रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण

चित्र
                                                                                                                                           श्री गणेशाय नमः                                                                 श्रीजानकीवल्लभो विजयते                                                                      ...

चित्तौड़ की रानी झालीबाई और संत भक्ति का अद्भुत चमत्कार

चित्तौड़गढ़ की झालीरानी संतों के चरणों में श्रद्धा भाव से नतमस्तक

🌸 झालीरानी चित्तौड़गढ़ की सच्ची श्रद्धा 🌸

🪔 संतों के प्रति विशेष निष्ठा

झालीरानी चित्तौड़गढ़ की रानी और श्री रैदास जी की शिष्या थी !

संतों मे इनकी विशेष निष्ठा थी !

एक बार इनके के निकट संतों की मंडली आई !

जमात मे इनके एक गुरूभाई भी आए हुए थे !

इनके मन मे दर्शनों की बहुत अभिलाषा थी !

परंतु राजा ने इन्हे दर्शन के जाने के लिए आज्ञा नहीं दी !

उलटे द्वार पर कड़ा पहरा लगा दिया जिससे रानी महल से बाहर ना जाने पाए !

और कोई भी साधु संत महल के अंदर आना जाना नही कर सके !

और यदि कोई आया या गया तो पहरेदार को सूली पर चढ़ा दिया जाएगा

राजा के इस हुक्म से सभी पहरेदार अत्यंत चौकन्ने होकर पहरा दे रहे थे !

🌼 अटूट भक्ति और संत दर्शन

इधर रानी के मन मे दर्शनों की लालसा गहरी थी !

रानी संतों के चरणों का स्मरण करती हुई दर्शनों के लिए महल से अकेली ही निकल पड़ी !

भगवान की महिमा से और संतों की कृपा से कोई भी पहरेदार रानी को जाते हुए देख नही पाया !

रानी ने बड़े सुख पूर्वक संतों का दर्शन किया भोग भंडारा किया उनका सम्मान किया !

✨ भक्ति की पराकाष्ठा का चमत्कार

इधर जब राजा को पता चला कि रानी तो महल मे नहीं है तो उन्हे पहरेदारों पर अत्यधिक गुस्सा आया और अपने

 आदेश का पालन ना करने पर पहरेदारों को फटकार लगाई !

राजा ने कहा अब तक जो हुआ हो गया पर अब रानी महल मे प्रवेश ना कर पाए ध्यान रखना वरना सबको दंड

 दिया जाएगा !

पहरेदारों को सजग करके राजा स्वयं भी पहरा देने लगे !

पर ये क्या रानी तो जैसे गई थी वैसे ही महल मे वापिस भी आ चुकी पर किसी को कुछ पता ही नहीं चला !

जब राजा को रानी के महल मे होने की बात पता चली तो राजा सन्न रह गया तब राजा की आँखें खुल गई !

राजा बोला यह तो साक्षात भक्ति की पराकाष्ठा है चमत्कार है !

तब से राजा स्वयं भी रानी के साथ भगवत और साधु संतों की सेवा मे जुट गया !

तब से राजा की श्रद्धा रानी मे बढ़ गई , ये होती है सच्ची श्रद्धा !

🌷 सीख

सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती।

जो भक्त मन, वचन और कर्म से भक्ति में स्थिर रहता है, उसके लिए स्वयं भगवान मार्ग बना देते हैं।

भक्ति में दृढ़ता हो तो चमत्कार अवश्य होता है।


ये ब्लॉग बहुत प्रेम और भक्ति भाव से लिखी गई है कृपा हमे फॉलो करें 🙏🏿

https://dharamkibate.blogspot.com


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Who Are the Dikpal? 10 Guardians of Directions in Hindu Mythology Explained

दश दिग्पाल कौन हैं? 10 दिशाओं के रक्षक देवताओं की पूरी जानकारी

सच्ची मित्रता की कथा