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Lord Prithu: A Vishnu Avatar

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  🌿✨ The Divine Story of Lord Prithu ✨🌿 🕉️ 1. Rise of Adharma and Fall of King Vena (Emotion: Anger & Concern) King Aṅga’s wife, Sunīthā, who was the daughter of Death, gave birth to a son named Vena. Because of his evil nature, he completely rejected righteousness and became cruel and arrogant. Unable to tolerate his misrule, King Aṅga left the kingdom and went to the forest. The entire kingdom fell into darkness. The sages were filled with compassion and concern— if there is no king, what will happen to the people? So, they made Vena the king, but he became even more unrighteous. Finally, through the collective spiritual power and anger of the sages, Vena was destroyed. 🌾 2. Emergence of Nishada and Divine Manifestation of Prithu (Emotion: Wonder & Divinity) With no ruler left, chaos spread in the kingdom. The sages churned the body of King Vena. From his thighs emerged a deformed being, who became known as Nishada when told “Nishida” (sit down). Then suddenly, a div...

शास्त्रों की 18 स्मृतियाँ -ऋषियों की 18 स्मृतियाँ -हिन्दू धर्म की महत्वपूर्ण स्मृतियाँ

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                                         18 स्मृतियाँ और उनके रचयिता-भाग 1   स्मृति रचयिता ऋषि  स्मृतियों का अगला भाग 10 से 18 पढ़े लिंक पे क्लिक करें  ☘️ 1 मनु स्मृति  राजा मनु और उनके धर्म शास्त्र " मनुस्मृति " का " सनातन धर्म " मे विशेष स्थान है ! सभी स्मृतियों मे " मनु स्मृति " का प्रधान स्थान है ! " प्राधान्यं हि मनो: स्मृतम " ! मनु महाराज द्वारा लिखी स्मृति को ही मनु स्मृति कहते है ! ☘️ 2 अत्रि स्मृति  महर्षि अत्रि वैदिक मंत्र द्रष्टा ऋषि है ! ये ब्रम्हा जी के मानस पुत्र है ! इनकी गणना सप्त ऋषियों मे होती है ! कर्दम ऋषि की पुत्री इनकी देवी " अनुसूईया " इनकी पत्नी है ! जो पतिव्रताओं मे आदर्श है ! अत्रि ऋषि ने अत्रि स्मृति लिखी ! ☘️ 3 विष्णु स्मृति  " भगवान विष्णु " द्वारा पृथ्वी { धरा } देवी को दिया उपदेश वैष्णव धर्मशास्त्र कहलाता है !यह सूत्रों और श्लोकों मे है !" गीता " जी की तरह इसे भी " भगवदवाणी " कहा गया है ! इसमे 100 अध्याय है ! ☘️ 4 हारीत स्मृ...

दुर्गा मासिक अष्टमी व्रत – कब और कैसे करें पवित्र उपवास

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                                                   महा शक्तिशाली दुर्गा माता के व्रत- जो चाहो सो पाओ 🙏🏿  🏵️दुर्गा अष्टमी व्रत कब और कैसे रखें  हर महीने प्रत्येक शुक्ल पक्ष की अष्टमी को दुर्गा अष्टमी व्रत किया जाता है व्रत करने से पहले पता कर ले कि अष्टमी के दिन पंचांग मे सप्तमी तो शेष नहीं बची है क्योंकि सप्तमी के साथ अष्टमी व्रत के लिए अच्छी नहीं मानी जाती ,नहीं तो अगले दिन व्रत करे क्योंकि अष्टमी और नवमी दोनों ही दिन दुर्गा माता की पूजा की जाती है यदि नवमी पड़े तो कोई हानि नहीं है और यदि किसी दिन अष्टमी और नवमी दोनों ही पड़ जाए तो वह महानवमी बन जाती है और श्रेष्ठ मानी जाती है !     🪔अष्टमी व्रत कब से शुरू करें  श्री दुर्गा माता अष्टमी हर महीने आती है यदि व्रत का आरंभ करने की सोच रहे हो तो किसी भी नवरात्रि से शुरू कर सकते है चैत्र या आश्विन {march or september }यह व्रत शक्ति प्राप्त करने के लिए ही रखा जाता है इस दिन देवी दुर्गा की ...

श्री हनुमान का दिव्य जन्म और शक्तियाँ

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  🌺  हनुमान जी की जन्म कथा🌺 🪔हनुमान जी के जन्म की कथा 🪔 किसी भी देवता के जन्म की एक ही तिथि होती है पर हनुमान जी के संदर्भ मे दो मानते है ! *  पहली कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी  *  दूसरी चैत्र शुक्ल पूर्णिमा 🪔 रुद्र के अवतार    *  जबकि पहला " जन्मदिन " है ओर दूसरा " विजयाभिनंदन " का महोत्सव !  "उत्सवसिंधु " मे लिखा है = कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी ,मंगलवार को स्वाती नक्षत्र और मेष लग्न मे माता  अंजनी के गर्भ से हनुमानजी के रूप मे स्वयं शिवजी उत्पन्न हुए थे ! 🌿हनुमान जी का जन्म  * "हनुमदुपासनाकल्पद्रुम " ग्रंथ मे चैत्र शुक्ल पूर्णिमा ,मंगलवार के दिन ,मूँज की मेखला से युक्त ,कौपीन से संयुक्त ,और यज्ञोपवीत {जनेऊ }से भूषित हनुमानजी का उत्पन्न होना लिखा है !   साथ मे ये भी लिखा है कि कैकेई के हाथ से चील के द्वारा आई हुई यज्ञ की खीर खाने से माता अंजना के  उदर से हनुमानजी उत्पन्न हुए ! 🙏🏿सूर्य फल के रूप मे  *  बाल्मीकि रामायण मे किष्किन्धाकांड के सर्ग 66 और उत्तरकाण्ड के सर्ग 35 से पता चलता है कि अंजनी के   ...

काल भैरव अष्टमी 2026 :महत्व , व्रत ,पूजा विधि और धार्मिक लाभ

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💥काल भैरव अष्टमी💥   🎉काल भैरव कौन है  काल भैरव भगवान शिव के ही एक रूप है जिन्हे समय और मृत्यु का देवता माना जाता है इनका आशीर्वाद  लेने से जीवन में  भय ,संकट और नकारात्मकता समाप्त हो जाती है , इनकी पूजा करने से राहू -केतु का प्रभाव समाप्त हो जाता है !    🪔   काल भैरव अष्टमी कब और क्यों मनाई जाती है   हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव अष्टमी मनाई जाती है ! इस दिन भक्त भगवान काल भैरव की विशेष पूजा और आराधना करते है ! इस दिन को भय और कष्टों से मुक्ति पाने का दिन माना जाता है !   🪷  काल भैरव अष्टमी की पूजा विधि   आवश्यक सामग्री और समय  व्रत वाले दिन प्रात:काल भगवान काल भैरव के मंदिर मे जाकर पूजा करें या फिर घर में ही पूजा करें ! पंचामृत ,फूलमाला ,धूप ,शुद्ध घी का दीपक ,भोग प्रसाद फल मिठाई आदि !    🌺  काल भैरव मंत्र      🌺ॐ काल भैरवाय नम:    🌺 ॐ ह्रीं बटुक भैरवाय नम:    🌺ॐ भैरवे नम:   🪻भोग समग्री  भगवान भैरव बाबा को शुद्ध घी के बने हुए आट...

श्री गणेश चतुर्थी व्रत: कथा, विधि और 21 नामों के साथ पूर्ण पूजन

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                                                       🪔 श्री गणेश चतुर्थी व्रत 🪔       पौष मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को " गणेश संकट चतुर्थी " व्रत के नाम से पुकारा जाता है :             🪔 श्लोक   श्लोक = " ममसकलाभीष्टसिद्धये चतुर्थीव्रतंकरिष्ये " यह गणेशजी का व्रत है प्रात: स्नान के बाद संकल्प करके दिन भर मौन रहकर सायकाल चंद्रमा को अर्घ्य देकर भोजन करे !       🪔 व्रत कथा   कथा = माता पार्वती जी ने अपने शरीर के मैल से गणेश को प्रकट किया और अपने द्वार पर पहरा देने के लिए बैठा दिया कुछ समय पश्चात भगवान शंकर जी जब अंदर जाने लगे तो गणेशजी ने उन्हे जाने नहीं दिया तब उन्होंने अनजाने मे अपने त्रिशूल से गणेशजी मस्तक काट डाला और वह चंद्र-लोक मे चल गया ! बाद मे माता पार्वती जी प्रसन्नता के लिए भगवान शंकर जी ने हाथी के नवजात बालक का सिर लाकर गणेशजी के मस्तक पर जोड़ दिया ! परंतु क...

एकादशी पर राजा अम्बरीष की भक्ति और सुदर्शन चक्र की दिव्य कथा

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                                              🌻 ** राजा अंबरीष जी की एकादशी व्रत निष्ठा की कथा**🌻 राजा अंबरीषजी ने एक बार अपनी पत्नी के साथ श्री कृष्ण भगवान को प्रसन्न करने के लिए वर्ष की सभी एकादशी का व्रत का नियम किया ,वर्ष पूरा होने पर धूमधाम से पारण के दिन उन्होंने भगवान वासुदेव की पूजा की ,ब्राम्हणो  को गोदान किया ,जब वे पारण करने जा रहे थे तब ही अचानक "दुर्वासा ऋषि " पधारे !  🪔दुर्वासाजी का क्रोध   अंबरीषजी ने उन्हे भोजन का आग्रह किया तो उन्होंने स्वीकार कर लिया ओर यमुना तट पे स्नान को चले गए अब  द्वादशी केवल एक घड़ी शेष थी, द्वादशी मे पारण ना करने से व्रत भंग होता ,ब्राम्हणो से पूछकर अंबरीषजी ने  भगवान का चरणामृत लेकर पारण कर लिया उधर दुर्वासाजी को अपने तप से ये बात पता चल गई ,तभी उन्होंने  अपने मस्तक से एक जटा उखाड़ ली जिससे कृत्या नाम की राक्षसी निकली ओर उसे अंबरीषजी को समाप्त करने  के लिए भेज दिया ! 🌻राक्षसी कृत्या का भस्म हो...

तुलसीदास: रामभक्ति और अमूल्य शिक्षाएं

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** गोस्वामी तुलसीदासजी **                  🪔गोस्वामी तुलसीदासजी की अमूल्य जीवन कथा🪔    गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म 1532 के  आसपास उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के राजापुर गांव में  हुआ माना जाता है। उनके पिता का नाम "आत्माराम दुबे " और माता का नाम" हुलसी देवी" था। भक्तजन उन्हें “ गोस्वामी तुलसीदास ” के नाम से बड़ी श्रद्धा से संबोधित करते हैं।    जन्म के समय तुलसीदास को 32 दांत जन्मजात होने के  कारण अपशकुन समझा गया। इस अंधविश्वास के कारण  माता-पिता ने उनका पालन-पोषण करने से दूरी बना ली।  बाद में एक साधु नारहरिदास ने उन्हें गोद ले लिया,  और उनका नाम रामबोला रखा।    🏵️शिक्षा और दीक्षा    तुलसीदास को बचपन से ही भगवान राम के प्रति अत्यधिक  भक्ति थी। नरहरिदास ने उन्हें संस्कृत, वेद-पुराण, व्याकरण  और धर्मशास्त्रों की शिक्षा दी। काशी में उन्होंने विद्वानों के  संरक्षण में अपनी आध्यात्मिक और साहित्यिक शिक्षा को  और मजबूत किया। काशी में रहते हुए ही उन्...