रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण
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🌺 कौन है राधा तत्व 🌺आखिर राधा है कौन 🌺इन पंक्ति से समझिए 🌺श्रीमती राधा रानी
🌺1. राधा रानी सौन्दर्य की सरिता 🌺
राधा के रूप की छाया से, महके हर एक वन
जैसे चाँदनी उतरकर, धरती पर बिखरी हो,
राधा की मुस्कान में, कोमल सी चमकती रोशनी हो।
उनकी आँखें यमुना-सी, गहरी, शांत, अनंत,लहर
जिनमें कृष्ण की छवि बसी, जैसे प्रेम का पावन व्रत।
राधा की चाल में मृदुलता, जैसे कमल की पांखुरी,
हर कदम से खिल उठता ब्रज, होती हवाओं में मधुरता पूरी।
🌺2. * कृष्ण का प्रेम और राधा का रूप *🌺
कहते है—कृष्ण बिन राधा अधूरी, राधा बिन कृष्ण न पूर्ण,
दोनों के प्रेम की महिमा, शब्दों में कहलाना अपूर्ण
कृष्ण की बांसुरी बोले जब, राधा का मन डौल जाए,
जैसे कोई मधुर सरगम, स्वयं ब्रह्मांड को नचा जाए।
कृष्ण का नाम अधरों से, जब राधा चुपके से लेती हैं,
वृंदावन की हर गोपी कहती—प्रेम की मूर्ति यही तो हैं।
उनके गालों की कोमल आभा, जैसे उषा की लाली,
कृष्ण भी मोहित हो उठते, जब देखे राधा की रूप माधुरी
🌺3. * राधा का सौंदर्य — दिव्यता का रूप * 🌺
राधा के केश काले मेघ, हवा संग झूलते जाएँ,
उनकी छवि के आगे जैसे, स्वयं ऋतु-राज शरमाएँ।
उनके वस्त्रों की नील आभा, जैसे नीलम भोर,
जो कृष्ण के नैनों में भर दे, सौंदर्य का नव उदगार ।
राधा की हँसी में बिखरी, अमृत-सी कोमल धुन,
जिसे सुनकर गोकुल का हर हृदय हो जाए मग्न।
उनकी भौंहें धनुष समान, नयन बाण जैसे चलें,
कृष्ण मुस्काएँ देखकर—“ये रूप तो मेरा घर है,
श्री राधा रानी जहाँ मैं हर पल सजता रहूँ ।”
🌺4. * राधा-कृष्ण — प्रेम का अनंत रस *🌺
रास की रात में चाँद भी ठहर जाए राधा के रूप को देख,
कृष्ण थामें जब राधा का हाथ, खिल उठे हर दिशा और लेख।
प्रेम का ऐसा सुगंधमय सागर, जिसमें दोनों लहर बन जाते,
राधा कृष्ण नहीं, कृष्ण राधा बन जाते—दो नहीं, बस एक कहलाते।
वृंदावन आज भी गाता है, उनकी प्रेमकहानी,
जहाँ कृष्ण हैं साँवरिया, और राधा—उनकी रानी।
जहाँ प्रेम नश्वर नहीं, बल्कि आत्मा का गीत है,
जहाँ राधा ही कृष्ण हैं, और कृष्ण—राधा की प्रीत है।
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