🌻 ** राजा अंबरीष जी की एकादशी व्रत निष्ठा की कथा**🌻 राजा अंबरीषजी ने एक बार अपनी पत्नी के साथ श्री कृष्ण भगवान को प्रसन्न करने के लिए वर्ष की सभी एकादशी का व्रत का नियम किया ,वर्ष पूरा होने पर धूमधाम से पारण के दिन उन्होंने भगवान वासुदेव की पूजा की ,ब्राम्हणो को गोदान किया ,जब वे पारण करने जा रहे थे तब ही अचानक "दुर्वासा ऋषि " पधारे ! 🪔दुर्वासाजी का क्रोध अंबरीषजी ने उन्हे भोजन का आग्रह किया तो उन्होंने स्वीकार कर लिया ओर यमुना तट पे स्नान को चले गए अब द्वादशी केवल एक घड़ी शेष थी, द्वादशी मे पारण ना करने से व्रत भंग होता ,ब्राम्हणो से पूछकर अंबरीषजी ने भगवान का चरणामृत लेकर पारण कर लिया उधर दुर्वासाजी को अपने तप से ये बात पता चल गई ,तभी उन्होंने अपने मस्तक से एक जटा उखाड़ ली जिससे कृत्या नाम की राक्षसी निकली ओर उसे अंबरीषजी को समाप्त करने के लिए भेज दिया ! 🌻राक्षसी कृत्या का भस्म हो...