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                                                                                                                                           श्री गणेशाय नमः                                                                 श्रीजानकीवल्लभो विजयते                                                                      ...

समुद्र मंथन और कामधेनु गौमाता🏵️

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🪔समुद्र मंथन और कामधेनु गौमाता🪔 🪔 पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय कामधेनु गौमाता का प्राकट्य हुआ। 🌊 देवता और असुर अमृत प्राप्ति के लिए क्षीरसागर का मंथन कर रहे थे। 🌸 उस समय अनेक दिव्य रत्न प्रकट हुए जैसे लक्ष्मी माता, ऐरावत हाथी, 🌳 कल्पवृक्ष और धन्वंतरि वैद्य। 🐄 उन्हीं दिव्य रत्नों में से एक थीं कामधेनु गौमाता। ✨ जिन्हें सर्वकामप्रदायिनी गौ कहा गया है। 🌼 वे अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करने की सामर्थ्य रखती थीं। 🙏 उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य और पावन था। 📜 शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि 📖 उनके चारों पैरों में वेदों का वास है। 🕉️ सींगों में देवताओं का निवास माना गया है 🌍 और उदर में समस्त लोक स्थित हैं। 🌿 कुछ समय बाद कामधेनु गौमाता 🏞️ महर्षि वशिष्ठ ऋषि के आश्रम में रहने लगीं। 🐄 वहाँ वे पुत्री के समान नंदिनी नाम से जानी गईं। 🍃 नंदिनी के प्रभाव से आश्रम में कभी किसी वस्तु की कमी नहीं होती थी। 👑 एक बार राजा विश्वामित्र 🏞️ वशिष्ठ ऋषि के आश्रम में पहुँचे। ✨ नंदिनी द्वारा प्राप्त दिव्य आतिथ्य से वे अत्यंत प्रभावित हुए ⚠️ और उन्हें बलपूर्वक ले जाना चाहा। ⚔️ तब नंदिनी...