रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण
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धार्मिक ओर खगोलीय दृष्टि मे
सप्तऋषि तारा मंडल आकाश में दिखने वाला सात प्रमुख तारों का समूह है।
इसे अंग्रेज़ी में ursa-major कहा जाता है।
भारत में इसे धार्मिक दृष्टि से देखा जाता है
सप्तऋषि तारामंडल को सात ऋषियों का समूह कहा जाता है
हिंदू शास्त्रों के अनुसार ये सात तारे सप्तऋषियों के प्रतीक है माने जाते है :-
वशिष्ठ ऋषि 🍀
विश्वामित्र ऋषि ☘️
अत्रि ऋषि 🌹
भरद्वाज ऋषि 🪻
गौतम ऋषि 🌲
जमदग्नि ऋषि 🌷
कश्यप ऋषि 🌺
ये सात ऋषि अपने ब्रह्मज्ञान, तपस्या , धर्म और सृष्टि-रक्षा के आधार माने जाते हैं।
दो अंतिम तारों को सीधा बढ़ाने पर ध्रुव तारा दिखाई देता है।
पुराणों में कहा गया है
सप्तऋषि आकाश में तप कर रहे हैं
वे सृष्टि के रक्षक और मार्गदर्शक हैं
हर मन्वंतर में सप्तऋषि बदलते रहते हैं
इसीलिए इसे सनातन धर्म का आकाशीय प्रतीक कहा गया है।
सप्तऋषि मंडल के पास एक छोटा तारा होता है
यह - वशिष्ठ ऋषि की पत्नी है जिन्हे पतिव्रता का आदर्श माना जाता है।
हिंदू विवाह में अरुंधती दर्शन की परंपरा इसी मान्यता से जुड़ी हुई है।
सप्तऋषि तारा मंडल = आकाश में 7 तारों का समूह
धार्मिक रूप से = सात महान ऋषि
वैज्ञानिक रूप से = Ursa Major
ध्रुव तारा पहचानने में सहायक
भारतीय संस्कृति और विवाह परंपरा से जुड़ा
जैसे धरती पर ऋषि धर्म सिखाते हैं
वैसे ही आकाश में सप्तऋषि मानवता का मार्ग दिखाते हैं !
🪔 धार्मिक मान्यता
ऐसा कहा जाता है कि:
सप्त ऋषि आज भी आकाश से पृथ्वी की रक्षा करते हैं
वे हर मन्वंतर में धर्म की निगरानी करते हैं
इनके दर्शन से पुण्य और सद्बुद्धि प्राप्त होती है
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