रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण
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🪔भगवान श्री कृष्ण के षोडश सखा 🙏🏿
🪔 भगवान श्री कृष्ण के षोडश सखा 🙏🏿
🪔 भगवान श्री कृष्ण के सोलह सखा
🪷 ब्रज भूमि प्रेम का दिव्य धाम है। वहाँ निवास करने वाले सभी लोग अपने पूर्वजन्म में अनेक प्रकार के जप, तप,
भजन और ध्यान करके भगवान के समीप रहने का अधिकार प्राप्त कर चुके हैं।
💥 यह इनकी पूर्वजन्म की भक्ति का ही फल है।
🪔 ब्रज के गोप, गोपियाँ, गोप कुमार, गायें, वन के पशु-पक्षी—सभी अतुलनीय प्रेम के विग्रह हुए हैं।
💥 ब्रजमंडल के राजा नन्दजी के पुत्र श्री कृष्ण के साथ ये सभी सखा घर में और वन में, हर समय उनकी सेवा में
रहते हैं।
🙏🏿 श्लोक
रक्तक पत्रक और पत्रि सबही मन भावै |
मधुकंठो मधुबर्त रसाल बिसाल सुहावै ||
प्रेमकंद मकरंद सदा-आनंद चंद्रहासा |
पयद बकुल रसदान सारदा बुद्धिप्रकासा ||
सेवा समय बिचारि कै चारु चतुर चित की लहैं |
ब्रजराज सुवन सँग सदन बन अनुग सदा तत्पर रहैं ||
1 रक्तक
2 पत्रक
3 और पत्री
1 मधुकंठ
2 मधुवर्त
3 रसाल
4 विशाल
5 प्रेमकंद
6 मकरंद
7 सदानंद
8 चंद्रहास
9 पयद
10 बकुल
11 रसदान
12 शारदा
13 बुद्धि प्रकाश
🌹 भगवान कृष्ण के ये सभी सखा सुंदर, सुशील और परम चतुर हैं। ये भगवान की इच्छा के अनुसार सेवा में रहते
हैं। जब जो सेवा होती है, उसका विचार करके ही उसे करते हैं।
👌🏿 ये सोलहों सखा भगवान को अत्यंत प्रिय हैं। ये सभी सखा भगवान के मन के अनुसार कार्य करते हैं।
🙏🏿 इन सभी सखाओं ने अपने आप को पूर्ण रूप से भगवान को सौंप रखा है।
🌷 ये सभी सखा भगवान को पूर्णतया समर्पित है !
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