रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण
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🌸 फाल्गुन शुक्ल एकादशी – आमलकी एकादशी का महत्व, कथा और व्रत विधि
हिंदू धर्म में एकादशी का दिन अत्यंत पवित्र माना गया है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत पापों का नाश करने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है।
इस एकादशी को “आमलकी” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन आंवला (आमलकी) वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है।
आंवला को धर्मशास्त्रों में पवित्र और भगवान विष्णु का प्रिय माना गया है।
इस दिन आंवला वृक्ष के नीचे पूजन, दीपदान और कथा श्रवण करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
प्राचीन समय में वैदेश नामक नगर में चैत्ररथ नाम का एक धर्मात्मा राजा राज्य करता था। उसके राज्य में सभी लोग श्रद्धापूर्वक एकादशी का व्रत करते थे।
फाल्गुन शुक्ल एकादशी के दिन समस्त नगरवासी आंवला वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु की पूजा और रात्रि जागरण कर रहे थे। उसी समय एक शिकारी, जो भूखा-प्यासा था, वहाँ आकर बैठ गया।
उसने व्रत तो नहीं रखा था, परंतु वह भी पूरी रात वहीं बैठा रहा और अनजाने में जागरण हो गया। अगले जन्म में उसी शिकारी को एक धर्मात्मा राजा के रूप में जन्म मिला।
इस प्रकार, इस कथा से स्पष्ट होता है कि अनजाने में भी की गई एकादशी की महिमा महान फल देती है।
(यह कथा विभिन्न पुराणों में वर्णित आमलकी एकादशी महात्म्य पर आधारित है।)
प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें।
स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप प्रज्वलित करें।
आंवला वृक्ष की पूजा करें (यदि संभव हो)।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
फलाहार या निर्जल व्रत रखें (शक्ति अनुसार)।
द्वादशी तिथि में पारण करें।
शास्त्रों में एकादशी के दिन दान को अत्यंत पुण्यदायक बताया गया है। व्रत के साथ यदि दान किया जाए तो उसका फल कई गुना बढ़ जाता है।
इस दिन अन्न दान (द्वादशी तिथि में), वस्त्र दान, आंवला फल का दान, दक्षिणा सहित ब्राह्मण भोजन तथा जरूरतमंदों को फल या भोजन देना शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान पापों का क्षय करता है और भगवान विष्णु की कृपा प्रदान करता है।
दान सदैव शुद्ध भाव से करना चाहिए, दिखावे या अहंकार से किया गया दान पूर्ण फलदायक नहीं माना जाता।
फाल्गुन शुक्ल एकादशी अर्थात आमलकी एकादशी आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर है। श्रद्धा, संयम और भक्ति भाव से किया गया व्रत जीवन में शांति, समृद्धि और पुण्य प्रदान करता है।
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