मीराबाई-भक्ति की मिसाल Timeless Devotion to Krishna
| meerabai कृष्ण भक्त |
मीराबाई की सम्पूर्ण कथा Krishna Devotion
Meerabai was a 16th-century Indian mystic poet and devoted saint of Lord Krishna. She was born in Rajasthan, India, and is one of the most respected figures of the Bhakti Movement. Meera Bai believed Lord Krishna to be her true husband and dedicated her entire life to divine devotion. She expressed her love for Krishna through devotional songs known as Bhajans. Her spiritual poetry highlights faith, surrender, and unconditional love for God, inspiring people across the world.
मीराबाई का जन्म ओर बचपन
🪔 मीराबाई का जन्म लगभग 1498 ई. में राजस्थान के कुड़की (पाली ज़िला) में हुआ था। उनके पिता
रतनसिंह राठौड़ मेड़ता के सामंत थे। बचपन से ही मीरा अत्यंत कोमल हृदय, संवेदनशील और
आध्यात्मिक प्रवृत्ति की थीं।
🏵️ कहा जाता है कि बाल्यावस्था में एक साधु ने उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति भेंट की थी।
उसी क्षण से मीरा ने कृष्ण को ही अपना स्वामी, सखा और जीवनसाथी मान लिया।
🌻 छोटी सी मीरा कृष्ण से बातें करतीं खेल खेल मे उनके सामने नृत्य करती थी !
🌺 उनके सामने भजन गातीं और उन्हें ही अपना पति कहतीं।
मीराबाई का विवाह और उनका वैराग्य
🏵️ मीराबाई का विवाह मेवाड़ के राजकुमार भोजराज से हुआ, जो राणा सांगा के पुत्र थे। परंतु मीरा का
मन सांसारिक सुखों में नहीं रमा।
🌻 विवाह के बाद भी वे राजसी जीवन से दूर रहतीं कृष्ण भक्ति में लीन रहतीं !
साधु-संतों के साथ सत्संग करतीं ओर महल के नियमों का पालन नहीं करती थी !
यह सब राजपरिवार को अच्छा नहीं लगता था।
समाज का विरोध और उन्हे विष का दिया जाना
🏵️ पति भोजराज के देहांत के बाद मीरा की स्थिति और कठिन हो गई।
उन्हें कृष्ण-भक्ति छोड़ने के लिए अनेक तरह की पीड़ा दी गईं!
विष का प्याला दिया गया
उन्हे मरने के लिए साँप भेजा गया
बार बार उनकातिरस्कार किया गया
🌺 परंतु हर बार कृष्ण भगवान की कृपा ने उन्हे बचा लिया !
विष अमृत बन गया
साँप शालिग्राम बन गया
मीरा का विश्वास अडिग था।
मीराबाई की भक्ति ओर प्रेम भजन
🌺मीराबाई ने सैकड़ों भक्ति पद (भजन) रचे। उनके भजन आज भी पूरे भारत में गाए जाते हैं।
कुछ प्रसिद्ध भाव इस प्रकार है :-
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
चाकर राखो जी
🌷 मीराबाई की भक्ति की विशेषतायेँ :-
जाति-पाति से ऊपर से ऊपर थी उनकी भक्ति
स्त्री-पुरुष भेद से परे थी उनकी भक्ति
प्रेम और समर्पण से भरी थी मीराबाई की भक्ति
मीराबाई की तीर्थयात्रा और वृंदावन
🌻 महल की बंधनों से मुक्त होकर मीरा ने घर त्याग दिया।
वृंदावन, द्वारका, मथुरा जैसे पवित्र स्थलों में भ्रमण करती रहीं।
वृंदावन में संत उनसे मिलने आए, पर मीरा ने कहा
मैं तो गिरधर की दासी हूँ, किसी और से भेंट नहीं नहीं करना चाहती !
भगवान कृष्ण की द्वारका में दिव्य लीला ओर मीराबाई का मूर्ति मे लीन होना
🏵️ मीराबाई अंत में द्वारका पहुँचीं और श्रीकृष्ण के मंदिर में भजन गाने लगीं।
कहा जाता है:-
🌺एक दिन वे कृष्ण मूर्ति के सामने भजन गाते-गाते उसी में लीन हो गई और मूर्ति में समा गईं !
उनका शरीर दिखाई नहीं दिया !
यह भक्ति की परम अवस्था मानी जाती है।
मीराबाई का समाज को दिव्य संदेश
🪔 मीराबाई की भक्ति से हमे यही शिक्षा मिलती है !
सच्चा प्रेम समाज के बंधनों से बड़ा होता है !
ईश्वर भक्ति में डर, लोभ और दिखावा नहीं होता !
नारी भी ईश्वर प्रेम में सर्वोच्च स्थान पा सकती है !
Meera Bai was a royal princess who chose devotion over luxury. After her marriage, she faced many difficulties because of her deep faith in Lord Krishna. Despite opposition from society and family, she continued her spiritual path with courage and devotion. Meera Bai’s life teaches that true devotion goes beyond social rules, gender, and fear. Her bhajans remain popular even today and symbolize pure love and spiritual freedom.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें