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फाल्गुनी शुक्ल पूर्णिमा के सभी व्रत और उनकी विधि

फाल्गुनी शुक्ल पूर्णिमा व्रत पूजा और होलीका दहन का धार्मिक चित्र


फाल्गुनी शुक्ल पूर्णिमा के सब ही व्रतों का सार 

🙏🏿[1 ] फाल्गुनी पूर्णिमा 

यह पूर्व विध्या ली जाती है इस दिन सायकाल के समय भगवान को हिंडोले मे बिठाकर हिंडोले को हिलाए उनके लाड़ लड़ाए एक समय भोजन करें |

🪔[2 ] व्रतद्वयी पूर्णिमा [फाल्गुन पूर्णिमा ]

फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को कश्यप ऋषि के औरस और अदिति के गर्भ से आर्यमा [आदित्य ] और अनुसूया के गर्भ से चंद्रमा उत्पन्न हुए थे 
अतः सूर्योदय के समय आदित्य का और चंद्रोदय के समय चंद्रमा का विधि पूर्वक पूजन करके गायन ,वादन नृत्य से जागरण करें | इस दिन एक बार भोजन करें |

💥[3] फाल्गुनी [पूर्वाफाल्गुनी] पूर्णिमा 

यदि फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र हो तो बिस्तर ,रजाई ,चादर ,तकिया आदि से युक्त सुपुजित शय्या किसी विद्वान ब्राम्हण को दान करें 
इससे आज्ञा मे रहने वाली सुंदर स्त्री [पत्नी ]प्राप्त होती है ,यदि यह दान स्त्री करें तो उसको धन ,विद्या और सम्मान युक्त सुंदर पति प्राप्त होता है !
🙏🏿[4] अशोक व्रत [फाल्गुनी पूर्णिमा ]

 फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को मिट्टी के साथ स्नान करे मिट्टी माथे पर लगाए मिट्टी खाये उसके बाद भूमि पर बेदी बनाकर भूधर नाम के देवता की पूजा करें "भूधराये नमः " इस मंत्र से प्रार्थना करें 
इस व्रत के करने से सब निर्मूल नष्ट हो जाते है और दस पीढ़ियों तक सब सुखी रहते है 
💥[5 ] लक्ष्मी नारायण व्रत [फाल्गुन पूर्णिमा ]

फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को प्रातः काल से सायकाल तक सब ही धूर्त ,पाखंडी ,मूर्ख ,पापी ,कपटी व्यभिचारी ,पराए धन का अपहरण करने वाले , दुर्व्यसनी ,मिथ्याभाषी ,अभक्त और विद्वेषी मनुष्यों से दूर रहें और मन मे भगवान का स्मरण करें और उनका प्रीति पूर्वक प्रातः कालीन पूजन करके व्रत रखें फिर सायकाल मे चंद्रोदय होने पर उसके बिम्ब पे लक्ष्मी नारायण का चिंतन करके पूजन करें 
🪔श्लोक 
 श्री निशा चंद्र रूपस्तं वासुदेव जगतपते |
मनोभिलषितं देव पुरयस्व नमो नमः ||  

इस मंत्र से अर्ध्य दें और रात्री मे तेलवर्जित एक बार भोजन करें  
गर्ग संहिता के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत नैमीशरण्य मे करने का विधान बतलाया जाता है |

🙏🏿[6] होलीका दहन [फाल्गुन पूर्णिमा]

यह फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को होता है इसका मुख्य संबंध होलीका दहन से है होलीका व्रत वाले लोग होलीका की ज्वाला देख कर ही भोजन करते है होलीका के दहन  मे प्रदोष व्यापीनी पूर्णिमा ली जाति है यदि वह दो दिन प्रदोष व्यापीनी हो तो दूसरी लेनी चाहिए |

इस प्रकार फाल्गुन पूर्णिमा के व्रत विभिन्न प्रकार से किए जाते है मन की अभिलाषा के अनुसार व्रत करने की परंपरा है लेकिन कुछ ही व्रत प्राय: चर्चा मे आते है |

🪔 होलीका दहन की कथा:

बहुत समय पहले, हिरण्यकश्यप नामक एक अहंकारी राजा था। उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। हिरण्यकश्यप ने कई बार प्रह्लाद को मारने की कोशिश की, लेकिन हर बार भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे।
हिरण्यकश्यप की बहन होलीका को आग में नहीं जलने का वरदान था। राजा ने सोचा कि प्रह्लाद को मारने के लिए होलीका का उपयोग किया जाए। होलीका [ प्रह्लाद की बुआ ] प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गई जिससे उसे खतम किया जा सके! लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलीका स्वयं जलकर भस्म हो गई।
यही कारण है कि होलीका दहन का पर्व मनाया जाता है। यह हमें सिखाता है कि भक्ति और धर्म की शक्ति सबसे बड़ी होती है, और बुराई पर अच्छाई की हमेशा जीत होती है।

इस प्रकार फाल्गुन पूर्णिमा के व्रत और होलीका दहन विभिन्न प्रकार से मनाए जाते हैं। मन की अभिलाषा के अनुसार व्रत करने की परंपरा है, लेकिन कुछ ही व्रत प्राय: चर्चा में आते हैं।

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