🪔 देवर्षि नारद जी – भक्ति, ज्ञान और लोकमंगल के महान ऋषि 🪔 देवर्षि नारद जी सनातन धर्म के अत्यंत पूजनीय, प्रसिद्ध और दिव्य ऋषि माने जाते हैं। वे त्रिकालदर्शी, ब्रह्मर्षि तथा भगवान विष्णु के परम भक्त थे। उनके मुख से सदैव “नारायण–नारायण” का उच्चारण होता रहता था। नारद जी देवताओं, मनुष्यों और असुरों—तीनों लोकों में स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाले ऋषि हैं। देवर्षि नारद जी की कथा – जन्म से देवर्षि बनने तक 🌼 जन्म और ब्रह्माजी का आदेश उत्संगान्नारदो जज्ञे अर्थात प्रजापति ब्रह्माजी की गोद से नारद जी का जन्म हुआ। जब ब्रह्माजी ने उन्हें सृष्टि के विस्तार की आज्ञा दी ! नारद जी ने कहा :- “अमृत से भी अधिक प्रिय श्री विष्णु सेवा को छोड़कर कौन मूर्ख विषयों का विष पिएगा!” इस पर ब्रह्माजी बहुत क्रोधित हो गए ! 🔱 ब्रह्माजी का श्राप ब्रह्माजी बोले :- मेरे श्राप से तुम्हारे ज्ञान का लोप होगा। तुम उपबर्हण नाम से प्रसिद्ध होकर पचास कन्याओं के पति बनोगे। फिर दासी के पुत्र के रूप में जन्म लोगे। अंततः संत-भगवंत की कृपा से पुन...