितामह को इच्छामृत्यु का वरदान प्राप्त था।
* उन्होंने शरशय्या पर लेटे-लेटे उत्तरायण आने तक प्रतीक्षा की, क्योंकि उत्तरायण में देह त्याग करने से मोक्ष की
प्राप्ति होती है।
🌹 इस कारण मकर संक्रांति को मोक्षदायिनी तिथि माना जाता है।
🌊 गंगा अवतरण की कथा
* कहा जाता है कि इसी दिन राजा भगीरथ के तप से माता गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं और कपिल मुनि के
आश्रम से होकर समुद्र में मिलीं।
🏵️ इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है।
🍚 तिल–गुड़ का महत्व
* इस दिन तिल और गुड़ का दान और सेवन किया जाता है।
🌷तिल: पापों का नाश
🥀गुड़: मधुरता और सौहार्द
☘️ “तिल-गुड़ खाओ और मीठा बोलो”
🪁 पर्व का आध्यात्मिक संदेश
🪻अंधकार से प्रकाश की ओर
🌿शीत से उष्मा की ओर
☘️अहंकार से विनम्रता की ओर
🌾 मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है?
🌻सूर्य की उपासना
🌺नई फसल का स्वागत
🌻दान, पुण्य और सेवा
🏵️जीवन में सकारात्मक परिवर्तन
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