रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण
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नवरात्रि के आठवें दिन माँ दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की जाती है। “महागौरी” नाम का अर्थ है अत्यंत उज्ज्वल और श्वेत वर्ण वाली देवी। उनका यह स्वरूप पवित्रता, शांति और तपस्या का प्रतीक माना जाता है।
🌸 पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। लंबे समय तक तप करने के कारण उनका शरीर काला हो गया था। बाद में भगवान शिव ने गंगा के पवित्र जल से उनका अभिषेक किया, जिससे उनका शरीर अत्यंत उज्ज्वल और गौर वर्ण का हो गया। तभी से उनका नाम महागौरी पड़ा।
माँ महागौरी का स्वरूप अत्यंत शांत और दिव्य माना जाता है। उनका वर्ण अत्यंत गोरा और तेजस्वी बताया गया है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं और उनका वाहन वृषभ (बैल) माना जाता है।
उनके चार हाथ होते हैं। एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे हाथ में डमरू होता है, जबकि अन्य दो हाथ अभय और वरद मुद्रा में होते हैं।
माँ महागौरी की उपासना से भक्तों के पाप और कष्ट दूर होते हैं। उनकी कृपा से जीवन में शांति, पवित्रता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से उनकी पूजा करते हैं, उनके जीवन की कठिनाइयाँ दूर हो जाती हैं और मन की शुद्धि होती है।
ॐ देवी महागौर्यै नमः।
इस मंत्र का श्रद्धा और भक्ति से जप करने पर माँ महागौरी की कृपा प्राप्त होती है और भक्त को सुख-समृद्धि मिलती है।
🌸 नवदुर्गा के नौ रूप
नवदुर्गा के नौ स्वरूप हैं — शैलपुत्री
💥ब्रह्मचारिणी
💥 चंद्रघंटा
💥कूष्मांडा
💥स्कंदमाता
💥 कात्यायनी
💥 कालरात्रि
💥महागौरी
💥सिद्धिदात्री।
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