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                                                                                                                                           श्री गणेशाय नमः                                                                 श्रीजानकीवल्लभो विजयते                                                                      ...

बसोड़ा / शीतला अष्टमी व्रत विधि और कथा 2026

शीतला माता की पूजा करते भक्त, बसोड़ा या शीतला अष्टमी व्रत विधि और ठंडे भोजन के भोग की परंपरा

🌼 शीतला अष्टमी व्रत विधि

🌿 व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें |

❌ और घर की साफ-सफाई भूलकर भी ना करें क्योंकि बसोड़ा का मतलब ही बासी होता है |

      इस दिन [ बासी घर ] रखना होता है शीतला माता के हाथ मे झाड़ू होती है | 

      सुबह जल्दी उठकर ही पूजन करें सूरज निकलने से पहले ही क्योंकि सूरज निकलेगा तो गर्मी होगी तब शीतला        माता [बसोड़ा ] की पूजा नहीं की जाती |

🛕 इसके बाद शीतला माता की प्रतिमा या चित्र के सामने पूजा की तैयारी करें।

🍚 शीतला माता को ठंडा (बासी) भोजन जैसे मेवे, मिठाई,पुआ,पूरी ,तरकारी, दाल,भात,लपसी,दही, पूड़ी, हलवा,        मीठा चावल और रोटी आदि कच्चे -पक्के सभी शीतल पदार्थ का भोग लगाएँ।

       इस दिन घर मे चूल्हा ,गैस आदि ना जलाएं |

🙏 माता को जल, फूल, अक्षत और रोली अर्पित करें तथा श्रद्धा से उनकी पूजा करें। शीतला माता का स्तोत्र -पाठ          करके रात्री को जागरण करें 

📖 पूजा के बाद शीतला माता की कथा सुनें या पढ़ें।

🍛 पूजा के बाद परिवार के साथ वही ठंडा प्रसाद ग्रहण करें।

🪔 शीतला माता की पूजा मे भूलकर भी दीपक ना जलाएं ❌

🌸 बसोड़ा / शीतला अष्टमी की परंपरा 🌸

📜 इस कथा से ही यह परंपरा बनी कि:

     पूरे भारत वर्ष मे केवल चैत्र कृष्ण अष्टमी को ही शीतला अष्टमी का व्रत किया जाता है |

      इसमे पूर्व विद्धा अष्टमी ली जाती है |

      स्कन्द पुराण मे इसके 4 व्रत बताए गए है 

श्लोक 

मम गेहे शीतलारोगजनितोपद्रवप्रशमनपूर्वकायुरारोग्यैश्वर्याभिवृद्धये  शीतलाष्टमीव्रतं करिष्ये |

इस श्लोक के द्वारा व्रत का संकल्प करें |

🥣 शीतला माता को ठंडा (बासी) भोजन चढ़ाया जाता है।

☘️पूजा वाले दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता।साफ सफाई नहीं की जाती |

🍛 एक दिन पहले ही भोजन बनाकर रखा जाता है।

🍚 माता को दही, पूड़ी, हलवा, मीठा चावल, पुए आदि का भोग लगाया जाता है।

🛕 माना जाता है कि माता की पूजा करने से व्रति के घर में रोग, बुखार,फोड़े -फुंसी ,नेत्र रोग और शीतला-            जनित सर्वरोग और महामारी से रक्षा होती है |

🌼 शीतला माता की कथा 🌼

🌺 बहुत समय पहले एक नगर में लोग शीतला माता की पूजा नहीं करते थे। वे माता के महत्व को नहीं समझते 

      थे और उनकी उपेक्षा करते थे।

👵 एक दिन माता ने लोगों की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए एक साधारण वृद्धा का रूप धारण किया और नगर        में घूमने लगीं।

🍞 वे लोगों के घर-घर जाकर भोजन और पानी माँगने लगीं, लेकिन किसी ने भी उनकी सेवा नहीं की। सभी ने 

      उन्हें अनदेखा कर दिया।

💛 उसी नगर में एक गरीब स्त्री रहती थी। उसने उस वृद्धा को आदर से अपने घर बुलाया और उन्हें ठंडा भोजन        और पानी दिया। उसने बहुत श्रद्धा और प्रेम से उनकी सेवा की।

⚡ कुछ समय बाद उस नगर में भयंकर रोग और चेचक फैल गया। लोग बहुत परेशान हो गए और पूरे नगर में         भय का वातावरण बन गया।

🌿 लेकिन जिस गरीब स्त्री ने माता की सेवा की थी, उसके घर में किसी को भी रोग नहीं हुआ। उसका परिवार         पूरी तरह सुरक्षित रहा।

🙏 तब नगर के लोगों को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने माता से क्षमा माँगी और उनकी सच्चे मन से               पूजा करने लगे।

✨ माता उनकी भक्ति से प्रसन्न हुईं और पूरे नगर को रोगों से मुक्त कर दिया

🌸 इस कथा से मिलने वाली शिक्षा 🌸

🌼 शीतला माता की पूजा से रोगों और बीमारियों से रक्षा होती है।
🥣 माता को ठंडा (बासी) भोजन अर्पित करने की परंपरा इसी कथा से जुड़ी है।
🙏 सच्ची श्रद्धा और सेवा से माता सदैव अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।

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