“राधा: भगवान कृष्ण की परम प्रिया और व्रज की पटरानी” 🌿राधा हिंदू परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण की परम प्रिये मानी जाती हैं। 🌿वे भक्ति, प्रेम और समर्पण की प्रतिमूर्ति मानी जाती हैं। 🌿उनका उल्लेख पुराणों, गोस्वामी साहित्य, सूरदास, मीराबाई आदि के भजनों में मिलता है ! 🌿 रानी रानी का जन्म बरसाना में होने का उल्लेख मिलता है। 🌿इनके पिता का नाम श्रीमान वृषभानु और माता का नाम श्रीमती कीर्ति माना जाता है। 🌿 राधा को ‘ वृषभानु-नंदिनी ’ और " व्रज की पटरानी " भी कहा जाता है। राधा–कृष्ण का संबंध 🌿राधा और कृष्ण का प्रेम आध्यात्मिक और दिव्य माना जाता है। 🌿यह प्रेम आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक समझा जाता है। 🌿दोनों का संबंध त्याग, समर्पण और निष्काम-प्रेम का आदर्श माना जाता है। भक्ति परंपरा में राधा 🌿राधा को भक्ति आंदोलन में विशेष महत्व दिया गया है 🌿वैष्णव परंपरा में उन्हें स्वरूप-शक्ति, यानी कृष्ण की आंतरिक शक्ति कहा गया है। 🌿कई संतों ने उन्हें आदर्श भक्त तथा शुद्ध प्रेम का स्वरूप बताया है। कला और साहित्य में राधा 🌿राधा भारतीय नृत्य, संगीत,...