मूर्ख से महान कवि ignorance into greatness
महाकवि कालिदास प्रारंभ में अत्यंत साधारण अल्पशिक्षित और सरल बुद्धि के व्यक्ति थे।
कहा जाता है कि उन्हें पढ़ना-लिखना तक नहीं आता था। वे एक गाँव में रहते थे और जीवन यापन के लिए लकड़ी काटने जैसे साधारण कार्य करते थे।
🌻राजकुमारी से विवाह
उज्जयिनी के राजा विक्रमादित्य के दरबार के कुछ घमंडी पंडितों को सबक सिखाने के लिए
उन्होंने जानबूझकर कालिदास का विवाह विदुषी राजकुमारी विद्योत्तमा से करा दिया।
विवाह के बाद जब विद्योत्तमा को पता चला कि उनका पति अशिक्षित है,
तो उन्होंने कालिदास को अपमानित कर महल से निकाल दिया।
🏵️ माँ काली की शरण
अपमान से टूटे हुए कालिदास वन में चले गए।
वहाँ उन्होंने माँ काली की घोर तपस्या की।
माँ काली ने प्रसन्न होकर उन्हें असाधारण विद्या , काव्य-प्रतिभा और ज्ञान का वरदान दिया।
ज्ञान प्राप्ति और पुनरागमन
🌺वरदान प्राप्त करने के बाद कालिदास पूरी तरह बदल चुके थे।
वे जब दोबारा उज्जयिनी लौटे तो उनके मुख से अद्भुत संस्कृत श्लोक निकले।
उनके पहले शब्द माने जाते हैं
“ अस्ति कश्चित्वा ग्विशेषः ”
यहीं से उन्हें नाम मिला — कालिदास (काली का दास / काली माता का दास )
🏵️ महाकवि कालिदास की रचनाएँ
कालिदास संस्कृत साहित्य के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं।
प्रमुख कृतियाँ
शाकुन्तलम ( नाटक )
मेघदूत
रघुवंश
कुमारसंभव
ऋतुसंहार
मालविकाग्निमित्रम
🏵️महत्व
बड़े बड़े साहित्यकार कालिदास को “ संस्कृत साहित्य का शेक्सपियर ” भी कहते है !
उनकी भाषा मधुर, भावनात्मक और प्रकृति-वर्णन करने मे श्रेष्ठ है !
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🌷 सीख
ज्ञान जन्म से नहीं , कृपा और परिश्रम से मिलता है !
अपमान भी जीवन बदल सकता है !
ईश्वर की भक्ति से असंभव भी संभव हो जाता है !
इसलिये कभी भी यह ना सोचे की ये मूर्ख है !
क्योंकि मूर्ख भी एक दिन आपसे ज्यादा समझदार बन सकते है इसमे संदेह किंचित मात्र भी नहीं है !
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