रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण
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हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार सप्त चिरंजीवी वे सात महान आत्माएं हैं जिन्हें ईश्वर की कृपा से अमरत्व का वरदान प्राप्त है। मान्यता है कि ये सभी महापुरुष कलियुग के अंत तक पृथ्वी पर विद्यमान रहेंगे और समय-समय पर धर्म की रक्षा करते रहेंगे।
अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः।
कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविनः॥
इस श्लोक के अनुसार अश्वत्थामा, राजा बलि, वेदव्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम — ये सातों चिरंजीवी हैं।
अश्वत्थामा महाभारत के एक प्रमुख योद्धा थे और द्रोणाचार्य के पुत्र थे। उन्होंने ब्रह्मास्त्र का दुरुपयोग किया, जिसके कारण भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें शाप दिया। उनका दिव्य मणि छीन लिया गया और उन्हें यह दंड मिला कि वे अमर रहकर भी असीम पीड़ा सहेंगे। मान्यता है कि वे आज भी पृथ्वी पर भटक रहे हैं।
राजा बलि अपनी दानशीलता के लिए प्रसिद्ध थे। वामन अवतार की कथा में उन्होंने तीनों लोक भगवान विष्णु को दान कर दिए। इसके बाद भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया और यह वरदान दिया कि वे हर वर्ष ओणम पर्व पर पृथ्वी पर आ सकेंगे।
महर्षि वेदव्यास ने वेदों का विभाजन किया और महाभारत तथा अनेक पुराणों की रचना की। वे ज्ञान और धर्म के आधार स्तंभ माने जाते हैं। मान्यता है कि वे आज भी बदरिकाश्रम में तपस्या कर रहे हैं।
हनुमान जी भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं। उन्हें अष्ट सिद्धि और नव निधि के दाता माना जाता है। उन्हें यह वरदान प्राप्त है कि जब तक इस संसार में रामकथा का वाचन होगा, तब तक वे जीवित रहेंगे। जहाँ-जहाँ राम नाम लिया जाता है, वहाँ उनकी उपस्थिति मानी जाती है।
विभीषण रावण के छोटे भाई थे, लेकिन उन्होंने सदैव धर्म का साथ दिया। रामायण युद्ध के बाद भगवान श्रीराम ने उन्हें लंका का राजा बनाया। वे न्याय, नीति और सत्य के प्रतीक माने जाते हैं।
कृपाचार्य महाभारत काल के महान गुरु थे और अश्वत्थामा के मामा थे। वे कुरु वंश के राजगुरु रहे और महाभारत युद्ध के बाद भी जीवित रहे।
परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं। उन्होंने क्षत्रियों के अहंकार का नाश किया और भगवान शिव के परम भक्त माने जाते हैं। मान्यता है कि वे आज भी महेंद्र पर्वत पर तपस्या कर रहे हैं।
सप्त चिरंजीवी धर्म की रक्षा करते हैं और मानवता को सही मार्ग दिखाते हैं। वे इस बात का प्रतीक हैं कि कलियुग में भी ईश्वरीय शक्ति और धर्म जीवित हैं।
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