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                                                                                                                                           श्री गणेशाय नमः                                                                 श्रीजानकीवल्लभो विजयते                                                                      ...

कृष्ण भक्त पाँच पांडव


महाभारत के पाँच पांडव युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव का दिव्य चित्रण


🙏🏿भक्त पांडव पाँच भाई 💥

जैसे शरीर मे 5 प्राण रहते है वैसे ही महाराज पांडु के 5 पुत्र हुए 

बड़ी रानी कुंती देवी के द्वारा धर्म ,वायु और इन्द्र से --युधिष्ठिर ,भीम ,अर्जुन 

छोटी रानी माद्री के द्वारा अश्विनी कुमारो के अंश से नकुल और सहदेव हुए 

🙏🏿महाराज पांडु की मृत्यु का कारण 💥

महाराज पांडु के 2 पत्नी थी - बड़ी रानी कुंती और छोटी रानी माद्री 

पर उन्हे किन्दम ऋषि ने श्राप दिया था कि यदि तुम किसी स्त्री के साथ मिलन करोगे तो तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी, 

एक दिन महाराज पांडु अपनी छोटी रानी माद्री के साथ मिलन कर रहे थे तभी उनकी मृत्यु हो गई और छोटी रानी

 माद्री भी उन्हे साथ सती हो गई !

🙏🏿पाँच पांडवों का बचपन 💥

पांचों पुत्रों का लालन पालन बड़ी रानी कुंतीदेवी ने ही किया
 
ये पांचों भाई जन्म से ही धार्मिक ,सत्यवादी और न्यायी थे 

ये क्षमावान ,सरल ,दयालु और भगवान के परम भक्त थे 

पांडवों के बचपन मे ही पिता की मृत्यु के कारण इन्हे बहुत दुख दिया गया
 
महाराज पांडु के ना रहने पर राज्य इन्हे ही मिलना चाहिए था पर इनके बालक होने के कारण पांडु के अंधे बड़े 

भाई धृतराष्ट्र राजा बने, और इनके साथ सौतेला व्यवहार करते रहे !  

🙏🏿पाँच पांडवों के अद्भुत गुण 💥

🌺 युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव - धर्म, शक्ति, कौशल, सुंदरता और ज्ञान के प्रतीक थे 

🌸 युधिष्ठिर न्याय और धर्म का पालन करते थे, भीम अपार शक्ति और वीरता के धनी थे 

🌸 अर्जुन धनुर्विद्या में निपुण और भगवान कृष्ण के भक्त थे 

🌸 नकुल तेज बुद्धि, चातुर्य और सुंदरता में अद्वितीय थे 

🌸 सहदेव ज्ञान, नीति और सतर्कता के अद्भुत धनी थे 
  
🌺 युधिष्ठिर अपने चारों छोटे भाइयों को अपने प्राणों से अधिक प्रेम करते थे 

🌸 इन पाँचों भाईयों ने वनवास और युद्ध में मिलकर धर्म की रक्षा की, और अपने साहस, भक्ति और बुद्धि से  
 
      विजय प्राप्त की 

🙏🏿 युधिष्ठिर – धर्म और न्याय के प्रतीक 💥

🌺 युधिष्ठिर पांडवों के सबसे बड़े भाई थे और धर्म, सत्य तथा न्याय के प्रतीक माने जाते थे 

🌸उनकी बुद्धि और समझ ने उन्हें हर मुश्किल में सही निर्णय लेने की शक्ति दी और उनका जीवन सदैव न्याय

     और ईमानदारी का उदाहरण रहा !

🌺पांडवों मे युधिष्ठिर साक्षात धर्मराज थे और भगवान कृष्ण के अनन्य भक्त थे !

🌺धर्मराज श्री कृष्ण चंद्र को ही अपना सर्वस्व मानते थे वे श्री कृष्ण की इच्छा के अनुसार ही चलते थे !

🙏🏿 भीम – शक्ति और साहस के राजा 💥

  🌺   भीम पांडवों के दूसरे भाई थे और उनकी शक्ति अद्वितीय थी उनमे 1000 हाथियों का बल था !

  🌺   भीमसेन श्याम सुंदर को बहुत मानते थे ,भगवान भी उनसे हास परिहास कर लेते थे ,कोई कृष्ण भगवान का 

            तनिक भी अपमान करे तो उनसे बर्दाश्त नहीं होता था !

  🌸   उन्होंने वनवास और युद्ध के समय अनेक राक्षसों और दुष्टों का वध किया और अपने भाइयों की रक्षा की !

🙏🏿 अर्जुन – धनुर्विद्या के अद्वितीय नायक 💥

 🌺 अर्जुन तीसरे भाई थे और धनुर्विद्या में श्रेष्ठता रखते थे !

 🌺 अर्जुन श्री कृष्ण के प्राण प्रिय सखा थे !

 🌺 उन्होंने वनवास में दिव्य अस्त्र प्राप्त किए और कुरुक्षेत्र के युद्ध में भगवान कृष्ण के मार्गदर्शन में अद्भुत वीरता

       दिखाई और धर्म की रक्षा की !

🙏🏿 नकुल – सुंदरता और चातुर्य के प्रतीक 💥

🌺  नकुल चौथे भाई थे और सुंदरता, तेज बुद्धि तथा तलवारबाज़ी में दक्ष थे !

🌸उन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपने कौशल और चातुर्य से पांडवों की मदद की और उनका जीवन सहजता

     और कुशलता का संदेश देता है !

🙏🏿 सहदेव – ज्ञान और योग्यता के अद्वितीय धनी 💥

🌺सहदेव पाँचवे भाई थे और ज्ञान, समझदारी और नीति में कुशल थे !

 🌸 वनवास और युद्ध के दौरान उन्होंने अपनी बुद्धि और योजना से पांडवों की सहायता की और उनका जीवन

      बुद्धिमत्ता और सतर्कता का उदाहरण है !

🙏🏿पांडवों की निष्ठा और भक्ति 💥

🌺पांडवों की भक्ति की कोई क्या प्रशंसा करेगा जिनके प्रेम के वक्ष मे होकर भगवान उनके दूत तक बनने को

     तैयार हो गए , सारथी बन गए और सब तरह से उनकी रक्षा करते रहे !

🌺भगवान मे भक्ति होना , भगवान के प्रति सम्पूर्ण आत्म समर्पण कर देना ही धर्म का लक्ष्य है यही बात और इसी

     तरह का आत्म निवेदन पांचों पांडवों मे था !

🌺इसी कारण भगवान श्याम सुंदर उन्ही के पक्ष मे थे !
 
🌺 पांडवों की विजय इसी धर्म और भक्ति के कारण हुई थी !

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