रामचरितमानस बालकाण्ड मंगलाचरण
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🌼 धन्ना जाट का सरल जीवन 🌼
💐🙏🏿 धन्ना जिनके खेत में बिना बीज के खेती लहलहाती है 🙏🏿 सरल, सच्चे भक्त!
💐🙏🏿 घर पर वैष्णवों के आने पर बोने के लिए रखा हुआ बीज का गेहूं उन्होंने खिला दिया और माता-पिता के डर
से खेत में खाली हल चला दिए। परंतु संत सेवा के प्रताप से बिना बोए भी खेत में गेहूं की फसल इतनी बढ़िया
हुई कि पड़ोस के किसान पूछने लगे कि कौन सी किस्म का बीज बोए और बढ़ाई करने लगे!
💐🙏🏿 भक्त धन्ना जाट राजस्थान के एक छोटे से गाँव के साधारण किसान थे।
💐🙏🏿 वे अनपढ़ थे, गरीब थे, पर उनका हृदय अत्यंत निर्मल था।
💐🙏🏿 खेती करना, गौमाता की सेवा करना और सच्चे मन से भगवान को याद करना यही उनका जीवन था।
🌸 संत त्रिलोचन जी का आगमन 🌸
💐 एक बार वैष्णव ब्राह्मण त्रिलोचन जी धन्ना के घर आए।
💐 धन्ना के घरवालों ने उन्हें आदरपूर्वक अपने घर ठहराया और सेवा की।
💐 वे ठाकुर जी की सेवा बड़ी सुंदर विधि से करते थे! सेवा के समय बालक धन्ना भी वहाँ आ गया।
💐 धन्ना ने देखा कि संत त्रिलोचन जी प्रतिदिन शालिग्राम जी की पूजा करते हैं और भोग लगाते हैं।
🌼 धन्ना जी का भोला आग्रह 🌼
💐🌹 धन्ना ने मासूमियत से कहा:
💐🌹 “महाराज, मुझे भी एक ठाकुर जी की सेवा दीजिए, मेरी भी ठाकुर में बड़ी प्रीति है!” पंडित जी ने एक गोल
पत्थर देकर कहा: “खूब प्रेम से सेवा करना।”
🌼 धन्ना की निष्कपट भक्ति 🌼
💐🌷 धन्ना उस पत्थर को सचमुच भगवान मान बैठा।
💐 उन्होंने उस पत्थर को ही ठाकुर जी समझकर हृदय से लगा लिया और उनकी खूब प्रेम से सेवा करने लगे।
💐 वह रोज उसे नहलाते, अपने हिस्से का भोजन उसे खिलाते, खेत में काम करते समय भी साथ रखते।
💐 एक दिन धन्ना भगवान के आगे रोटी रखकर पर्दा करके आँखें बंद कर लिया। थोड़ी देर बाद पर्दा खोलकर
देखा कि भगवान ने रोटी का एक भी टुकड़ा नहीं खाया। धन्ना को बड़ा भय हुआ!
💐 बार-बार भगवान के चरणों में गिरकर अनुनय-विनय करने लगा। इतने पर भी भगवान नहीं पाए, तो वे जिद पर
अड़ गए:
💐 “आप नहीं खाएंगे तो मैं भी नहीं खाऊँगा।”
💐 फिर भी नहीं पाए तो भूखे रह गए! धन्ना जी के हृदय का भाव सच्चा था।
💐 अगर भोग स्वीकार न हो तो वह रूठ जाते और कहते:
💐 “ठाकुर जी, जब खाओगे तभी मैं खाऊँगा।”
🌸 भगवान का प्रकट होना 🌸
💐 अतः भगवान ने उनके द्वारा अर्पित रोटी पाईं, रोटियाँ बहुत ही स्वादिष्ट लगीं।
💐 धन्ना की सच्ची और बाल-सुलभ भक्ति देखकर भगवान विष्णु स्वयं प्रकट हुए।
💐 वे उस पत्थर से साक्षात ठाकुर जी बनकर धन्ना के सामने आए और उसका भोग प्रतिदिन स्वीकार करने लगे।
💐🏵️ धन्ना जी जंगल में गाय चराने जाते थे। उनके पास लस्सी होती थी, इसे भगवान को भोग लगाते और भगवान
पाके छोड़ देते। बाकी बचा हुआ धन्ना पाते। भक्ति की रीति बड़ी न्यारी थी!
🌼 भक्ति का चमत्कार 🌼
💐 भगवान प्रतिदिन धन्ना जी की गाय स्वयं चराया करते थे। धीरे-धीरे धन्ना के जीवन में परिवर्तन होने लगा।
💐 उनके खेत लहलहाने लगे, घर में अन्न की कमी नहीं रही, गायें स्वस्थ रहने लगीं।
💐 भगवान की कृपा से धन्ना गरीब किसान से धन्ना सेठ कहलाने लगे।
🌸 संत त्रिलोचन जी का पुनः आगमन और पश्चाताप 🌸
💐 एक वर्ष बाद फिर से त्रिलोचन जी धन्ना के यहाँ पधारे, परंतु कोई पूजा रीति नहीं देखकर पूछने लगे।
💐 धन्ना ने कहा कि ठाकुर जी तो गाय चराने गए हैं। पंडित जी को विश्वास नहीं हुआ।
💐 पूजा करते जीवन बीत गया, कभी भगवान के दर्शन नहीं हुए।
💐 फिर पंडित जी की प्रार्थना करने पर धन्ना ने उन्हें भगवान का दर्शन कराया।
💐 जब संत त्रिलोचन जी को पता चला कि जिस पत्थर को उन्होंने साधारण समझा था, उसी में भगवान प्रकट हो
गए, तो वे धन्ना के चरणों में गिर पड़े।
🌼 कथा का दिव्य संदेश 🌼
💐 यह कथा हमें सिखाती है कि भगवान को ज्ञान, धन या दिखावा नहीं चाहिए।
💐 भगवान को केवल निष्कपट भक्ति और सच्चा भाव चाहिए।
🌼 नमन है भक्त धन्ना जाट को 🌼
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