🌿||1|| श्रित कमला कुच मण्डल धृत कुंडल ए
कलित ललित वनमाल जय जय देव हरे
🙏🏿 हे भगवान आपके हृदय पर कमल की शोभा ,कानों मे अनमोल कुंडल और
वन के सुंदर फूलों की माला सुशोभित है ! हे देव आपकी महिमा की जय हो जय हो !
🌿|| 2 || दिन मणि मण्डल मंडन भव खंडन ए
मुनिजन मानस हंस जय जय देव हरे
नाश करते है और वैरागी जनों, साधु संतों को असीम शांति प्रदान करते है !
हे देव आपकी जय हो जय हो !
🌿||3|| कालिय विष धर गंजन जन रंजन ए
यदुकुल नलिन दिनेश जय जय हरे
🙏🏿 हे भगवान आपने कालिया नाग का वध किया और आप सभी जीवों के प्रिय बने रहते है
आप यदु वंश के सूर्य के समान महिमा के अधिकारी है ! हे देव आपकी जय हो जय हो !
🌿|| 4 || मधु मुर नरक विनाशन गरुड़ा सन ए
सुर कुल केलि निदान जय जय देव हरे
🙏🏿 हे प्रभु आपने मधु मुरा नरकासुर जैसे राक्षसों का संहार किया
भगवान आप
देवो के आनंद का कारण है और गरुड़ पर विराजमान होकर देव लोक की रक्षा करते है !
हे देव आपकी जय हो जय हो !
🌿|| 5 || अमल कमल दल लोचन भव मोचन ए
त्रिभु वन भवन निधान जय जय देव हरे
🙏🏿 हे भगवान आपकी आँखें कमल जैसी निर्मल है आप संसार के बंधनों को मिटाने
वाले और तीन लोको के पालनहार है ! हे देव आपकी जय हो जय हो !
🌿|| 6 || जनक सुता कृत भूषण जित दूषण ए
समर शमित दश कंठ जय जय देव हरे
🙏🏿 हे भगवान आप जनकसुता के रूप मे जगत के नयनाभिराम भूषण है
और आपने दशानन रावण जैसे बड़े दुष्ट का नाश किया है ! हे देव आपकी जय हो जय हो !
🌿|| 7 || अभिनव जल धर सुंदर धृत मंदर ए
श्री मुख चंद्र चकोर जय जय देव हरे
🙏🏿 प्रभु आपने गोवर्धन पर्वत को धारण किया और आपका रंग नवीन बादल सा सुंदर
है राधा आपकी कृपा मे चकोर की भांति आकर्षित है ! हे देव आपकी जय हो जय हो
🌿|| 8 || तव चरणे प्र ण ता वयं इति भावये ए
कुरु कुशलं प्रण तेषु जय जय देव हरे
🙏🏿 हे प्रभु हम आपके चरणों मे नमन करते है हम पर कृपा करो और
सभी भक्त सुरक्षित रहें ! हे देव आपकी जय हो जय हो !
🌿|| 9 || श्री जय देव कवेर इदं कुरुते मुदम
मङ्गल मंजुल गीतं जय जय देव हरे
🙏🏿 हे भगवान कवि जयदेव यह मङ्गल गीत आपके लिए प्रस्तुत कर रहे है !
हे देव आपकी जय हो जय हो !
🌿||10 || राधे कृष्णा हरे गोविंद
राधे कृष्णा हरे गोविंद।। जय जय देव हरे
🙏🏿 अंत मे राधा कृष्ण नाम संकीर्तन
जय जय देव हरे
और जानने के लिए हमारे ब्लॉग पर आयें
= भगवान जगन्नाथजी को यह गीत इतना अधिक प्रिय है की इसे सुनते ही
भगवान स्वयं को रोक नहीं पाते नाचने लगते है !
** मङ्गल गीतं सम्पूर्ण { गीत गोविंद }जय देव जी द्वारा रचित **
Bahut sunder
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