रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण
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2 निकट गंगा बहत निर्मल श्री बद्रीनाथजी विश्वंभरम
3 शेष सुमिरन करत निशिदिन धरत ध्यान महेश्वरम
4 श्री वेद ब्रम्हा करत स्तुति श्री बद्रीनाथजी विश्वंभरम
5 शक्ति गौरी गणेश शारद नारद मुनि उच्चारणम
6 योग ध्यान अपार लीला श्री बद्रीनाथजी विश्वंभरम
7 इन्द्र चंद्र कुबेर दिनकर धूप दीप प्रकाशितम
8 सिद्ध मुनिजन करत जय जय श्री बद्रीनाथजी विश्वंभरम
9 यक्ष किन्नर करत कोतुक ज्ञान गंधर्व प्रकाशितम
10 श्री लक्ष्मी कमला चँवर डोले श्री बद्रीनाथजी विश्वंभरम
11 कैलाश मे एक देव निरंजन शैल शिखर महेश्वरम
12 राजा युधिष्ठिर करत स्तुति श्री बद्रीनाथजी विश्वंभरम
13 श्री बद्रीनाथ जी की करत स्तुति होत पाप विनाशनम
14 कोटि तीर्थ भयो पुण्य प्राप्त यह फल दायकम
🪔 बद्रीनाथजी श्लोक 🌻
प्रात: स्मरण विष्णु भगवान का श्लोक ~
* प्रात: स्मरामि भवभीतिमहार्ति नाशं
* नारायणं गरुड़ वाहन मब्जनाभम |
* ग्रहाभिभूत वर वारण मुक्ति हेतूं
* चक्रा युधम तरुण वारिज पत्र नेत्रम ||
श्लोक की व्याख्या दी गई है, जिससे पाठकों को कोई परेशानी न हो:-
🌺 संसार के भय रूपी महान दुख: को नष्ट करने वाले ,ग्राह से गजराज को मुक्त करने 🌻
वाले ,चक्रधारी एवं नवीन कमलदल के समान नेत्र वाले ,पद्मनाभ गरुड़ वाहन भगवान
"श्री नारायण " का मै प्रात: काल स्मरण करता हूँ !
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