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महाशिवरात्रि व्रतविधि और शिवरात्रि कथा 2026



महाशिवरात्रि पर भक्त शिवलिंग पर बेलपत्र ,दूध और जल से अभिषेक करते हुए

☘️चतुर्दशी के स्वामी भगवान शिव है 🪔

शिवरात्रि के स्वामी भगवान शिवजी है अर्थात उनकी रात्री मे किया जाने वाला व्रत का नाम शिवरात्रि हो जाता है 

 शिवलिंगतयोद्भूत: कोटिसूर्यसमप्रभ: 

ईशान संहिता के अनुसार इस दिन इस दिन ज्योतिर्लिंग का प्रादुर्भाव हुआ था इसलिए इसे महाशिव रात्री कहते है 

☘️श्लोक  

शिवरात्रिव्रतं नाम सर्वपापप्रणाशनं |

आचांडालमनुष्याणां भुक्तिमुक्तिप्रदायकम ||   

☘️व्रत विधि 

व्रती को चाहिए प्रातः काल स्नान करके भाल पर भस्म का त्रिपुण्ड का तिलक लगाए कंठ मे रुद्राक्ष की माला पहने मंदिर जाकर विधि विधान से पूजनअर्चन करे 

दिन भर मौन रहे शाम को फिर से स्नान करके मंदिर जाए विधि विधान से पूजन करे   

☘️व्रत सामग्री 

रोली मोली चावल पान सुपारी लौंग इलाईची चंदन धूप दीप जनेऊ दूध दही चीनी शहद फल फूल कमल गट्टा धतूरा बेलपत्र प्रसाद दक्षिणा   

☘️शिवरात्रि व्रत कथा 

शिवरात्रि व्रत की दो कथाएं है 

🪔पहली कथा

एक बार एक धनवान मनुष्य कुसंगवश शिवरात्रि के दिन पूजन करती हुई स्त्री का आभूषण चुरा लेने के अपराध मे मार डाला गया ,किन्तु चोरी का मौका पाने के लिए वह आठ पहर तक भूखा -प्यासा और जागता रहा था !

इस कारण स्वतः व्रत हो जाने से शिवजी ने उसको सद्गति प्रदान की थी !  

🪔दूसरी कथा 

एक बार शिवरात्रि के दिन एक शिकारी दिन भर शिकार की खोज मे रहा पर उसे शिकार नही मिला अंत मे वह गूँथे हुए एक झाड़ की ओट मे बैठ गया उस झाड़ के अंदर स्वयंभू शिवजी की एक मूर्ति और एक विल्व वृक्ष था 

उसी समय एक हिरणी पर शिकारी की दृष्टि पड़ी 

उसने अपने सामने पड़ने वाले विल्व पत्रों को तोड़कर शिवजी पर गिर दिया और धनुष लेकर बाण छोड़ने लगा 

तब हिरणी उसको उपदेश देकर जीवित चली गई

इसी प्रकार वह प्रत्येक पहर मे आई और चली गई 

परिणाम यह हुआ कि उस  अनायास किए हुए उस व्रत से ही शिवजी ने उस शिकारी को सद्गति दे दी और भव सागर से मुक्त किया 

हो सके तो शिवरात्रि का व्रत हमेशा करना चाहिए 

हो सके तो 14 वर्ष तक करे उसके बाद उद्यापन कर देना चाहिए 

🙏🏿उद्यापन विधि 

उद्यापन के लिए चावल मूंग उड़द लिंगतोभद्र मंडल बनाकर उसके बीच मे दो कलश स्थापित करे और चारों कोनों

 मे तीन तीन कलश स्थापित करे उसके बाद तांबे के नादिये पर विराजे हुए स्वर्ण के शिवजी की मूर्ति और चांदी की

 पार्वती मैया को बीच के दोनो कलशों पर विराजित करे 

षोडशोपचार पूजन और हवन आदि करे 

अंत मे गोदान शैया दान ब्राम्हनों को भोजन कराए स्वयं भोजन करे व्रत को समाप्त करे   

शिवजी के व्रत मे कठिनाई तो इतनी है की इसे वेद पाठी ब्राम्हण ही करवा सकते है 

सरलता भी इतनी है की इसे धनी निर्धन सभी अपनी अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते है 

अपनी सामर्थ्य के अनुसार गाजर मुली बेर लेकर भी कोई मजदूर भी इसे सम्पन्न कर सकता है 

दयालु शिवजी छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी सभी पूजाओ से प्रसन्न हो जाते है  

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