रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण

चित्र
                                                                                                                                           श्री गणेशाय नमः                                                                 श्रीजानकीवल्लभो विजयते                                                                      ...

भगवान श्रीराम और उनके चार वीर सखा और अन्य साथी

भगवान राम हनुमान जी गदा लिए, सुग्रीव, अंगद और वृद्ध जांबवंत उनके साथ खड़े हुए

भगवान श्रीराम और उनके चार वीर सखा और अन्य साथी  

भगवान राम अपने चार प्रमुख सहयोगियों हनुमान, सुग्रीव, अंगद और जांबवंत के साथ, धर्म, भक्ति और वीरता का प्रतीक हैं।

💥🪔भगवान राम और उनका सहचर वर्ग 

🌷विष्णु के सप्तवें अवतार।

🌷सीता माता की रक्षा और धर्म की स्थापना।

🌷युद्ध में मार्गदर्शक और आदर्श

🌷गुण: धर्म, साहस, करुणा, भक्ति।

छंद 

पद्म अठारह जूथपति राम काज भट भीर के |

सुभ दृष्टि बृष्टि मो पर करौ जे सहचर रघुबीर के ||

व्याख्या 

सूर्य के पुत्र वानरराज सुग्रीवजी, बालिपुत्र अंगदजी, केशरीपुत्र हनुमानजी, दधिमुखजी, द्विविदजी, मयंदजी, जिनके

 समान कोई साहसी और बलवान नहीं है - ऐसे रीछों के राजा जाम्बवानजी, श्रेष्ठ योद्धा उल्कामुखजी, सुषेणजी,

 दरीमुखजी, कुमुद, नील, नल, शरभ, गवय, गवाक्ष, पनस और महाबलवान गंधमादन आदि अठारह पद्म जो

 सेनापति है - ये सब संकट के समय भक्तों के तथा श्रीराम जी के कार्य को करने वाले महान वीर है श्री रामचंद्रजी के

 ये जो सखागण है वे हमारे ऊपर मंगल कारिणी कृपा दृष्टि की वर्षा करें !    

1 💥🪔 हनुमान जी -केशरी पुत्र 

🌷वायुदेव के पुत्र, भगवान राम के परम भक्त।

🌷सीतामाता की खोज के लिए लंका गए।

🌷लंका जलाने, संजीवनी ले जाने और युद्ध में वीरता दिखाने वाले।

🌷गुण: भक्ति, शक्ति,बल, बुद्धि, साहस।

2 💥🪔 सूर्यपुत्र- सुग्रीव

🌷वानरराज सुग्रीव जी श्री रामजी सखा और भक्त थे 

🌷श्री राम के सहयोगी।

🌷 बाली के भाई, श्रीराम को सीता की खोज में मदद की।

🌷वानर सेना के नेतृत्वकर्ता, युद्ध में रणनीति में मदद की।

🌷गुण: नेतृत्व, निष्ठा, वीरता।

3 💥🪔 अंगद -बाली पुत्र 

🌷बाली के पुत्र, सुग्रीव का भतीजा।

🌷राम और वानर सेना के बीच संदेशवाहक।

🌷रामसेतु निर्माण और युद्ध में साहसी।

🌷गुण: साहस, आज्ञाकारिता, उत्साह।

4 💥🪔जांबवंत- चिरंजीवी 

🌷वृद्ध और बुद्धिमान भालू।

🌷राम और वानर सेना के सलाहकार।

🌷हनुमानजी को उनकी शक्ति का स्मरण करवाया।

🌷गुण: बुद्धिमत्ता, धैर्य, शक्ति।

इन सब पर प्रभु श्री रामजी का इतना स्नेह था कि वे लोग जी जान से युद्ध करने पर भी इसे प्रभु की सेवा मे तुच्छ कार्य भी नहीं गिनते :

भगवान श्री रामजी के द्वारा अपनी प्रशंसा सुनकर वे कहते है --

छंद 

सुनि प्रभु बचन लाज हम मरहीं |

मसक कहूँ खगपति हित करहीं ||

युद्ध की समाप्ति पर जब भगवान ने इन्हे विदा किया तब प्रेम वश कोई जाने को तैयार नहीं हुआ, अतः प्रभु सबको  साथ लेकर प्रभु अयोध्या आए, और वहाँ 6 महीने तक सबका आतिथ्य सत्कार किया, पश्चात सबको वस्त्र आभूषण देकर विदा किया, सब लोग तो रामजी की सलोनी मूर्ति हृदय मे बसाकर चले गए, परंतु अंगदजी और हनुमानजी नहीं गए 

प्रियतम भक्त 

अंगद के विशेष प्रेम को देखकर भगवान ने उन्हे हृदय की माला, वस्त्र, मणि पहना कर और बहुत समझा बुझाकर विदा किया इतना ही नहीं भाइयों के साथ उन्हे बहुत दूर तक पहुचाने भी गए !

परम भक्त हनुमान 

श्री हनुमानजी तो भगवान के नित्य परिकर है वे सुग्रीवजी से अनुमति लेकर रामजी की चरणसेवा मे ही रह गए! 

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