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रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण

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                                                                                                                                           श्री गणेशाय नमः                                                                 श्रीजानकीवल्लभो विजयते                                                                      ...

समुद्र मंथन का दिव्य घोड़ा उच्चैःश्रवा | 7 सिरों वाला अश्व

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🐎  उच्चैःश्रवा – समुद्र मंथन का दिव्य घोड़ा 🌊  समुद्र मंथन से उत्पत्ति जब देवताओं और असुरों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया, तब अनेक दिव्य वस्तुएँ प्रकट हुईं। उन्हीं में से एक अद्भुत और तेजस्वी घोड़ा था  उच्चैःश्रवा । 🐎 उच्चैःश्रवा का स्वरूप ✨ यह घोड़ा  सफेद (श्वेत) रंग का  माना गया है ✨ इसे सभी घोड़ों में श्रेष्ठ बताया गया है ✨ पौराणिक वर्णन के अनुसार यह  सात सिरों वाला दिव्य अश्व  था ✨ इसकी चमक और तेज अत्यंत अद्भुत थी 👑 महत्व 🌸 इसे घोड़ों का राजा माना जाता है 🌸 यह इंद्र देव का प्रधान हाथी बताया गया है 🌸 यह समुद्र मंथन के 14 रत्नों में से एक है 🌸 यह दिव्यता और शक्ति का प्रतीक है 🌿 आध्यात्मिक संदेश उच्चैःश्रवा हमें यह सिखाता है कि जीवन में धैर्य और संघर्ष से ही असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त होती हैं। जैसे समुद्र मंथन से दिव्य रत्न निकले, वैसे ही जीवन के संघर्षों से सफलता मिलती है। 🌺 निष्कर्ष उच्चैःश्रवा केवल एक पौराणिक घोड़ा नहीं है, बल्कि यह शक्ति, दिव्यता और श्रेष्ठता का प्रतीक है। Read this article in english - click here 

कृष्ण भक्त पाँच पांडव

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🙏🏿भक्त पांडव पाँच भाई 💥 जैसे शरीर मे 5 प्राण रहते है वैसे ही महाराज पांडु के 5 पुत्र हुए  बड़ी रानी कुंती देवी के द्वारा धर्म ,वायु और इन्द्र से --युधिष्ठिर ,भीम ,अर्जुन  छोटी रानी माद्री के द्वारा अश्विनी कुमारो के अंश से नकुल और सहदेव हुए  🙏🏿महाराज पांडु की मृत्यु का कारण 💥 महाराज पांडु के 2 पत्नी थी - बड़ी रानी कुंती और छोटी रानी माद्री  पर उन्हे किन्दम ऋषि ने श्राप दिया था कि यदि तुम किसी स्त्री के साथ मिलन करोगे तो तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी,  एक दिन महाराज पांडु अपनी छोटी रानी माद्री के साथ मिलन कर रहे थे तभी उनकी मृत्यु हो गई और छोटी रानी  माद्री भी उन्हे साथ सती हो गई ! 🙏🏿पाँच पांडवों का बचपन 💥 पांचों पुत्रों का लालन पालन बड़ी रानी कुंतीदेवी ने ही किया   ये पांचों भाई जन्म से ही धार्मिक ,सत्यवादी और न्यायी थे  ये क्षमावान ,सरल ,दयालु और भगवान के परम भक्त थे  पांडवों के बचपन मे ही पिता की मृत्यु के कारण इन्हे बहुत दुख दिया गया   महाराज पांडु के ना रहने पर राज्य इन्हे ही मिलना चाहिए था पर इनके बालक होने के कारण पांडु के अंधे बड़...

भगवान के 24 अवतार और उनका महत्व

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    🪔24 अवतारों का मुख्य श्लोक 💥 🌻जी जी मीन वराह कमठ नरहरि बलि- बावन | 🪻परशुराम रघुबीर कृष्ण कीरति जग पावन || 🥀बुद्ध कल्कि व्यास पृथु हरि हंस मन्वन्तर | 🌷यज्ञ ऋषभ हयग्रीव ध्रुव वरदैन धन्वन्तर || 🌺 बदरीपति दत्त कपिलदेव सनकादिक करुणा करो | 🌹चौबीस रूप लीला रुचिर श्री अग्रदास उर पद धरो || 🪷पद की व्याख्या और स्वरूप 🪔 🙏🏿🪔🌹🪔मंगलमय  1 🥀 श्री हरि ध्रुव वरदेन = ध्रुव को वरदान देने के लिए अवतार धारण किया  2 🌷मीन = प्रलयकाल मे भगवान मत्स्य बने और राजा सत्यव्रत और वेदों की रक्षा की  3 🍀वराह = पाताल से पृथ्वी को निकालने के लिए अवतार धारण किया  4 🌷कच्छप = समुद्र मंथन मे मंदराचल पर्वत को पीठ पे धारण किया   5 🪻नरसिंह = भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए हिरण्यकशीपु का नाश किया   6 🌻 वामन = राजा बलि से तीन पग भूमि मे तीनों लोक प्राप्त किए           भगवान के 24 चौबीस अवतारों की जी हो जी हो आपका मंगल हो, हम आपको नमस्कार करते है  7 🌷परशुराम =अत्याचारी क्षत्रियों का नाश किया  8 💥रघुबीर श्री राम = मर्या...

समुद्र मंथन का दिव्य घोड़ा उच्चैःश्रवा 7 सिरों वाला

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  🌊 समुद्र मंथन से उत्पन्न दिव्य अश्व – उच्चैःश्रवा 🐎 हिंदू धर्म में समुद्र मंथन एक बहुत ही पवित्र और दिव्य घटना मानी जाती है। जब देवताओं और असुरों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया, तब अनेक रत्न और दिव्य वस्तुएँ प्रकट हुईं। ✨ उन्हीं में से एक अद्भुत रत्न था उच्चैःश्रवा , एक दिव्य और अत्यंत तेजस्वी अश्व था | 🐎 उच्चैःश्रवा कौन था ? उच्चैःश्रवा एक सफेद रंग का दिव्य घोड़ा था, जो अपनी सुंदरता, तेज और दिव्यता के लिए प्रसिद्ध था। 🌸 इसे सभी घोड़ों में श्रेष्ठ माना गया है। 🌺 मान्यता है कि यह दिव्य अश्व देवराज इंद्र को प्राप्त हुआ और स्वर्गलोक की शोभा बना। ✨ रोचक तथ्य 🌟 उच्चैःश्रवा को 14 रत्नों में से एक माना जाता है 🌟 इसका रंग श्वेत (सफेद) बताया गया है 🌟 इसे अत्यंत तेजस्वी प्रधान अश्व कहा गया है 🌟 यह स्वर्गलोक की शोभा [ स्वर्ग का सबसे श्रेष्ठ घोड़ा ]माना जाता है |      📖 पौराणिक वर्णनों के अनुसार उच्चैःश्रवा को सात मुखों वाला दिव्य अश्व भी कहा गया है।       इसे प्रारम्भिक रत्नों मे गिना जाता है |       यह स्वर्ग के राजा इन्द्र का अत्य...

श्री बद्रीनाथ जी की दिव्य स्तुति 🙏🏿

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🏵️  श्री   बद्रीनाथ जी की स्तुति  🪔      पवन मंद सुगंध शीतल हेम मंदिर शोभितम                                        2        निकट गंगा बहत निर्मल श्री बद्रीनाथजी विश्वंभरम       3        शेष सुमिरन करत निशिदिन धरत ध्यान महेश्वरम       4        श्री वेद ब्रम्हा करत स्तुति श्री बद्रीनाथजी विश्वंभरम       5         शक्ति गौरी गणेश शारद नारद मुनि उच्चारणम       6         योग ध्यान अपार लीला श्री बद्रीनाथजी विश्वंभरम       7         इन्द्र चंद्र कुबेर दिनकर धूप दीप प्रकाशितम       8         सिद्ध मुनिजन करत जय जय श्री बद्रीनाथजी विश्वंभरम       9    ...

कौन हैं भगवान कृष्ण ?

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     1. कौन हैं कृष्ण ?     🏵️  कृष्ण हिंदू धर्म में भगवान विष्णु का आठवां अवतार हैं।     🏵️  वे धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए पृथ्वी पर आए।      2. जन्म स्थान  🏵️जन्मस्थान: मथुरा मे मामा कसं की जेल मे हुआ  🏵️माता-पिता: देवकी और वासुदेव है  🏵️जन्म का उद्देश्य: मामा कंस और अन्य दुष्टों से लोगों की रक्षा करना है  🏵️ धर्म की स्थापना करना       3. बाल्यकाल की लीलाएं    🏵️गोवर्धन पर्वत उठाना, पूतना का वध, कालिय नाग को हराना ,बकासुर का वध जैसी लीलाएँ करते है              🏵️   गोपियों के साथ वृंदावन में लीलाएँ करते है  🏵️जब धरती पर धर्म की हानि होने लगी तब भगवान कृष्ण ने माँ  देवकी के गर्भ से जन्म लिया ! 🏵️भगवान कृष्ण गौमाता को चराना और उनसे अत्यधिक प्रेम करते है  🏵️बांसुरी बजाते है और माखन चुराते है ,छाछ के लिए नृत्य करते है       4. कृष्ण के प्रमुख रूप 🏵️बालक कृष्ण: नटखट, चंचल और प्रे...