पवित्र माह स्नान महत्व और विधि
🪔माह मास के स्नान का महत्व 🪔
🪔पूर्णिमा से पूर्णिमा माह स्नान 🪷
जिस प्रकार बैसाख मास मे जल ओर अन्न दानसे पुण्य प्राप्त होते है !
ठीक उसी प्रकार माह मास मे स्नान से पुण्य प्राप्त होते है !
जिस तरह कार्तिक मास मे दीप दान ओर तप से पुण्य मिलता है !
ठीक उसी तरह माह मास मे केवल स्नान करने से पुण्य मिल जाता है !
माह स्नान का आध्यात्मिक लाभ
🪔जो मनुष्य सूर्य उगने से पहले माह मास मे स्नान कर लेता है !
वह अपने माता पिता सहित कुल की सात पीढ़ियो का उद्धार कर लेता है !
🪔माह मास के स्नान से पाप नष्ट हो जाते हैं और आध्यात्मिक शुद्धि होती है !
हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है कि माह स्नान से शरीर और मन की अशुद्धि दूर होती है !
और पुण्य की प्राप्ति होती है !
🪔माह मास के स्नान से विपत्ति का नाश होता है !
माह स्नान सब व्रतों से बढ़कर है !
🪔सब प्रकार के दानों का फल प्रदान करने वाला है !
माह स्नान से आयु ,आरोग्य ,रूप और सोभाग्य की प्राप्ति होती है !
माह स्नान की विधि
🪔स्नान का समय सुबह सूर्योदय से पहले का माना जाता है !
स्नान से पहले अपने तन की अच्छी तरह से शुद्धि कर ले !
🪔स्नान के लिए जल पवित्र हो और अगर संभव हो तो पवित्र नदी, तालाब, जलाशय,सरोवर,पोखर का पानी
श्रेष्ठ माना जाता है !
🪔अगर घर मे स्नान कर रहे हो तो स्नान के दोरान गंगा मैया के शुभ मंत्रों का उच्चारण करें।
उदाहरण: “ॐ गंगे नमः” या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”स्नान के बाद पवित्र कपड़े पहनें।
🪔तीर्थ मे स्नान के बाद पवित्र नदी की पूजा = दूध ,फल,फूल ,धूप ,दीप से पूजा अवश्य करें !
घर मे पूजा स्थल साफ करके भगवान विष्णु की आराधना करे = दीपक,धूप से आरती करना शुभ होता है।
🪔 यदि घर मे कोई बीमार है तो वो मानसिक स्नान भी कर सकता है या उस पर गंगाजल से छीटे अवश्य लगाए !
मानसिक स्नान = शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का साधन है।
🪔शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है।
🛕 प्रमुख तीर्थ स्थल
जनवरी में लाखों श्रद्धालु निम्नलिखित पवित्र स्थलों पर स्नान करते हैं:
💥प्रयागराज (त्रिवेणी संगम)
🪻हरिद्वार (गंगा नदी)
🌷वाराणसी (गंगा नदी)
✨उज्जैन (शिप्रा नदी
🍀नासिक (गोदावरी नदी)
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