भक्त अलिभगवान का जीवन चरित्र:राम विरह से वृंदावन रास-दर्शन तक
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🌼 भक्त अलिभगवान जी की अद्भुत कथा
भक्तमाल के आधार पर यह घटना लगभग 1650 ईस्वी के आसपास की मानी जाती है। भक्त अलिभगवान जी राघवेंद्र सरकार के अनन्य भक्त थे।
🎭 रामलीला में उमड़ा विरह
एक बार आप श्रीरामलीला का दर्शन कर रहे थे। जब श्रीराम के वनवास और वनगमन का करुण प्रसंग आया तो आपका धैर्य टूट गया। आप—
"हा राम! हा रघुनाथ!"
कहते हुए विलाप करने लगे।
अनेक लोगों ने आपको समझाने का प्रयास किया, परंतु किसी भी प्रकार आपको शांति नहीं मिली। इसी अवस्था में कई दिन बीत गए और आपका शरीर जर्जर हो गया।
🙏 संत से भेंट
भगवत्कृपा से एक संत से आपकी भेंट हुई। उन्होंने आपकी दशा देखकर ही आपकी मनःस्थिति समझ ली।
आपने भी उन्हें योग्य पात्र जानकर अपनी सारी मनोव्यथा कह सुनाई।
संत ने पूछा—
"क्या आप कभी श्रीवृंदावन गए हैं?"
आपके "नहीं" कहने पर वे आपको अपने साथ श्रीवृंदावन धाम ले आए।
🌿 वृंदावन में दिव्य दर्शन
वृंदावन में उन्होंने आपको भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला का दर्शन कराया।
भगवान श्रीकृष्ण ने भी आपको अधिकारी जानकर अपनी दिव्य लीला-झांकी का साक्षात् दर्शन कराया।
भगवान के दर्शन होते ही आपका विरह दूर हो गया और हृदय में एक नई उमंग जाग उठी।
💖 सेवा का सुंदर निर्णय
आपने निश्चय किया कि अब आप श्रीरासबिहारी भगवान की सेवा करते हुए वृंदावन में ही रहेंगे।
परंतु अगले ही क्षण आपको स्मरण हुआ कि गुरुदेव ने तो आपको श्रीसीतारामजी की सेवा सौंपी है। यदि उनकी सेवा छोड़कर श्रीरासबिहारीजी की सेवा करूँ तो कहीं भगवदपराध न हो जाए।
अंततः आपने निर्णय किया कि—
"मैं श्रीसीतारामजी की ही सेवा, श्रीरासबिहारीजी के रूप में करूँगा।"
इस प्रकार श्रीरासबिहारीजी की सेवा में रहते हुए भी आपकी श्रीसीतारामजी के प्रति अनन्य भक्ति बनी रही।
📜 प्रियादास जी का वर्णन
अलि भगवान राम सेवा सावधान मन वृन्दावन आये कछु और रीति भई है।
देखे रास मण्डल में बिहरत रसरास बाढ़ी छबि प्यास दृग सुधि बुझि गई है॥
नाम धरि रास औ बिहारी सेवा प्यारी लागी खगी हिय माँझ गुरु सुनी बात नई है।
विपिन पधारे आप जाय पग धारे सीस 'ईस मेरे तुम' सुख पायो कहि दई है॥
🌺 शिक्षा: सच्चे भक्त के लिए श्रीराम और श्रीकृष्ण में कोई भेद नहीं होता। भगवान एक ही हैं, केवल उनकी लीलाएँ और रूप भिन्न-भिन्न हैं। 🙏
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